थराली का राजनैतिक दंगल, मुख्यमंत्री और प्रीतम कौन करेगा राजनैतिक लक्ष्मण रेखा पार

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थराली का राजनैतिक दंगल, मुख्यमंत्री और प्रीतम कौन करेगा राजनैतिक लक्ष्मण रेखा पार :Tharali By Election Uttarakhand

थराली की राजनैतिक विधानसभा का उपचुनाव बीजेपी के लिए जहा अग्नि परीक्षा का केंद्र बिंदु बना हुआ है वही कांग्रेस कर्नाटक में बीजेपी को मिली हार का मामला उत्तराखंड के थराली में भुनाने की कोशिश करती नज़र आ रही है उत्तराखंड बीजेपी विधायक मगन लाल साह की मौत के बाद यहाँ पर उपचुनाव हो रहा है जिसमे बीजेपी ने मगन लाल शाह की पत्नी मुन्नी देवी का अपना प्रत्याशी बना कर चुनाव मैदान में उतारा है बीजेपी की मुन्नी देवी का राजनैतिक किला वैसे तो काफी मजबूत माना जाता है लेकिन सवाल ये उठ रहा है क्या कर्नाटक में मिली हार का बीजेपी को कही कोई नुकसान तो नहीं होगा कांग्रेस यहाँ पर अपनी जीत के लिए कोशिश करती नज़र आ रही है कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के लिए भी थराली उपचुनाव उनकी राजनैतिक लड़ाई का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद पहला अवसर है

उत्तराखंड में सत्ता संभल लेने के बाद बीजेपी के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक साल का कार्यकाल कैसा रहा है इसको लेकर भी थराली की जनता अपना मतदान कर अपना पक्ष रखेगी बीजेपी हलाकि यहाँ अपने खिलाफ बगावत करने वाली सभी आवाजों को नज़रबंद कर चुकी है जिसका सबसे अधिक नुकसान बीजेपी को यहाँ पर होने वाला था लेकिन अब देखना होगा ये नेता कितनी ईमानदारी से यहाँ मुन्नी देवी को चुनाव लड़वा कर राजनैतिक फायदा करवाते है
थराली में आगामी 28 मई को वोटिंग होनी है विधानसभा उपचुनाव में यहाँ पर बीजेपी अपने विकास कार्यो को आगे बढ़ाये जाने को लेकर काम कर रही है तो वही कांग्रेस यहाँ के विकास नहीं किये जाने का आरोप लगाकर जनता के बीच जीत राम को लेकर कोशिश करती नज़र आ रही है कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राजनैतिक दल थराली का राजनैतिक दंगल जीते जाने का दावा कर रहे है लेकिन यहाँ की जनता किसके साथ अपना मतदान करेगी इसको लेकर भी चर्चा का बाजार तेजी से गरम हो रहा है

उपचुनाव सत्ताधारी के पक्ष में रहा
उत्तराखंड में अब तक जितने भी उपचुनाव हुए है उसमे अभी तक सत्ताधारी पार्टी विजय श्री हासिल करती आयी है लेकिन कर्णाटक में हुए राजनैतिक माहौल का कितना फायदा कांग्रेस यहाँ पार उठा पाती है इसका आकलन अभी किया जाना बाकि है उत्तराखंड में उपचुनाव को लेकर वर्ष 2009 में भगत सिंह कोश्यारी ने कपकोट से इस्तीफा दिया यहाँ पर बीजेपी सत्ता में थी तो यहाँ से शेर सिंह गाड़िया ने उपचुनाव जीता,उसके बाद धुमाकोट विधानसभा से भुवन चंद खंडूरी चुनाव जीते,वर्ष 2009 में विकास नगर विधानसभा में उपचुनाव हुआ तो यहाँ से भी सत्ता धारी बीजेपी होने के कारण बीजेपी के कुलदीप कुमार चुनाव जीते,वर्ष २०१२ में विजय बहुगुणा ने बीजेपी के किरण चंद मंडल से सितारगंज सीट खाली करवा कर यहाँ से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजय बहुगुणा ने बीजेपी के प्रकाश पंत को हरा कर उपचुनाव जीता, कांग्रेस सरकार में मंत्री सुरेंद्र राकेश की मौत के बाद यहाँ से कांग्रेस ने उनकी पत्नी ममता राकेश को उपचुनाव में उतारा तो यहाँ भी वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत गयी इसके बाद सत्ता में कांग्रेस ने तीन विधानसभा उपचुनाव वर्ष २०१४ में लड़े जिसमे हरीश रावत ने धारचूला,सोमेस्वर से रेखा आर्य,और डोईवाला से हीरा सिंह बिष्ट ने उपचुनाव जीता राज्य में जितने भी उपचुनाव अभी तक हुए है उसमे कोई भी चुनाव सत्ताधारी राजनैतिक पार्टी नहीं हार पायी है

 

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