नमामि गंगे का कोलाहल चल बसा गंगा का भगीरथ

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देहरादून। गंगा की निर्मलता को लेकर केंद्र सरकार एक तरफ करोड़ो रूपए खर्चा कर गंगा की निर्मलता को लेकर अपना अभियान चला रही है ऐसे में बीजेपी सरकार के कार्यकाल में दूसरे संत की मौत के बाद सवाल ये भी खड़े हो रहे है आखिर सदन में आंदोलन के बाद होने वाली मौत को लेकर क्या सरकार के साथ साथ वो भी दोषी नहीं जिसके कारण पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल की मौत हुई है ये मामला गंगा की निर्मलता को लेकर आने वाले दिनों भले ही राजनैतिक मुद्दा बने लेकिन गंगा किनारे खनन को भी बंद किया जाना भी जरुरी है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में भर्ती स्वामी सानंद का गुरुवार को निधन हो गया। स्वामी सानंद को बुधवार को हरिद्वार प्रशासन ने एम्स में भर्ती कराया था। 87 वर्षीय आइआइटी कानपुर के पूर्व प्रो जीडी आग्रवाल ने जल भी त्याग दिया था। वह गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर तपस्यारत थे। आज गुरुवार को उनके निधन का समाचार मिलते ही आश्रम के संत समाज में शोक की लहर दौड़ रही। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने इस बात की पुष्टि की है।

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गंगा की निर्मलता को लेकर लम्बे समय से अनशन किया जाता रहा है पूर्व में बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशक के समय भी 13 जून 2011 में गंगा रक्षा की मांग कर रहे निगमानंद की हिमालयन अस्‍पताल जौलीग्रांट में मौत हो गई थी। लगातार 114 दिन अनशन पर रहने के बाद निगमानंद की मौत हुई थी।

प्रो जीडी आग्रवाल की मौत को लेकर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्विटर पर प्रो जीडी आग्रवाल को दिल्ली के एम्स में इलाज करवाए जाने को लेकर ट्वीट किया था किशोर ने भड़ास फॉर इंडिया को बात करते हुए बताय की प्रो जीडी आग्रवाल की मौत राज्य सरकार की लापरवाही के कारण हुई है

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा की प्रो जीडी आग्रवाल के निधन का समाचार काफी दुखद है और गंगा को लेकर उनका आंदोलन काफी समय से चल रहा था लेकिन सरकार द्वारा इसको लेकर नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है जिसके कारण आज एक संत की मौत का दुखद समाचार मिला है उत्तराखंड में प्रो जीडी आग्रवाल का लम्बे समय से आंदोलन चल रहा था लेकिन इस बार वो इलाज के लिए अस्पताल ले जाये गए लेकिन वहाँ से वापिस नहीं लोटे उनके निधन का समाचार मिलते ही राज्य सरकार के आला अधिकरी से लेकर सरकार तक में हलचल साफ तरफ से देखी गई।

बता दें कि गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे. स्वामी सानंद गंगा से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार को पहले भी कई बार आगाह कर चुके थे और इसी साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी. कोई जवाब ना मिलने पर 86 साल के स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे. इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने।

पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल को लेकर उनका निधन कुछ लोगो के लिए इतना जरुरी नहीं जितना उनका आंदोलन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे है लेकिन उनकी मौत को लेकर सदन को निशाने पर बनाया जा रहा है आखिर गंगा की निर्मलता को लेकर अगर आश्रम आंदोलन किये जाने के लिए किसी को भी आगे करता है इसके गलत अर्थ निकाले जाने भी उचित नहीं आखिर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल की मौत का कारण कही न कही गलत निति तो जरूर रही जिसके कारण उनको आंदोलन करना पड़ा।

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