सृजन घोटाला उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बिल्डर भी सीबीआई की राडार पर

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सृजन घोटाला उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बिल्डर भी सीबीआई की राडार पर Srijan Scam Cbi Investigation Up UTTARAKHAND BILDAR

भागलपुर में एनजीओ ‘सृजन’ का हजारों करोड़ का घोटाला उजगार होने के बाद इस मामले को लेकर कई भाजपा नेता से लेकर दूसरे राजनैतिक पार्टी के लोग निशाने पर बने हुए है कई बिल्डर भी इस मामले को लेकर सीबीआई की राडार पर आगये है उनके संपत्ति मामलो से लेकर बनाये जा रहे प्रोजेक्ट की भी जांच तेजी से हो रही है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक भाजपा नेता की जमीन पर एक बिल्डर अपनी प्रोजेक्ट बनाये जाने की भी तैयारी भी कर चूका है जिसका लिंक उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड से भी बताया जा रहा है सीबीआई की जांच में अगर ये बिल्डर सामने आया तो कई भाजपा के उत्तराखंड के नेता भी अपनी संपत्ति का हिसाब देने में भाजपा के मोदी की नज़र में आएंगे।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने सृजन घोटाला में नाम घसीटे जाने को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर पलटवार किया है। उन्‍होंने कहा कि केवल साथ में फोटो आ जाने से कोई अपराधी नहीं हो जाता। अगर फोटो से कोई अपराधी हो जाता है तो लालू का भी शहाबुद्दीन के साथ फोटो है।

विदित हो कि बिहार के भागलपुर में एनजीओ ‘सृजन’ का हजारों करोड़ का घोटाला सामने आया है। इसकी जांच सीबीआइ कर रही है।शाहनवाज ने कहा कि सृजन घोटाला की सीबीआइ जांच चल रही है। कानून अपना काम कर रहा है। जो भी दोषी होंगे, बख्शे नहीं जाएंगे। सृजन घोटाला उजागर होने के पहले लोगों को उसका केवल सामाजिक पक्ष पता था, न कि आपराधिक पक्ष।

शाहनवाज ने कहा कि घोटाला के आरोपियों के साथ फोटो आ जाने के कारण कोई अपराधी नहीं हो जाता। केवल फोटो के आधार पर अपराध में संलिप्‍तता का अारोप लगाना है तो लालू प्रसाद यादव का फोटो भी शहाबुद्दीन के साथ है।

सृजन घोटाला क्या है पूरा मामला
सरकारी विभागों की रकम सीधे विभागीय ख़ातों में न जाकर या वहां से निकालकर ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति’ नाम के एनजीओ के छह ख़ातों में ट्रांसफ़र कर दी जाती थी। आरोप है कि भागलपुर के एक एनजीओ ने पिछले दस साल में बिहार सरकार की नाक के नीचे से करोड़ों रुपए का घोटाला कर दिया। दस साल में एनजीओ ने बिहार की बीजेपी-जेडीयू और आरजेडी-जेडीयू सरकार को तकरीबन 780 करोड़ का चूना लगाया लेकिन दोनों ही सरकारों को इसकी कानों-कान खबर तक नहीं लगी।

सृजन घोटाले में शामिल तत्कालीन भूअर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन ने ही बैंक ऑफ इंडिया (बीओआइ) में खाता खुलवाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर 14 जुलाई 2014 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने सहमति दी थी। घोटाले में सर्वाधिक राशि की निकासी 2014-15 में ही हुई। इससे जाहिर होता है कि तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी की मंशा साफ नहीं थी। अभी वह फरार चल रहा है।

इस घोटाले में अबतक तीन जिला अधिकारियों को जांच के दायरे में रखा गया है। इनके नामों का खुलासा नहीं किया गया है। भागलपुर में रहे जिलाधिकारी केपी रमैया भी सृजन के पक्ष में पत्र लिखने के कारण चर्चा में आ गए। इधर, एसआइटी ने सीबीआइ को ऐसे कागजात सौंपे हैं जिससे सीबीआइ टीम के अधिकारी हैरान हैं राजीव रंजन ने ही बैंक ऑफ इंडिया में खाता खोलने का प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजा था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसपर अपनी सहमति दी थी।

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