बसंत पंचमी के दिन ये 12 नाम करेंगे माता सरस्वती को प्रसन्न: Special pooja for the basant panchami

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बसंत पंचमी के दिन ये 12 नाम करेंगे माता सरस्वती को प्रसन्न: Special pooja for the basant panchami

सोमवार यानी 22 जनवरी को बसंत पंचंमी है. बसंत पंचमी को ‘सरस्वती पूजा’ के रूप में भी मनाया जाता है. देवी सरस्वती को संगीत और कला की देवी भी माना जाता है. इस दिन फूल से लेकर खाने तक की वस्तुओं में पीला रंग इस्तेमाल होता है. वसंत पंचमी को श्रीपंचमी नाम से भी जानते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बंसत पंचमी हर साल माघ महीने के पांचवे दिन मनाई है. बसंत का अर्थ है वसंत और पंचमी का मतलब है पांचवा जिस दिन यह त्योहार मनाया जाता है. इस वर्ष 22 जनवरी को बसंत पंचमी का शुभ दिन है.

सर्दी के महीनों के बाद बसंत और फसल की शुरूआत होने के रूप बसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी को ‘सरस्वती पूजा’ का विशेष महत्व होता है. इस दिन ज्ञान की देवी का आर्शीवाद पाने के लिए विद्यार्थी और बच्चे उनकी पूजा अर्चना करते हैं. इतना ही नहीं संगीत क्षेत्र से जुड़े लोग इस दिन मां सरस्वती की वंदना अर्चना करते हैं क्योंकि हाथ में वीणा धारण किए हुए देवी सरस्वती को संगीत और कला की देवी भी माना जाता है. माँ सरस्वती द्वारा विनती करते हैं की उनके जीवन में ज्ञान हमेशा बना रहे और वाणी की मिठास हमेशा बनी रहे. माना जाता है कि इस दिन ही स्वर व संगीत की उत्पत्ति हुई है. देश के कई हिस्सों में इस दिन जिन बच्चियों के नाक कान नहीं छिदे होते है उन्हें भी बसंत पंचमी के दिन छिदवाना अति शुभ माना जाता है.

बंगाली समुदाय के लोग इस शुभ दिन को अपने बच्चे के पढ़ने और लिखने के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं। छोटे बच्चे बड़ों के देखरेख में देवी सरस्वती की मूर्ति के सामने बैठकर पहला अक्षर लिखने की शुरूआत करते हैं. विद्यार्थी अपनी किताबें, नोटबुक और पेन देवी सरस्वती की मूर्ति के सामने रखते हैं और सभी भक्तों के बीच मिठाई बांटते हैं. कई शिक्षा संस्थानों में भी इस अवसर स्वर की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. माँ सरस्वती ज्ञान और शिक्षा कि देवी हैं इसलिए इस दिन खासतौर परउनकी पूजा अर्चना करने का विधान भी देखने को मिलता है.

इसके अलावा इस दिन प्रेम के देवता, कामदेव की भी पूजा होती है. पंजाब से लेकर उत्तराखंड व् देश के कई क्षेत्रो में लोग बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, पतंग उड़ाते है और मीठे चावल बनाते हैं. पीले रंग को वंसत का प्रतीक माना जाता है. कड़ाके की ठंड के बाद लोग पीले रंग के साथ वसंत ऋतु का स्वागत करते हैं. इस मौके पर देवी सरस्वती को पीले फूल और पीली मिठाई का भोग लगाया जाता है.

कहा जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी. पूरी सृष्टि मौन थी तो ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति लेकर अपने कमंडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की. इसके बाद सृष्टि को स्वर मिले देवता और मनुष्य, सभी मां सरस्वती की पूजा अराधना करने लगे. इसलिए वसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं.

शास्त्रों में मां सरस्वती के 12 नाम बताए गए हैं. कहा जाता है कि इन नामों का नियमित रूप से ध्यान करने वाले मनुष्य की जिह्वा के अग्रभाग में मां सरस्वती का वास हो जाता है. इतना ही नहीं विद्या की देवी मां सरस्वती सदैव उस व्यक्ति की सहायता करती हैं. बसंत पंचमी के दिन खासतौर पर इन 12 नामो की स्तुति करने से देवी सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

देवी सरस्वती के वो 12 नाम इस प्रकार हैं :-

प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती

तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी

पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा

सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी

नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी

एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर:

जिह्वाग्रे वसते नित्यमं

ब्रह्मरूपा सरस्वती सरस्वती महाभागे

विद्येकमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते”

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