सियासी गलियारों में छाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मास्टर स्ट्रोक’

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सियासी गलियारों में छाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मास्टर स्ट्रोक’

देहरादून 500 व 1000 रुपये के नोट बंद करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्णय प्रदेश के सियासी गलियारों में भी छाया रहा। राजनीतिक दलों के भीतर इस फैसले के अच्छे-बुरे असर पर दिनभर बहस और विश्लेषण का दौर चलता रहा। कांग्रेस व भाजपा के प्रदेश मुख्यालयों पर इस चर्चा के बीच नेता व कार्यकर्ता न्यूज चैनलों पर भी नजरें गढ़ाए रहे। खासतौर पर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में इस फैसले से पड़ने वाले प्रभाव पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सुनने को मिली। कोई चुनावी खर्च के लिए जुटाए गए फंड के बेकार होने पर चटखारे लेता दिखा, तो कोई इस बार चुनावी खर्च में भारी गिरावट की उम्मीद पर उत्साहित नजर आया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान भी केंद्र की मोदी सरकार का यह साहसिक फैसला नेताओं व अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। समारोह में शामिल हर आम व खास व्यक्ति मोदी सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले के तात्कालिक और दूरगामी प्रभाव का अपने-अपने तरीके से विश्लेषण करता दिखा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार भी हर सहयोग के लिए तैयार है। अर्थव्यवस्था पर इस फैसले के सकारात्मक प्रभाव पड़े, यह भी केंद्र को देखना होगा। यह सही दिशा का कदम हो सकता है, यदि केंद्र इसके साथ फालोअप प्लान भी लाए।
नोट बदलने के लिए बैंकों में उमड़े लोग
उधर, भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सुबह से ही पार्टी नेता व कार्यकर्ता मोदी सरकार के इस फैसले की चर्चा में मशगूल रहे। हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इसे कालाधन छिपाने वालों पर अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों व कालेधन पर लगाम कसने की दिशा में यह साहसिक व दूरदर्शी कदम है। इससे कालेधन की समानांतर अर्थव्यवस्था का तंत्र छिन्न-भिन्न होगा, तो महंगाई पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड के लोग बोले, ये मोदी का ‘फाइनेंशियल स्ट्राइक’

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार की इस भाजपा प्रदेश में कालाधर, भ्रष्टाचार, चुनावों में कालेधन का उपयोग, आतंकवाद व नकली नोट एक साथ टारगेट पर थे। जिस तैयारी, गोपनीयता व स्पष्टता के साथ यह कदम उठाया, वह भी ऐतिहासिक है। भारतीय राजनीति में शुचिता की दृष्टि से भी यह एक अभूतपूर्व निर्णय है। उधर, कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर भी मोदी सरकार के इस फैसले पर चर्चा का दौर चलता रहा। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय व अन्य वरिष्ठ नेता पार्टी दफ्तर में नजर नहीं आए, मगर अन्य नेता व कार्यकर्ता इसके अच्छे-बुरे प्रभाव पर बहस में व्यस्त नजर आए।

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