श्रीमद् भगवद्गीता के गढवाली रूपांतरण ‘श्री गढ़गीता जी’ का लोकार्पण

0
93

श्रीमद् भगवद्गीता के गढवाली रूपांतरण ‘श्री गढ़गीता जी’ का लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में स्व.जगदीश प्रसाद थपलियाल द्वारा श्रीमद् भगवद्गीता के गढ़वाली में रूपान्तरित पुस्तक ‘‘श्री गढ़गीता जी’’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सम्बोधित करते हुए कहा कि गीता के उपदेशों में मनुष्य जीवन की वास्तविक दिशा एवं सार्थकता निर्धारित की गई है। हमारे ऋषियों ने गहन तपस्या व अध्ययन के पश्चात जिस ज्ञान को आत्मसात किया उसे उन्होंने वेदों का नाम दिया। भगवद् गीता में वेदों, उपनिदषदों का सार निहित है, इसीलिये हमारे मनीषियों ने ‘‘भगवद्गीता’’ को मनुष्य मात्र के लिये सबसे उपयोगी ग्रन्थ बताया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘भगवद्गीता’’ मनुष्य को सांसारिक सक्रियता का उपदेश ही नहीं देती बल्कि जीवन के प्रति दार्शनिक दृष्टिकोण व निष्काम कर्म का भी सन्देश देती है। जीवन की उलझनों, हताशा व अनिश्चितताओं से पार पाने में भी भगवद्गीता हमारा मार्गदर्शन करती है। विश्व की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में भगवद्गीता को सम्मिलित होना इस ग्रन्थ की वैश्विक स्वीकार्यता को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश की लोक संस्कृति एवं लोक भाषा को बढ़ावा देने के लिये प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व0जगदीश प्रसाद थपलियाल द्वारा भगवद्गीता का गढ़वाली भाषा में पद्यात्मक व गद्यात्मक दोनों रूपों में ‘‘श्री गढ़गीता जी’’ के रूप में लिपिबद्ध करना वास्तव में हमारी लोकभाषा की भी बडी सेवा है।

इस अवसर पर पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि स्व0 जगदीश प्रसाद थपलियाल महज एक शिक्षक ही नहीं थे, वे गुरू होकर भी जीवन भर जिज्ञासु छात्र जैसा विचारपूर्ण, कर्ममय जीवन बिताने की चेष्टा में संलग्न रहे। गीता ने उनके जीवन में मार्ग दर्शक का कार्य किया और उन्होंने गढ़वाली भाषा पर यह उपकार किया कि उन सूक्तिपरक महान विचारों की प्रस्तुति अपनी लोक बोली में करने की ठानी। यह उनका हम पर उपकार है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली भाषा में गीता के श्लोकों का अविकल अनुवाद करके स्व0 जगदीश प्रसाद थपलियाल ने विशेष रूप से समाज के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, मीडिया समन्वयक दर्शन सिंह रावत, औद्योगिक सलाहकार के.एस.पंवार, पूर्व राजभाषा निदेशक विश्वनाथ कैलखुरी, डॉ. राम विनय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत, स्व.जगदीश प्रसाद थपलियाल की पत्नी चन्द्रकला थपलियाल व उनकी पुत्री ज्योत्सना थपलियाल के साथ ही उनके परिजन आदि उपस्थित थे।

श्री गढ़गीता जी का प्रकाशन विनसर पब्लिसिंग द्वारा उत्तराखण्ड संस्कृति विभाग द्वारा प्रदत्त आर्थिक सहयोग से किया गया है। पुस्तक का सम्पादन विशेष कार्याधिकारी, सूचना मलकेश्वर प्रसाद कैलखुरी द्वारा किया गया है। विनसर पब्लिसिंग के निदेशक कीर्ति नवानी द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments