शराब की पहरेदारी कर रही उत्तराखंड मित्र पुलिस

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शराब की पहरेदारी कर रही उत्तराखंड मित्र पुलिस
देवभूमि उत्तराखंड में पुलिस अब अपराधी के बजाये शराब की रखवाली करती नज़र आ रही उत्तराखंड पहला राज्य होगा जहा इस तरह की तस्वीर सामने आयी है यही नहीं ये हाल तब है जब राज्य के पुलिस महकमे की कुर्सी पर काम करने वाला पुलिस अफसर विराजमान हुआ है सवाल ये उठा रहा है की क्या अब पुलिस इसी तरह शराब की रखवाली करती नज़र आएगी
बड़कोट। आज तक राज्य या जनपद में वीवी.आई.पी. एंव वी.आई.पी. के घरों के बाहर उत्तराखण्ड की मित्र पुलिस को बन्दुक के साथ पीकेट यानि पैहरा देते हुए देखा था परन्तु बड़कोट थाने के सिपाही बन्दुक के साथ अग्रेंजी शराब की दुकान में पैहरा देकर शराब की सुरक्षा में लगे है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से साफ होता है की अवैध शराब की तस्करी होने की होती है। इधर स्थानीय निवासी पुलिस की इस कार्य प्रणाली को दाल में कुछ काला होने मानते हैं। जानकारी के अनुसार विगत ढेड दो सप्ताह से थानाध्यक्ष द्वारा अग्रेंजी शराब की दुकान के बाहर हर रात्री 10 बजे तक थाने के दो सिपाही बन्दुक के साथ तैनात किये जा रहे हैं जिनका काम सिर्फ इतना है कि दुकान से शराब की कोई पेटी न ले जा सके , अगर कोई भारी मात्रा में अग्रेंजी शराब की दुकान से शराब ले जाता हुआ पाया जाता
है तो उसकी सूचना तत्काल थाने को दी जाय ताकी तस्कारी करने वाले को रंगे हाथों पकड़ा जा सकें । सूत्रों की माने तो कुछ माह से यमुनोत्री क्षेत्र में छोटे बड़े कस्बों में अवैध शराब की तस्करी हो रही थी , उसका खुलासा तब हुआ जब दोबाटा बड़कोट में तैनात दो सिपाहियों ने तस्कर को रोकने का प्रयास किया पर वह एक सिपाही को टक्कर मारकर फरार हो गया था , भले ही पुलिस सिपाहियों के हाथ उसका मोबाईल फोन लग गया था जिसमें थाने के कई सिपाहियों के फोन न. व उनसे बातचीत की पुष्टी तक हुई थी , इतना जरूर हुआ कि एक दिन के लिए पुलिस अधीक्षक ने सात सिपाहियों को लाईन बलुवा लिया था परन्तु राजनैतिक हस्तक्षेप की बजह से उन्हे पुनः बड़कोट थाने में तैनाती मिल गयी , अब आप ही सोचियें कि रात के लगभग साढे नौ बजे पुलिस के सिपाही को एक वाहन टक्कर
मार कर फरार हो जाता है , इसी सूचना थाने में दी जाती है और थाने के सिपाही द्वारा थानाध्यक्ष को इसकी जानकारी दी जाती है उसके बाद भी टक्कर मार कर फरार वाहन को पकड़ने के लिए दवीस नही दी जाती और तो और न ही चोटिल हुए पुलिस सिपाही का मेडिकल कराया जाता है , और न ही अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज होता है , जब मीडिया में खबर आती है उसके 12 -13 घण्टे बाद पुलिस के अधिकारी मुकदमा दर्ज के साथ सिपाही का मेडिकल कराते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि थाना प्रभारी के संज्ञान में सब जानकारी होने के बाद कार्यवाही न होना पुलिस की सलिंप्ता उजागर करता है। इधर अगर बात करें अग्रेंजी शराब की दुकान में दो सिपाहियों का बन्दुक के साथ तैनात होना यह जाहिर करता है कि बड़कोट अग्रेंजी शराब की दुकान से भारी मात्रा में अवैध शराब की तस्करी होती रही है। इसलिए अपने उच्चाधिकारियों के सामने अपने अंक बढ़ाने के लिए शराब की
दुकान में पुलिस को लगाया गया । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले अग्रेंजी शराब की दुकान के बाहर तैनात दोनो सिपाही अपनी डयुटी स्थल पर थानाध्यक्ष को नही मिले जिसके बाद थानाध्यक्ष आग बबुला हो गये फिर क्या जैसे ही सिपाही शराब की दुकान के पास पहुंचा तो उसे पब्लिक के बीच गाली गलोच के साथ खरी खोटी सुना गयी , इस मामले मेें आस पास खडे़ लोगो ने थानाध्यक्ष की घोर निन्दा तक की । इधर स्थानीय निवासी कल्याण , अरविन्द , सोबत , सुरेन्द्र कहते है कि सरकारी अग्रेंजी शराब की दुकान के बाहर पुलिस की पीकेट यानी पैहरा लगाया जाना दो बातों की ओर इसारा कराता है कि एक यह कि यमुनोत्री क्षेत्र में भारी मात्रा में हो रही अग्रेंजी शराब की अवैध तस्कारी दुकान के लोग करते है और दूसरी यह कि शराब की दुकान से मिलने वाला सुविधा शुल्क कुछ कम हो गया या मिलना बन्द हो गया । बड़कोट बाजार में पुलिस द्वारा पैहरा दिया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में व्यापारी ही नही स्थानीय लोग थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा चुके है और उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर हटाने को कह चुके है उसे बाद भी उच्चाधिकारियों का मौन रहना आम लोगो के गले नही उतर रहा है। वही दुसरी ओर इस मामले में प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक पी.एल.कोहली कहते हैं कि मेरे संज्ञान में यह मामला नही है वैसे अग्रेंजी शराब की दुकान के बाहर पुलिस को तैनात किया जाना गलत है, रूटीन चैंकिग में पुलिस जा सकती है पर स्थाई तौर पर दुकान के बाहर नही रह सकती । उन्होने बताया कि कुछ दिन पहले एक पुलिस जवान को एक वाहन टक्कर मारकर फरार हो गया था और सिपाहीयों के हाथ उसका मोबाईल
फोन भी लग गया था और सिपाहियों द्वारा उसमें शराब की तस्करी होना बताया गया था अगर उसी को देखते हुए थानाध्यक्ष ने पुलिस को लगाया होगा तो जानकारी लेता हू ।

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