शांति के लिए आस्था पर बातचीत’ सीरिज का आगाज

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शांति के लिए आस्था पर बातचीत’ सीरिज का आगाज

किसी भी राष्ट्र या समाज की तरक्की और खुशहाली की राह तभी मजबूत हो सकती है, जब वहां सांप्रदायिक सद्भाव व शांति और अमन-चैन के हिमायती लोग बहुमत में हो। इसके लिए विभिन्न धर्मों, संप्रदाय एवं जाति के लोगों में अपनापन व एकजुटता जरूरी है, और आपसी विश्वास व संवाद इसका आधार है। सभी धर्मों के प्रति आपसी विश्वास व आस्था के साथ बहुसांस्कृतिक विवाद को जारी रखते हुए देश-दुनिया में शांति कायम की जा सकती है। दून के राजपुर रोड स्थित विश्व एकता केंद्र (डब्ल्यूआईसी इंडिया) में गुरुवार को विभिन्न धर्मों के विशेषज्ञ प्रतिनिधियों ने इस आशय के विचार व्यक्त किए। मौका था डब्ल्यूआईसी, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग व सर्वम फाउंडेशन की ओर से ‘शांति के लिए आस्था पर बातचीत’ सीरिज का शुभारंभ।
इस मौके पर बोलते हुए उत्तराखंड अल्संख्यक आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने कहा कि हमारे देश अनेकताओं में भी है। भारत का सांप्रदायिक सौहार्द व समभाव बेमिसाल है, इसलिए भारत एक बेहद मजबूत राष्ट्र है। इस्लाम धर्म के विषय में बोलते हुए डब्ल्यूआईसी की प्रेजीडेंट नाजिया युसूफ इजुद्दीन ने अपनी जीवन यात्रा का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि इस्लाम को खुली सोच और खुली आंख से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस्लाम धर्म को एक अलग नजरिए और बनी-बनाई सोच से देखा व समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म की सरपरस्ती में पली-बढ़ी होने के बावजूद उनकी शिक्षा एक को-एजूकेशन स्कूल में हुई। आगे चलकर एक हिंदू ब्राह्मण युवक से मेरी शादी हुई। हैरानी की बात यह है कि शादी पर मेरे घर परिवार से ज्यादा हिंदू धर्म से जुड़े मेरे ससुराल पक्ष में ज्यादा विरोध रहा। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म भी आपसी प्यार, विश्वास का संदेश देता है।
हरभजन सिंह ने कहा कि सभी धर्म एक ही है। हमारे समाज ने हिंदू, मुस्लिक, सिख व इसाई आदि में बांटकर इस तक पहुंचने के अपने-अपने रास्ते तैयार कर लिए हैं। बीइंग हिंदू पुस्तक के लेखक हिंदोल सेनगुप्ता ने कहा कि भारत जैसे देश में हर चीज में धर्म है, इसलिए धर्म को एक तरफ नहीं रखा जा सकता है। जरूरत इस बात की है कि सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए एकजुट कैसे रहें। सतीश जाॅन ने कहा कि मेरी जिंदगी का सार सेवा करवाना नहीं बल्कि सेवा करना है और इसाई धर्म इसी संदेश को आत्मसात करने के लिए लोगों को प्रेतिर करता है। संजय जैन ने कहा कि जैन धर्म नहीं, जीने का एक तरीका है। कोई भी व्यक्ति जैनी हो सकता है। रोशन दलाल ने पारसी धर्म के बारे में विस्तार से अपनी बात रखी। बातचीत का संचालन उर्दू समाचार पत्र दैनिक मिलाप के संपादकऋषि सूरी ने किया।
डब्ल्यूआईसी की प्रेजीडेंट नाजिया युसूफ इजुद्दीन ने कहा कि ‘आस्था पर बात’ सीरिज बहुआयामी आस्था व विश्वास पर सटीक बातचीत का सजीव मंच है। इसका मकसद शांति के लिए जनता के बीच बहु आस्था व विश्वास पर आपसी बातचीत, वाद-विवाद व चर्चा के जरिए बहुसांस्कृतिक संवाद को जोरदार तरीके से गति देना है। एक-दूसरे की आस्था व विश्वास पर परस्पर में आपसी बातचीत व संवाद से समझना, उनके व्यवहार व सहसंबंध को जानते हुए एकजुटता की भावना को मजबूती देना है। उन्होंने बताया कि इस सीरीज की अगली बातचीत के सत्र 25 नवंबर को डीएवी काॅलेज व दून विवि में और 26 नवंबर को तुलाज इंस्टीट्यूट व वुडस्टाॅक मसूरी में आयोजित किए जाएंगे।

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