स्कूल में छात्राओं से जबरदस्ती लिखवाया गया “मैं लेस्बियन हूँ” School Girls wrote I Am Lesbian

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स्कूल में छात्राओं से जबरदस्ती लिखवाया गया “मैं लेस्बियन हूँ”

{ School Girls wrote ” I Am Lesbian” }

अभिभावक बनना अपने आप में एक सुखद अनुभूति है. बच्चे के जन्म के साथ ही माता-पिता की आशाएं, उम्मीदें कई गुना बढ़ जाती है व् बच्चे के भविष्य से जुडी हर बात कई सालो पहले से ही सोचने लग जाते है. लेकिन क्या कभी ऐसा socha था कि jin बच्चो के भविष्य के लिए माँ बाप ने itna कुछ soch कर rakha था कि बाहर दुनिया में जाकर उन्हें वो सुरक्षा मिलेगी जिससे वे अपने माता पिता के सपनो को पूरा कर सकेंगे. स्कूल की दुनिया एक ऐसी दुनिया है जहां बच्चो को घर के बाहर रहने का सलीका मिलता है और स्कूल के ज़रिये ही वे अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणास्रोत पाते हैं.

स्कूल जहां बच्चो के जीवन को सुदृण व् संकल्पसिद्ध बनाता है अगर वही विद्द्यालय छात्र छात्राओं को ऐसी दिशा प्रदान करने कि ओर अग्रसर होने लगे जिससे बच्चे पढ़ाई छोड़कर सेक्स कि तरफ प्रेरित हो तो उन माँ बाप पर क्या बीतेगी जिन्होंने अपने बच्चे इस आशा में विद्द्यालय भेजे कि आगे चलकर वे माता पिता का नाम रोशन करेंगे.

ऐसी ही निंदनीय घटना सामने आयी है कोलकाता के एक गर्ल्स स्कूल में : जहां छात्राओं को जबरन यह लिखवाने पर मजबूर किया गया कि वे लेस्बियन हैं. कथित घटना के बारे में अभिभावकों व् स्कूल के अध्यापको का अलग-अलग मत सामने आया है.

कोलकाता के एक निजी स्कूल ने 10 लड़कियों से जबरन लिखवाया है कि वो लेस्बियन हैं. दक्षिण कोलकाता के कमला गर्ल्स स्कूल ने 10 लड़कियों से एक पत्र पर लिखवाया कि वो लेस्बियन हैं. अभिभावकों को इसकी जानकारी लगने के बाद उन्होंने स्कूल में जमकर हंगामा काटा. अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने जबरदस्ती छात्राओं से ये लिखवाया है. वहीं स्कूल ने अपने बचाव में कहा है कि ऐसा छात्राओं को सही दिशा में लाने के लिए किया गया है.

कोलकाता के कमला गर्ल्स स्कूल ने अपनी 10 छात्राओं से लिखवाया कि वो लेस्बियन हैं, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया है. इस पूरे विवाद पर स्कूल की हेडमिस्ट्रेस ने कहा कि कुछ छात्राओं ने 10 छात्राओं के ऐसी हरकतों में शामिल होने की शिकायत की थी. उन्होंने कहा, ‘हमने उन छात्राओं को बुलाया और उन्होंने ये कबूल किया. मामले की गंभीरता को समझते हुए मैंने उन्हें ये चीज लिखित में देने के लिए कही। सभी 10 छात्राओं ने लिखित में ये दिया है.’ उन्होंने कहा कि ये मामला डिस्कस करने के लिए अभिभावकों को बुलाया गया था. ‘हमारा उद्देश्य उनसे इस बारे में बात करना था ताकि घर और स्कूल में किए गए प्रयासों से उन्हें सही दिशा में लाया जा सके.’

वहीं स्कूल के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘ये बस छात्राओं में अनुशासन के लिए किया गया है. वो क्लास में शैतानी कर रहे थे जिसके बाद हेडमिस्ट्रेस के पास उन्हें बुलाया गया और एक कंफेशन पर साइन कराया गया. छात्राओं के अभिभावकों को इस बारे में बात करने के लिए बुलाया गया था लेकिन ओवररिएक्ट करने लगे और स्कूल पर जबरन साइन कराने का आरोप लगाने लगे. हमने अभिभावकों को साइन किए हुए पत्र लौटा दिए हैं.’

छात्राओं के अभिभावकों ने स्कूल पर ये जबरन लिखवाने का आरोप लगाया है. एलजीबीटी कम्यूनिटी के लिए काम करने वाले एनजीओ भी स्कूल की इस हरकत पर काफी गुस्से में हैं. कोलकाता के एनजीओ Sappho for Equality की सह-संस्थापक मालोबिका ने कहा कि छात्राओं के साथ जो हुआ, वो काफी घिनौना है. ‘कुछ शिकायतों के दम पर उन्हें अलग कर दिया गया, जो कि एक मजाक भी हो सकता था. मेरी समझ नहीं आता कि आखिर इससे होगा क्या? क्या को-एड स्कूल के छात्रों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने पर ये लिखवाया जाएगा?’

खबर के अनुसार स्कूल की पूर्व छात्राओं ने भी स्कूल का माहौल खराब होने की बात कही. एक छात्रा ने कहा कि सिर्फ इस स्कूल में नहीं, बल्कि सभी गर्ल्स स्कूलों का माहौल ऐसा है. लेस्बियन शब्द को इन स्कूलों में एक गलत शब्द माना जाता है. वहीं स्कूल की दूसरी छात्रा ने कहा कि छात्राएं टीचर से खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। उन्हें भेदभाव का डर रहता है.

अगर ऐसी परिस्थिति किसी भी अभिभावक के सामने आएगी तो निश्चित ही स्कूलों के प्रति उनका रवैया नकारात्मक ही होगा. इस घटना के बाद से एक बात ज़रूर सतर्क रहने वाली नजर आ रही है कि स्कूल चाहे कितना भी नामी क्यों न हो केवल स्कूल के नाम से ही विश्वास नहीं किया जाना चाहिए बल्कि हर तरह से और हर समय सचेत रहने कि ज़रूरत हर माता पिता कि ज़िम्मेदारी बन जाती है.

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