सक्तिमान की मूर्ति चौराहे के बजाये पुलिस लाइन में लगती तो होता सम्मान

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सक्तिमान की मूर्ति चौराहे के बजाये पुलिस लाइन में लगती तो होता सम्मान
देहरादून बेजुबान घोड़े पर सवार होकर राज्य में राजनीती को जिस तरह अंजाम दिया जा रहा है वो कही भी राजनैतिक रूप से जनता सही नहीं मान रही यही वजह है की एक घोड़े को लेकर वर्तमान भाजपा से लेकर कांग्रेस तक अपनी राजनैतिक कड़ाई में २०१७ के पुलाव पका कर अपना निशाना साधा जा रहा है देहरादून पुलिस का शाहिद हुआ घोडा सक्तिमान उस समय मौत के मुह में चला गया था जिस समय राज्य में राजनैतिक दलों के बीच सत्ता की कुर्सी का महा संग्राम चल रहा था लेकिन एक बेजुबान घोड़े पर जिस तरह अब राजनीती हो रही है क्या वो तब भी इसी तरह होती जब किसी राजनेता का कोई अपना मौत के नींद सो गया होता शायद नहीं उत्तराखंड में इन दिनों पुलिस का शाहिद हुआ घोडा अचानक गायब हो गया है इस शाहिद हुए घोड़े की मूर्ति को विधानसभा के पास लगाया जा रहा था लेकिन अचानक सक्तिमान घोडा की मूर्ति को वहाँ से हटा दिया गया सवाल ये नहीं की मूर्ति को हटा दिया गया बल्कि ये है की क्या अभी भी राज्य में बेजुबान जानवर पर राजनीती होती रहेगी क्या राज्य में दूसरे मुद्दे गोन हो गए है जो राजनीती के दंगल में कही कोई जगह नहीं ले प रहे सवाल सही है इसीलिए लिए राज्य की जनता इस बेजुबान की मौत को राजनीती से दूर रखे जाने की बात करती नज़र आ रही है सक्तिमान घोड़े को लेकर अगर उस की मूर्ति को लगाया जाना ही था तो वो मूर्ति पुलिस लाइन में लगायी जानी जयदा जरुरी थी ये सही है की भाजपा के विधायक गणेश जोशी ने अगर डंडा नहीं चलाया होता तो शायद सक्तिमान की मौत नहीं होती ये मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में गणेश जोशी के लिए पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मंसूरी विधानसभा में सिरदर्द बन सकता है आने वाले दिनों में यही उम्मीद की जा सकती है की राज्य की राजनीती के बेजुबान घोड़े की जगह राज्य के मुद्दों को लेकर गरम हो

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