सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीड़ यशपाल आर्य

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सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीड़ यशपाल आर्य
देहरादून प्रदेश के राजस्व एवं भू प्रबन्धन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, सहकारिता, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण सड़कें एवं ड्रेनेज, भारत-नेपाल उत्तराखण्ड नदी परियोजनाएं मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में विधान सभा सभागार में उत्तराखण्ड के जिला सहकारी बैंक कर्मचारी संगठनों की मांगों एवं प्रदेश की पैक्स को आॅनलाइन करने विषयक बैठक सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि उन्होंने सहकारी बैंकों के कर्मियों के वेतनवृद्धि को लेकर किये जा रहे सांकेतिक प्रदर्शन की पीड़ा को समझते हुए बैठक बुलाई है। उनका कहना था कि सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीड़ है तथा सहकारी बैंक किसानों, स्वयं सहायता समूहों, बेरोजगारों की पहुॅच के लिए आसान संस्था है, जो न्यूनतम ब्याज दर पर ग्रामीणों को वित्त पोषण कर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने बैंक कर्मियों से और अधिक मेहनत एवं कत्र्तव्य निष्ठा से कार्य कर सहकारी बैंक के माध्यम से सरकारी की योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुचाने तथा ग्रामीणों का आर्थिक स्तर बढ़ाने की अपेक्षा की। उन्होंने बैंक का कार्य और सुदृढ़ करने के लिए बैंकों के अधीनस्थ ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत पैक्स को आॅनलाईन करने के लिए शीघ्र टैण्डर निर्गत करने के निर्देश अपर सचिव (कैडर) एच0एस0ढाका को दिये।
सहकारिता मंत्री यशपाल आर्य ने बैंक कर्मचारियों एवं कैडर आॅफीसर्स को विगत 1 सितम्बर, 2015 से वेतन का 22 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने की स्वीकृति दी, जिस पर सहकारी बैंक के कर्मचारियों द्वारा राज्य सरकार एवं सहकारिता मंत्री की उदारता की मुक्त कण्ठ से सराहना करते हुए सांकेतिक विरोध को वापस लिया गया तथा सहकारी बैंक को व्यवसायिक बैंकों के साथ प्रतियोगिता में लाने के कड़ी मेहनत से कार्य करने का आश्वासन दिया गया। ज्ञातव्य है कि वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सहकारी बैंक के कर्मी विगत 4 सितम्बर से काली पट्टी बांध कर सांकेतिक विरोध कर रहे थे, तथा विगत 23 सितम्बर को सामूहिक अवकाश पर चले गये थे, जिसका संज्ञान लेते हुए सहकारिता मंत्री द्वारा आज की बैठक आहूत की गई। इस निर्णय से सहकारी बैंकों पर लगभग 13 करोड़ का वित्तीय भार पड़ेगा।
बैठक में अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक नैनीताल राजेन्द्र सिंह नेगी ने कैबिनेट के पूर्व के निर्णय राज्य सरकार की योजनाओं में उपलब्ध धनराशि का 10 प्रतिशत अंश सहकारी बैंकों में जमा कराने की अनिवार्यता को सख्ती से अनुपालन कराने के लिए माननीय मुख्यमंत्री से मिलने की पैरवी की, जिस पर सहकारिता मंत्री श्री यशपाल आर्य ने इस सम्बन्ध में प्रतिनिधि मण्डल के साथ मुख्यमंत्री से शीघ्र मिलने की स्वीकारोक्ति दी। इस सम्बन्ध मंे सहकारी बैंक के अध्यक्षों के साथ सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में माननीय मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात की जायेगी।
जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डाॅ0 के0एस0राणा ने सहकारिता मंत्री को बताया की राज्य सरकार द्वारा सहकारिता-सहभागिता योजना में सहकारी बैंकों को लगभग 71 करोड़ रूपये दिया जाना है। जिसके लिए उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध करने की पेशकश की। ज्ञातव्य है कि सहकारिता सहभागिता योजना में कृषकों को 50 हजार रूपये का ऋण 5 प्रतिशत न्यूनतम ब्याज पर तथा 50 हजार से 3 लाख तक का ऋण 5.5 फीसदी ब्याज पर सहकारी बैंकों द्वारा किसानों को दिया जाता है, जिसकी सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा बैंकों को दी जाती है।
अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक पौड़ी अर्जुन सिंह बिष्ट तथा जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा प्रशान्त भैसोड़ा का कहना था कि उनके जनपद में अधिकतर समितियाॅ आर्थिक स्थिति से काफी कमजोर हैं जिन्हें सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि सहकारी बैंकों द्वारा ही राज्य सरकार की दिशा निर्देशों पर गन्ना किसानों को बकाया भुगतान किया जाता है। इस वर्ष 50 करोड़ रूपये की धनराशि सहकारी बैंक द्वारा गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए दी गई। तथा सहकारी बैंकों द्वारा ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में कार्यरत्त स्वंय सहायता समूहों विशेषकर महिलाओं, बेरोजगारों को कम ब्याज पर ऋण दिया जाता है।
बैठक में जिला सहकारी बैंक ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़़, उत्तरकाशी के अध्यक्ष क्रमश सुभाष बेहड़, दल बहादुर सिंह बाफिला, रणजीत सिंह रावत, सचिव सहकारिता विजय ढौंडियाल, प्रबन्ध निदेशक राज्य सहकारी बैंक राजेन्द्र प्रसाद, जिला सहकारी बैंक संगठनों के पदाधिकारी एवं सचिव/महाप्रबन्धक उपस्थित थे।

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