रानीपुर विधायक के चुनावी मानिफेस्टटो में फ्रेगमेन्ट मुद्दा पाच सालो तक सोया रहा

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रानीपुर विधायक के चुनावी मानिफेस्टटो में फ्रेगमेन्ट मुद्दा पाच सालो तक सोया रहा 
हरिद्वार जनता से वादे और फिर उन पर कारवाही का लोली पॉप पाच सालो तक विधायक की कुर्सी चुनाव आते ही फिर से जनता से वादे आखिर राजनीती इसी का नाम है जनता भी वादे करने वाले ऐसे लोगो के खिलाफ मतदान नहीं किये जाने का मन बना चुकी है यही कारन है की जनता के कुछ विधायक अब जन सेवक न होकर महज अपनी राजनैतिक सेवा का लाभ ले रहे है हरिद्वार जनपद का एक बड़ा मुद्दा जनता की अदालत में परोसा जा रहा है की आखिर जनता का सेवक पाच सालो तक क्यों सोया रहा
जिला हरिद्वार,जिसकी सबसे ज्वलन्त समस्या फ्रेगमेन्ट है ,जिस पर न किसी जन प्रतिनिधि की नींद टूटी और न ही सरकार की।जहाँ प्रदेश की सरकार विकास के बड़े बड़े दावे करती वही जिला हरिद्वार की जनता इस डर के साए में जीवन गुजार रहे है कि न जाने कब उनके सपनों का महल,उनकी जीवन भर की आस उनका घर, सरकारी सम्पती कहलाने लगे।यह कानून पुरे उत्तराखंड में लागू होता है जबकि उससे सिर्फ जिला हरिद्वार ही प्रभावित होता है।
दरसल उनके जीवन को इस कदर अंधकार मय करने के पीछे कई लोगों के काले हाथ व् कारनामे है।पर गरीब लाचार व्यक्ति दोष दे भी तो किसे।अपनी किस्मत को कोसते ये लोग सिर्फ डर के साए में जीवन गुजार रहे है। इनके साथ छल करने वाले और कोई नही बल्कि वे लोग है जो इनसे इनकी खून पसीने की गाढ़ी कमाई में से लाखों का मुनाफा कमा इन्हें घने अँधेरे में धकेल सुख की नींद सोते है।

आखिर दोषी कौन है इस सब के लिए,वो जो सारी सुविधाएं मुहिया कराने की बड़ी बड़ी बातें कर कॉलोनी काट,प्लाट बेच करोड़पति बन बैठे,या सरकार जो राजस्व प्राप्त कर मजे से चैन की बंसी बजा रही है ।

दोषी दोनों ही है क्योंकि कानून को ताक पर रख भोली भाली जनता को अपनी सांठ गांठ से बेफकूफ बना ये लोग खुल्लमखुला घूम रहे है।

आखिर फ्रेगमेंट है क्या, फ्रेगमेंट धरा 168A का उलनन्घ्न है, मतलब चकबन्दी के बाद पूरे चक का विक्रय होगा यदि उसे टुकड़ों में बेचा जाएगा तो वह सरकारी संपत्ति कहलाएगी।
जरा सोचिए जिस व्यक्ति ने अपनी जीवन भर की कमाई लगा अपने सपनो का महल बनाया हो और सरकार उसे हड़पने को उतावली हो तो,कैसे वह व्यक्ति,उसका परिवार जीवित रह पाएंगे।खुद को ठगा सा महसूस करना इंसान जाए तो किसकी शरण में।उसकी सुनने वाला,उसे ढांढस बंधाने वाला कोई नही।
हरिद्वार जिले का लगभग 35% आबादी छेत्र फ्रेगमेन्ट के दायरे में आता है। 2006 से पहले कटी कॉलोनियों में यह कानून लागू होता है। जहाँ प्लाट के बैनामे तो कर दिए जाते है किंतु संपत्ति में नाम का दाखिल खारिज़ नही किया जाता।यदि कोई दाखिल खारिज़ को जाता है तो उस पर सरकारी मुकदमा कर दिया जाता है।फ्रेगमेंट के दायरे में आने वाली कई कॉलोनियां है जैसे जगजीतपुर,सुभाषनगर,जमालपुर,सलेमपुर,कांगड़ी,लक्सर ,रुड़की में भी कई जगह फ्रेगमेंट कानून लागू होता है।
नेताओं का भू माफियाओ को संरक्षण व् साठ गांठ होने के कारण सरकार इस समस्या के समाधान करने से कतरा रही है।
लगातार हरिद्वार जिले की जनता को पिछले 10 वर्षों से वोट के नाम पर ठगा जा रहा है।भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकार को देख चुकी जनता अब बेबस और हताश हो चुकी है।
संस्था हिमालय के सजग प्रहरी द्वारा 27 दिन का आमरण अनशन 3 माह पहले इसी समस्या को लेकर किया गया था।लेकिन प्रदेश की अपाहिज सरकार इस पर कोई निर्णय नही दे पाई है।लाचार और बेबस शाशन और प्रशाशन ने अनशन को ख़त्म कराने को भरसक प्रयास किया और मुख्यमंत्री हरीश रावत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश कांग्रेस नेता एस पी सिंह इंजीनियर,और जिला अद्यक्ष कांग्रेस ग्रामीण तेलुराम द्वारा संस्था के अनशन को इस आस्वाशन पर ख़त्म कराया गया था कि सरकार इस मामले को लेकर संजीदा है और कैबिनिनेट की मीटिंग होते ही इस पर फैसला आ जाएगा। किन्तु चुनाव फिर सर पर आ गया है और सरकार ने अभी तक अपनी चुप्पी नही तोड़ी है।
गत 10 वर्षो में भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारें अपना दम भर चुकी है किंतु फ्रेगमेन्ट से निजात दिलाने में कोई भी कामयाब नही हुआ।
रानीपुर विधायक के चुनावी मानिफेस्टटो में फ्रेगमेन्ट मुख्य मुद्दा था किंतु वह 5 साल विधानसभा में मुख्य मंत्री से अपने रिश्ते का ही डीएनए कराते रहे ।सगा या सौतेले रिश्ते के प्रश्न का उत्तर तो जनता को नही जानना था।जनता सिर्फ अपनी जीवन भर की पूंजी को लूटने के दर्द से उभरना चाहती थी।लेकिन जनता के साथ विधायक रानीपुर ने छल किया और अपनी नाकामयाबी साबित कर दी क्योंकि वो 5 साल में इक बार भी विधानसभा में फ्रेगमेन्ट पर सवाल नही उठा पाए।
जब रानीपुर छेत्र में ही संस्था हिमालय के सजग प्रहरी द्वारा 27 दिन तक आमरण अनशन किया गया तो भाजपा विधायक प्रदेश की कांग्रेस सरकार जो उनसे सौतेला व्यवहार कर रही थी उससे सगा रिस्ता निभा कर अनशन से किनारा किये बैठे रहे जो उनकी नियत और काबलियत पर प्रश्नचिह् बन चुका है।वही मुख्यमंत्री परिवार भी हरिद्वार से चुनाव लड़ने के सपने संजो रहा है किंतु अब जनता पूरी तरह से त्रस्त हे और लोकतंत्र का इस प्रकार हनन होते देख मन बना चुकी है वोट उसी व्यक्ति को देंगे जो पहले उनकी समस्या से निजात दिलाएगा।।

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