राज्य स्थापना दिवस पर चार नए जिलों की घोषणा की उम्मीद

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राज्य स्थापना दिवस पर चार नए जिलों की घोषणा की उम्मीद

देहरादून राज्य स्थापना दिवस पर क्या सरकार नए जिलों की घोषणा करेगी। यह सवाल सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तैरता रहा। मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाल ही में विधानसभा चुनाव से पहले कुछ नए जिले बनाने के बयान के बाद सबकी नजरें इस ओर टिकी हैं कि क्या इसकी घोषणा आज की जाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने भी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय घोषित चार नए जिलों के गठन की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री को 450 वां अनुस्मारक भेजा।
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पिछली भाजपा सरकार ने 15 अगस्त 2011 को स्वतंत्रता दिवस पर ऐन विधानसभा चुनाव से पहले चार नए जिलों यमुनोत्री, कोटद्वार, रानीखेत और डीडीहाट के सृजन की घोषणा की थी। इसके बाद आठ दिसंबर को नए जिलों के गठन का शासनादेश भी जारी कर दिया गया मगर फिर विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय ने मसले को लटका दिया।कांग्रेस ने सत्ता में आने पर नए जिलों के गठन के लिए कमिश्नर गढ़वाल की अध्यक्षता में एक समिति बनाकर नए जिलों का मामला उसके हवाले कर दिया। इस समिति ने इसी वर्ष फरवरी में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भाजपा सरकार के समय घोषित चार नए जिलों के गठन की ही संस्तुति की गई।
गत मार्च में सियासी उठापटक के कारण नए जिलों के गठन का मसला फिर लटक गया। तब सरकार ने आठ नए जिलों के गठन की तैयारी की थी। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘जागरण’ से बातचीत में 11 नए जिले व दो नई कमिश्नरी बनाए जाने की बात कही। बाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विधानसभा चुनाव से पहले सभी 11 नहीं, बल्कि उन कुछ जिलों का गठन करेगी, जिनका सीमांकन आदि का कार्य पूर्ण हो गया है।
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इससे संकेत गए कि सरकार विधानसभा चुनाव से पहले उन्हीं चार जिलों का गठन करने जा रही है, जिनकी घोषणा पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय हुई थी और जिनकी संस्तुति मौजूदा कांग्रेस सरकार द्वारा गठित समिति ने भी की है।
अब जबकि विधानसभा चुनाव में महज तीन-चार महीने का वक्त शेष है और डेढ़-दो महीने बाद कभी भी आचार संहिता लागू हो सकती है, आम जनता उम्मीद कर रही है कि राज्य स्थापना दिवस पर नए जिलों की घोषणा हो सकती है।
खासकर, उन स्थानों के लोग खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं, जहां संभावित नए जिले वजूद में आ सकते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को नए जिलों के गठन के संबंध में पत्र भेजा। पत्र में छोटी प्रशासनिक इकाइयों की हिमायत करते हुए सरकार से मांग की गई है कि चाहे जितने भी नए जिले बनाए जाएं, पहले उन चार जिलों के शासनादेश को पुनर्जीवित किया जाए, जो पिछली भाजपा सरकार ने घोषित किए थे।

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