72 टुकड़ो का कातिल राजेश गुलाटी दोषी करार

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72 टुकड़ो का कातिल राजेश गुलाटी दोषी करार Rajesh Gulati Convicted Anupama Murdar Case 72 टुकड़ो का कातिल राजेश गुलाटी दोषी करारदेहरादून प्यार के बाद सात फेरो का बंधन कोई सोच भी नहीं सकता वो इतना दरिंदा बनकर अपनी पत्नी के कसाई से भी बढ़ कर टुकड़े करेगा देहरादून में इसी तरह का मामला सात साल पहले जब सामने आया था तो देहरादून सहित इसकी गूंज से दुनिया का हर इंसान सोचने पर मजबूर हो गया था की आखिर कोई पति इतना दरिंदा कैसे हो सकता है देहरादून की अपर जिला जज पंचम की अदालत ने इस मामले को लेकर सजा का ऐलान किये जाने से पहले राजेश गुलाटी को दोषी माना है उसकी सजा का फैसला फ्राइडे को सुनाया जायेगा

सात साल पहले अंजाम दिया था दरिन्दगी का खूनी खेल

सात साल पहले अंजाम दिए गए अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में कोर्ट ने राजेश गुलाटी को दोषी करार दे दिया है। अपर जिला जज पंचम की अदालत में 18 अगस्त को अंतिम बहस पूरी हो गई थी। जिसके बाद आज राजेश गुलाटी को धारा 302 हत्या और 201 सबूत मिटाने के आरोप में दोषी करार दे दिया गया है। गुलाटी की सजा का ऐलान कल किया जाएगा। वहीं अदालत ने सुनवाई के दौरान मृतक के दो नाबालिग बच्चों की गवाही को अमान्य कर दिया। इस दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश और अपने बयान से पलटे दो गवाहों के बयानों को संक्षिप्त रुप से अदालत में अपने फैसले का आधार बनाया।

दिल दहला देने वाली यह घटना कैंट कोतवाली क्षेत्र के प्रकाशनगर में 11 दिसंबर 2010 को सामने आई थी। सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी पुत्र सतनाम गुलाटी मूल निवासी 141/1 फस्र्ट फ्लोर सत्य निकेतन नई दिल्ली यहां एक मकान में पत्नी अनुपमा और दो बच्चों के साथ रहता था। 17 अक्टूबर 2010 को अनुपमा अचानक लापता हो गई।

बच्चे जब भी राजेश से मां के बारे में पूछते तो वह कहता कि उनकी मां नाना-नानी के घर गई हुई है। करीब दो माह तक ऐसे ही चलता रहा। इस दरमियान मायके पक्ष के लोगों का अनुपमा से संपर्क नहीं हुआ तो 11 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई राजेश के प्रकाशनगर स्थित आवास पर पहुंचा, मगर उसे घर में नहीं घुसने दिया गया। यह सूचना उसने पुलिस को दी। पुलिस ने घर की तलाशी ली तो एक कमरे में रखे डीप फ्रीजर से अनुपमा गुलाटी के लाश के टुकड़े मिले।

चार माह की विवेचना के बाद 10 मार्च 2011 को कैंट पुलिस ने राजेश को हत्या का आरोपी बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोप पत्र में पुलिस ने बताया कि अनुपमा और राजेश में अक्सर झगड़ा होता था। 17 अक्टूबर 2010 की रात भी दोनों में मारपीट हुई। इस दौरान अनुपमा के सिर पर बेड का कोना लग गया और वह बेहोश हो गई। इसके बाद राजेश ने मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या कर दी।

अगले दिन राजेश ने बाजार से 20 हजार रुपये में डीप फ्रीजर खरीदा और लाश उसमें छुपा दी। जब खून जम गया तो राजेश ने बाजार से पत्थर काटने वाला ग्राइंडर व आरी खरीदी और उनसे लाश के टुकड़े किए। लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसने तीन बार में कुछ टुकड़े पॉलीथिन में करके मसूरी में पहाड़ी से नीचे फेंके। वह धीरे-धीरे यह कार्य कर रहा था ताकि किसी को शक न हो, मगर इसी बीच उसका भेद खुद गया।

देहरादून का सबसे खतरनाक खूनी खेल का सच जब उजागर हुआ था तब सभी ने इतनी बड़ी कहानी का खुलासा हुआ जिसकी कल्पना कोई कर भी नहीं सकता है इस मामले पर सात साल बाद आने वाले आरोपी राजेश गुलाटी को धारा 302 हत्या और 201 सबूत मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया जिस पर फ्राइडे को देहरादून की अदालत अपना फैसला सुना कर उसकी सजा का ऐलान करेगी क़ानूनी जानकारों के अनुसार हत्या के मामले पर राजेश गुलाटी को उम्र कैद की सजा हो सकती है

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