रावण फूंका तो ऐसे मरे सैकड़ों

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देहरादून/पंजाब: पंजाब के अमृतसर में दिल दहला देना वाला एक बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है. पठानकोट से अमृतसर आ रही एक ट्रेन की चपेट में आने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. दशहरे के मौके पर इस अनहोनी घटना ने देशभर को हिला कर रख दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हादसा उस वक्त हुआ जब लोग अमृतसर के नजदीक चौड़ा बाजार में रेलवे ट्रैक के पास रावण दहन कर रहे थे.

दरअसल, रेलवे ट्रैक के नजदीक दशहरे के मौके पर रावण दहन का कार्यक्रम चल रहा था. इस दौरान हजारों की भीड़ वहां इकट्ठा थी. तभी वहां भगदड़ मच गई और लोगों को ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी. जिसके कारण कई लोग एकाएक ट्रेन की चपेट में आ गए. फिलहाल मृतकों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है. पंजाब के मुख्यमंत्री ने गृह सचिव, स्वास्थ्य सचिव और एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर को तुरंत अमृतसर जाने के निर्देश दिए हैं. वहीं राजस्व मंत्री सुखबिंदर सरकारिया को बचाव अभियान की निगरानी के लिए तत्काल अमृतसर पहुंचने के लिए नियुक्त किया गया है.

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘अमृतसर रेल हादसे के बारे में सुनकर सदमे में हूं. दुःख की इस घड़ी में मदद के लिए सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को खुले रहने के लिए कहा है. जिला अधिकारियों को युद्ध स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.’ उन्होंने कहा कि अमृतसर में दशहरा के अवसर पर हुई रेल दुर्घटना के राहत और बचाव कार्य की व्यक्तिगत निगरानी के लिए अमृतसर जा रहा हूं. सरकार मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए मुआवजा और घायलों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त ईलाज किया जाएगा.’

उत्तरी रेलवे के सीपीआरओ ने कहा कि गेट नंबर पर 27 पर अमृतसर और मनावाला के बीच ये हादसा हुआ. दशहरा का जश्न हो रहा था और कुछ घटना हुई जिसके बाद लोग बंद गेट नंबर 27 की तरफ दौड़ने लगे और डीएमयू ट्रेन नंबर 74943 उस बंद गेट से गुजर रही थी. मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार ट्रेन की रफ्तार काफी तेज थी और लोग उसकी चपेट में आ गए. पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच चुकी है. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है.

स्थानीय लोग इसके लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. साथ ही स्थानीय लोगों का कहना है ट्रेन यहां से बिना कोई हॉर्न दिए गुजरी जिससे लोग सतर्क नहीं हो पाए. वहीं मृतकों के लिए 5-5 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया गया है. वही दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि रावण दहन के वक़्त नवजोत कौर सिद्धू भी वहीं मौजूद थीं लेकिन उन्होंने इस हादसे से कोई सरोकार न रखते हुए वहां से चुपचाप निकल जाना ज्यादा उचित समझा. इस बात से वहां के लोगो में काफी रोष भी है.

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