राष्ट्रपति स्वामी राम हिमालय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए

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राष्ट्रपति स्वामी राम हिमालय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए

देहरादून राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आज देहरादून में स्वामी राम हिमालय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।
जहां बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा स्वामी राम हिमालय विश्वविद्यालय से आज डिग्री प्राप्त करने वाले चिकित्सा, नर्सिंग और प्रबंधन के छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह आदर्श वाक्य तब अर्थपूर्ण हो जाता है, जब हमारे देश में चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली हमेशा उच्च नैतिक आधार पर खड़ी हो। ऐसी प्रणाली का प्रमुख बिन्दु केवल रोगियों का कल्याण होना चाहिए। हमें स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक वैज्ञानिक और कुशल बनाने के लिए समर्पित नर्सों, डॉक्टरों और प्रबंधकों की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी राम बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे और उन्हें अपनी मातृभूमि तथा जन्म स्थली से अति प्रेम था। हालांकि कम उम्र में कर्वीरपिथम के शंकराचार्य के रूप में अभिषेक किये जाने के बावजूद उन्होंने योग-ध्यान की जीवन शैली अपनाने के लिए उस उच्च आध्यात्मिक पद को त्याग दिया। उन्होंने एक नई विधा के रूप में समग्र स्वास्थ्य की स्थापना की, जो एलोपैथिक चिकित्सा से कही बेहतर है। हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट में उन्होंने पूर्व के ज्ञान और पश्चिम की आधुनिक तकनीकों के मेल के महत्व पर बल दिया।

स्वामी राम बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे,राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने कहा कि यह ध्यान देने की बात है कि पच्चीस वर्ष पहले ग्रामीण विकास के लिए एक टिन की छत वाले छोटे से घर का ओपीडी आज एक सुंदर बस्ती और विश्वविद्यालय बन गया है। आज स्वामी राम हिमालय विश्वविद्यालय चिकित्सा, पैरा-मेडिकल साइंस, नर्सिंग, इंजीनियरिंग और प्रबंधन के क्षेत्र में गुणवत्ता परक उच्च शिक्षा प्रदान करता है। यह उत्तराखंड के 1200 से अधिक गांवों के लोगों की सेवा में कार्यरत है। यहां पर स्वास्थ्य, शिक्षा और आय सृजन कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह 750 बिस्तरों वाले मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और राज्य के अत्याधुनिक 250 बिस्तर वाले कैंसर केंद्र के माध्यम से तृतीयक देखभाल सेवाएं प्रदान करता है।

उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0 कृष्ण कान्त पाल ने उच्च शिक्षा को रोजगार परक बनाये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि उच्च शिक्षा के माध्यम से युवाओं को रोजगार मांगने वाले के स्थान पर रोजगार प्रदान करने वाले वर्ग में बदला जा सकता है। इसके लिए राज्य में उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार करने होंगे। राज्यपाल ने कहा, ‘‘हमें कौशल विकास तथा व्यवसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हमारे युवा सशक्त हो सके, स्वरोजगार प्राप्त कर सकें।’’
राज्यपाल डा0 पाल ने यह विचार शुक्रवार को जौलीग्रांट में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। इससे पूर्व, राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि एवं भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पर उनका धन्यवाद भी किया।
राज्यपाल ने राज्य में रोजगारोन्मुख उच्च शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया ताकि रोजगार मांगने वाले युवा वर्ग को रोजगार देने वाले युवाओं में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधारों की आवश्यकता है। ज्ञान की सदी होने के कारण हमारे विश्वविद्यालयों को ज्ञान सृजन तथा अनुसंधान का ऐसा केन्द्र बनना होगा जहाॅं नवोन्मेष तथा प्रयोग पनप सकें। उन्होंने कहा हमें एक ऐसे शिक्षा तंत्र की आवश्यकता है जो हमारे युवाओं के चरित्र का निर्माण करे तथा उन्हें नवोन्मेषी तरीके से सोचने हेतु प्रोत्साहित करने के साथ ही रचनात्मक, आत्मविश्वासी तथा आत्मनिर्भर बना सके।
अंतराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के बदलते परिवेश के बारे में बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समान चुनौतियों का सामना कर रहा है। ‘‘यहां पर उपलब्ध आधारभूत सरंचना तथा मानव संसाधन पर भारी दबाव है। आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार तकनीकि का प्रयोग, राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक अद्यतन सूचना व ज्ञान की पहंुच में उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
राज्यपाल डा0 पाल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राज्य स्थापना के बाद से उŸाराखण्ड में विश्वविद्यालयों की संख्या पांच से बढ़कर बाईस हो गयी है। यद्यपि उन्होंने कहा कि संख्या में वृद्धि के साथ ही गुणात्मक सुधार भी होना चाहिये। पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों के दैनिक जीवन की कठिनाईयों के बारे में बोलते हुए राज्यपाल ने इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि एचआईएचटी के ग्रामीण विकास संस्थान ने 1200 से अधिक गांवों को गोद लिया है तथा स्थानीय स्तर समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि स्वामी राम, प्राचीन ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकि के एकीकरण में विश्वास रखते थे। इस विचार को ध्यान में रखते हुए उन्होने ऐलोपैथी, होम्योेपैथी, आयुर्वेद, योगा तथा ध्यान-शरीर चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा की व्यवस्था एचआईएचटी में की। यह प्रसन्नता की बात है कि भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा भी इनमें से कुछ चिकित्सा पद्धतियों को मान्यता प्रदान की गई है।
राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके व्यवहार तथा कार्यों का श्रेय उनके संस्थान को जायेगा। राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘‘ आप को राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में सबसे आगे रहना है। आपके सभी प्रयत्नों में बुद्धिमता, सहानुभूति, प्रतिबद्धता, सकंल्प तथा दूरदर्शिता परिलक्षित होनी चाहिये। अपने हृदय के अन्दर मात्र अपना उद्देश्य ही नही अपितु उसे प्राप्त करने के साधन भी खोजे’’

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