प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का वार्षिक आवंटन बढ़ाने को लेकर केंद्रीय मंत्री से मिले मुख्यमंत्री

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का वार्षिक आवंटन बढ़ाने को लेकर केंद्रीय मंत्री से मिले मुख्यमंत्री
देहरादून प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सम्पर्क मार्गों से वंचित रह गई आबादियों को सड़कों से जोडने के लिए नए प्रोजेक्टों को मंजूरी देने के साथ ही इसमें राज्य के लिए वार्षिक आवंटन की राशि को 288 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 550 करोड़ रूपए किया जाए। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पीएमजीएसवाई की सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 60 करोड़ 61 लाख रूपए धनराशि जल्द अवमुक्त की जाए। बुधवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, पेयजल व स्वच्छता मंत्री चैधरी बिरेंद्र सिंह से भेंट कर उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक भारत सरकार 2010 करोड़ 24 लाख रूपए धनराशि के 1125 प्रोजेक्टों को मंजूरी दे चुकी है। 31 मार्च 2015 तक 623 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं जबकि 493 कार्यों पर काम चल रहा है। इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण होने की निर्धारित अवधि को या तो पार कर चुके हैं या उसके नजदीक ही हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि भारत सरकार से अपर्याप्त धन आवंटन के कारण इन प्रोजेक्टों में देरी हो रही है। इसलिए इन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक धनराशि 1118 करोड़ 64 लाख रूपए प्राथमिकता के साथ आवंटित की जाए।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि काम में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने अनेक सुधारात्मक उपाय करते हुए पीएमजीएसवाई के लिए ही समर्पित पीआईयू (प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट) गठित की हैं जिससे वर्ष 2014-15 में भारत सरकार से वास्तविक आवंटन 313 करोड़ 13 लाख रूपए के सापेक्ष राज्य सरकार 455 करोड़ 85 लाख रूपए व्यय करने में सक्षम रही है। भारत सरकार को जानकारी देकर ही इस प्रत्याशा के साथ अतिरिक्त 142 करोड़ 72 लाख रूपए धनराशि को व्यय किया गया था कि इसकी क्षतिपूर्ति राज्य सरकार को कर दी जाएगी। परंतु कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद भारत सरकार द्वारा इस अतिरिक्त राशि 142 करोड़ 72 लाख रूपए की न तो क्षतिपूर्ति की गई है और न ही 2014-15 की वार्षिक आवंटन की राशि को इसके अनुरूप बढ़ाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा पीएमजीएसवाई में वर्ष 2015-16 के लिए 288 करोड़ रूपए के वार्षिक आवंटन की सूचना दी गई है। परंतु उत्तराखण्ड की खर्च क्षमता व शेष रह गए कार्यों को देखते हुए 550 करोड़ रूपए की आवश्यकता होगी। यदि केंद्र सरकार द्वारा गत वर्ष की अतिरिक्त व्यय की गई राशि 142 करोड़ 72 लाख रूपए की क्षतिपूर्ति नहीं की जाती है तो 288 करोड़ रूपए की धनरशि बहुत ही कम रहेगी। जबकि उत्तराखण्ड सरकार की वर्ष 2015-16 में 550 करोड़ रूपए व्यय की योजना है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने केंद्रीय मंत्री श्री चैधरी को बताया कि अभी भी राज्य में 250 से अधिक जनसंख्या वाली 748 बस्तियां ऐसी हैं जिनके लिए नई सड़क योजनाओं को मंजूरी दी जानी है। केंद्र सरकार को वर्ष 2014-15 में अनेक प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। जबकि वर्तमान वर्ष में भी 809 करोड़ 84 लाख रूपए की 121 डीपीआर भारत सरकार को प्रेषित की गई हैं। केंद्र ने इन डीपीआर को यह कहकर लौटा दिया हैं कि वित्त मंत्रालय द्वारा पीएमजीएसवाई में आवंटन राशि को बढ़ाए जाने पर ही इन पर विचार किया जा सकता है। इस पर गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए कि फरवरी 2014 के बाद से अभी तक एक भी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी गई है जबकि इनके लिए वन स्वीकृति, भूमि हस्तांतरण जैसी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्षतिग्रस्त मार्गों के पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 61 करोड़ 60 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई थी। राज्य सरकार के अनुरोध पर यह सैद्धांतिक सहमति बनी थी कि राज्य सरकार को यह राशि पीएमजीएसवाई के तहत सामान्य आवंटन के अतिरिक्त होगी। केंद्र सरकार जल्द से जल्द इस राशि का आवंटन करे। केंद्रीय मंत्री श्री चैधरी ने मुख्यमंत्री श्री रावत को आवश्यक कार्यवाही किए जाने के प्रति आश्वस्त किया।

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