आम बजट-2018 से मिलेगी जनता को राहत: PM Says budget-2018 for aam janta 

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आम बजट-2018 से मिलेगी जनता को राहत: PM Says budget-2018 for aam janta

 

देश की जनता को आम बजट -2018 का बेसब्री से इंतजार है, यही नहीं लोग सरकार से अपेक्षा भी रखती है कि आगामी बजट उनकी उम्मीदों को नया आयाम देगा. वही पीएम मोदी ने संकेत भी दिए कि आम लोग बजट-2018 से नाउम्मीद नहीं होंगे, लेकिन लोकलुभावन घोषणाओं से जनता को भ्रमित भी नहीं क्या जायेगा. पीएम् ने आगे कहा कि यह मुद्दा वित्त मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है और वह इसमें दखल नहीं देना चाहते हैं. मोदी द्वारा पेश किये जाने इस आम बजट से आम जनता को कितनी राहत मिलेगी इसके भी जवाब मोदी ने दिए.

प्रधानमंत्री ने बजट पूर्व बहस को एक नया मोड़ देते हुए कहा कि यह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है कि आम आदमी सरकार से मुफ्त की चीजों की आस रखता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सुधार के अपने एजेंडे पर लगातार ही चलती रहेगी क्योंकि इसी वजह से भारत दुनिया की ‘पांच सबसे दुर्बल’ अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से बाहर आ सकने में कामयाब हो पाया है. पीएम ने विरोधियो द्वारा दिए जाने वाले पूर्वानुमान पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सरकार हर वह संभव प्रयास कर रही है जिससे देश को उन्नति के चरम पर पहुंचाया जा सकता है और सरकार की यह नीति अग्रसर ही रहेगी.

मोदी ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह बात अलग है कि विपक्षी दल हमेशा ही सरकार पर हमला करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम है, मसलन आर्थिक विकास रोजगार विहीन है, हर वर्ष करोड़ों युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का दावा खोखला साबित हो चुका है. किसान अपनी बेबसी पर रो रहे हैं. खेतों तक पानी की सुविधा नहीं है, खेती की लागत बढ़ गई है. महंगाई की वजह से सभी परेशान हैं. इसी तरह की बातो से आम जनता को गुमराह कर विपक्षी अपनी बात रखते हुए पाए जाते हैं लेकिन ऐसा नजर आता दिख रहा है कि मोदी द्वारा अपने कुछ खास प्लान्स के ज़रिये विपक्षी दलों की इस गुमराह करने वाले दावपेच को निरस्त करने का मन बना लिया है.

पीएम पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार की प्राथमिकता में कृषि विकास और युवाओं को रोजगार पहले से ही है. लेकिन जिस अंदाज में विपक्षी दल जनता को दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, उस भ्रम को तोड़ने की आवश्यकता है. जनता को ये बताने की जरूरत है कि सरकार ने उनके फायदे के लिए क्या क्या किया है. सरकारी योजनाओं और नीतियों को व्यापक तौर आम लोगों तक ले जाने की जरूरत है. पीएम ने इस सिलसिले में कुछ अलग फैसले भी किए हैं. उदाहरण के तौर पर बजट पेश किए जाने के बाद वित्त मंत्री और वित्त विभाग के बड़े अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब देते थे. लेकिन इस दफा नजारा कुछ और रहेगा. बजट पेश होने के बाद आर्थिक सलाहकार परिषद के सभी सदस्य एक साथ दूरदर्शन पर लोगों से मुखातिब होंगे और बजट के हर पहलू को विस्तार से बताएंगे. पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सभी सदस्य पहली बार आम लोगों की बजट की बारिकियों, भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश करेंगे.

नोटबंदी को बहुत बड़ी सफलता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक करेंसी नोट को दूसरे से बदलने का मामला नहीं था, बल्कि इस कदम से दुनियाभर में भारत, उसकी सरकार और रिजर्व बैंक का सम्मान बढ़ा है. वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) पर उन्होंने कहा कि सरकार इस ‘वन नेशन वन टैक्स’ सिस्टम की खामियों को दुरुस्त करने के लिए तैयार है. जीएसटी का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोग संसद का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि 1961 में आयकर कानून आने के बाद से उसमें कितने बदलाव करने पड़े. इसी तरह जीएसटी भी नई प्रणाली है और लोगों को इसका अभ्यस्त होने में अभी कुछ समय लगेगा.

विपक्ष के उन आरोपों को मोदी ने पूरी तरह खारिज कर दिया कि देश में रोजगारविहीन विकास हो रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है. संगठित क्षेत्र में सिर्फ 10 फीसदी रोजगार ही उपलब्ध हैं. शेष 90 फीसदी रोजगार असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं और इस क्षेत्र से जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. पिछले एक साल में 70 लाख नए रिटायरमेंट फंड या ईपीएफ अकाउंट खुले हैं. प्रधानमंत्री ने पूछा, और यह रोजगार सृजन को दर्शाते हैं.

कृषि क्षेत्र में संकट पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आलोचना न्यायसंगत है और सरकार इससे इन्कार नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की समस्याओं की पहचान करें और उनका समाधान करें. सरकार के बाकी बचे डेढ़ साल में किए जाने वाले कार्यो के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि चार करोड़ परिवारों तक बिजली पहुंचाना और आमजन के लिए शुरू की गई योजनाओं के लाभ उन तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के उनके नारे का मतलब मुख्य विपक्षी पार्टी के खात्मे से नहीं था. इसका मतलब देश को कांग्रेसी संस्कृति से मुक्त करने का था. पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य देश को उस ऊंचाई पर ले जाना है जहां भ्रष्टता और भ्रष्टाचार का सम्बन्ध दूर दूर तक मानवता से न हो.

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