प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाउ इन देहरादून संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाउ इन देहरादून संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस
देहरादून उत्तराखंड में चुनावी महासंग्राम के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून के जोलीग्रांट पहुचे जहा से वो सुरक्षा घेरे में देहरादून के आइएमए पहुचे उनके यहाँ आगमन को लेकर पूरी तरह जीरो जोन रहा संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के लिए दूनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया आइएमए में पहली बार होने वाली इस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री करीब छह घंटे रहेगे । बैठक में रक्षा मंत्री, तीनों सेनाप्रमुखों के साथ ही एनएसए सहित देश की सुरक्षा से जुड़े तमाम लोग शिरकत किया ।

सुबह करीब नौ बजे पीएम मोदी जौलीग्रांट से हेलीकाप्टर से सीधे आइएमए पहुचे । वहां से वह सबसे पहले आइएमए स्थित शहीद स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी । इसके बाद वे सड़क पार कर आइएमए के चैटवुड ड्रिल स्क्वायर गए । यहां तीनों सेनाओं के सैनिको ने उन्हें सलामी दी ।

इस दौरान उनके साथ तीनों सेनाओं के चीफ भी मौजूद रहे । युवा जेंटलमैन कैडेट्स भी इस मौके के गवाहबने । बाद में वह आइएमए कमांडेंट ऑफिस से सीधे खेत्रपाल आडिटोरियम पहुचे , जहां वह कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया इससे पहले वे शहीद विक्रम बत्रा मैस में कैडेट्स के परिजनों से मुलाकात करेंगे और कुछ सैनिकों को सम्मानित भी करेंगे। कॉन्फ्रेंस केदौरान वह आइएमए में जेंटलमैन कैडेट्स में जोश भी भर गए ।

भारतीय सैन्य अकादमी में होने वाली सालाना संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में सशस्त्र बलों के लिए एक नया शीर्ष पद सृजित करने पर मुहर लग सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और रक्षा मंत्रलय की ओर से चीफ ऑफ स्टाफ समिति के स्थायी चेयरमैन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह पद सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख के बराबर होगा। इसका खाका शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा
रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो यह कदम देश में उच्च रक्षा प्रबंधन में सुधार की दिशा में अहम कदम साबित होगा। इसके तहत एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को सैनिकों के प्रशिक्षण, हथियार प्रणालियों और संयुक्त अभियान जैसी सेवाओं के मुद्दों से निपटने की संयुक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है।

सूत्रों ने बताया कि नए अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रधानमंत्री द्वारा जारी दिशा निर्देशों पर निर्भर करेगी। यदि यह प्रक्रिया समय पर शुरू कर दी जाती है तो संभवत: लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी इसके प्रबल दावेदार हैं। हाल ही में पूर्वी कमान के सेना प्रमुख ले. जनरल बख्शी की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर जनरल बिपिन रावत को थल सेनाध्यक्ष बनाया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की ही सलाह पर सेना प्रमुखों के वार्षिक सम्मलेन अब दिल्ली से बाहर सैन्य ठिकानों पर आयोजित किए जाने लगे हैं। इससे पहले वर्ष 2015 में सम्मेलन आइएनएस विक्रमादित्य पर आयोजित किया जा चुका है। तीन सेना प्रमुखों का यह पहला संयुक्त कमांडर सम्मेलन होगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने विगत वर्ष 31 मई को पदभार संभाला था, जबकि जनरल बिपिन रावत और एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह ने दिसम्बर में पदभार ग्रहण किया।

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