पर्वतीय क्षेत्र में पर्यावरण संस्थान वनों को आग से बचाने की करेगा पहल

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पर्वतीय क्षेत्र में पर्यावरण संस्थान वनों को आग से बचाने की करेगा पहल

अल्मोड़ा पर्वतीय क्षेत्र में वनों को आग से बचाने के लिए गोविन्द वल्लभ पंत पर्यावरण संस्थान व विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान के विशेष सहयोग से जनपद में एक अनूठी पहल की शुरूआत करने का निर्णय लिया गया है इस बात की जानकारी जिलाधिकारी सविन बंसल ने हिमालयन पर्यावरण संस्थान कटारमल कोसी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दी। उन्होने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमारे जनपद में दोनो प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हैं जो हमें अपनी सेवाएं देने के लिए स्वंय आगे आने की पहल कर रहें हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पिरूल का सही उपयोग न होने के कारण प्रत्येक वर्ष करोड़ों की वनसम्पदा का नुकसान होता है साथ ही वनों में उगने वाली घास एवं अन्य जड़ीबूटी भी आग के कारण नष्ट हो जाती है। इससे निजात पाने के लिए हिमालयन पर्यावरण संस्थान द्वारा जनपद मुख्यालय के समीप विकास खण्ड हवालबाग के 8 गांवों दाड़िमखोला, तिलौरा, सकनियाकोट, ग्वालाकोट, पितराड़, सकार, ज्यूला, भलीगाड़ को पिरूल के द्वारा कोयला बनाने के लिए पायलट प्रोजक्ट के रूप में गोद लिया गया है। इन ग्रामों में सफलता के बाद जनपद के अन्य ग्रामांे सहित प्रदेश में सभी ग्रामों में इसके लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा। और अगर इसमें सफलता मिलती है तो प्रदेश मंे जनपद अल्मोड़ा इसके लिए उदाहरण बन जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वैच्छिक संगठनों व स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय लोगो को इसका प्रशिक्षण पं0 गोविन्द बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान व विवेकानन्द कृृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा दिया जायेगा। उन्होंने इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी सहित परियोजना निदेशक, जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी, महाप्रबन्धक उद्योग केन्द्र और पर्यावरण संस्थान के डा0 सुन्दरियाल और डा0 डी0एस0 रावत की कमेटी बनाकर ऐसे स्वैच्छिक कारीगरों का डाटबेस तैयार कर उन्हें प्रशिक्षण दिलायगें। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में कम से कम 20 ऐसे स्वैच्छिक कारीगरों को प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जाय जो कि आने वाले समय में अन्य लोगो को भी प्रशिक्षण दे सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि पिरूल से कोयला बन जाने के बाद विकास भवन व जिला कार्यालय में सबसे पहले इसे क्रय कर किया जायेगा सफलता मिलने के बाद अन्य सरकारी कार्यालयों में इसे उपयोग किया जायेगा। पं0 गोविन्द बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान के निदेशक डा0 पी0पी0 ध्यानी ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा की जा रही इस पहल को वे पूर्ण सहयोग देंगे और अपने वैज्ञानिकों को भेजकर अन्य ग्रामों में भी इसकी सम्भावनायें तलाशगें उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा नौलो के संरक्षण हेतु जो कार्य किया जा रहा है उसमें पर्यावरण संस्थान अपना पूर्ण सहयोग देगा। निदेशक विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान डा0 ए0के0 पटनायक ने कहा कि उनके द्वारा पिरूल के द्वारा बनाये गये कोयले को जलाने हेतु एक अंगेठी नमूने के रूप में लायी गयी है जिसका उन्होंने प्रदर्शन भी बैठक में किया और कहा कि स्थानीय कारीगरों द्वारा इसे तैयार कर ग्रामीणों को रियायती दरों पर बेचा जायेगा ताकि साधन विहीन लोगो के लिए यह सुविधा उपलब्ध हो सके। इस महत्वपूर्ण बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जोशी ने सुझाव रखा कि ग्रामीण क्षेत्र से जो कोयला एकत्र होगा उसके लिए दर निर्धारित कर दी जाय ताकि ग्रामीण इससे आजिविका उपार्जन कर सके। इस पर डा0 डी0एस0 रावत ने बताया कि जला हुआ पिरूल का तारकोल 05 रू0 किलो एवं 800 ग्राम कोयला टिक्की 10 रू0 मंे क्रय किया जायेगा। डा0 रावत ने विस्तृत रूप से एक सी0डी0 के माध्यम से पिरूल का कोयला बनाने की विधि के बारे में बताया गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने नौलो के संरक्षण के बारे में की जा रही तैयारियों की जानकारी ली और अधीक्षण अभियन्ता जल संस्थान डी0के0 मिश्रा ने विस्तृत रूप से बताया और यह निर्णय लिया गया कि तुरन्त जिला योजना से धनराशि अवमुक्त कराकर कार्य प्रारम्भ कर दिया जाय। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जे0एस0 नगन्याल, अधीशासी अभियन्ता जल संस्थान नन्द किशोर, आपदा प्रबन्धन अधिकारी राकेश जोशी, महाप्रबन्धक उद्योग केन्द्र कविता भगत, वैज्ञानिक आर0एस0 रावल सहित पं0 गोविन्द बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान के अनेक वैज्ञानिक व कर्मचारी उपस्थित थे। अल्मोड़ा 08 नवम्बर, 2016(सू0वि0) प्रखर वक्ता व वरिष्ठ पत्रकार पी0सी0 जोशी के निधन से प्रदेश को अपूर्णनीय क्षति हुई है यह विचार प्रदेश के मा0 विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने आज उनके निवास स्थान पर जाकर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जगत सहित समाज सेवा के लिए समर्पित यह हमेशा प्ररेणास्रोत रहे है। इन्होंने उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में सर्वदलीय सर्घष समिति के अध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका निभाई। नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जोशी ने कहा कि स्वतन्त्रता आन्दोलन से लेकर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन तक इन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से अनेक समस्यायें रखी जिसको राज्य सरकारों ने एक नजीर के रूप में मानकर उसपर कार्यवाही की। इनका निधन 89 वर्ष की आयु में लम्बी बीमारी के बाद उनके निवास सैलाखोला में हो गया। स्व0 विष्णु दत्त जोशी के घर में जोशी का जन्म 07061927 को हुआ। इनके तीन भाई व तीन बहनें थी जोशी को मिलाकर चार भाई थे, चारो भाई अविवाहित थे। इनकी तीन बहने थी जिनमें से दो विवाहित एक अविवाहित थी। अविवाहित बहन शोमा जोशी के नाम से एक ट्रस्ट की स्थापना कर इन्होंने गरीब बच्चों को काफी लम्बे समय से धनराशि देने का काम किया इसके साथ ही ताकुला डोटियालगाॅव में श्रीराम मन्दिर विद्यालय की स्थापना हेतु 16 नाली भूमि दान में देकर शिक्षा की अलख को जगाने में अहम योगदान दिया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने गत रात्रि उनके निवास पर जाकर शोक संवेदना व्यक्त की और कहा कि स्व0 जोशी की मृत्यु जनपद के लिए एक अर्पूणीय क्षति है। उन्होंने कहाकि उनके विचारों का सम्मान करते हुए हम हमेशा उनके बताये मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे। वरिष्ठ पत्रकार जोशी प्रेस क्लब अल्मोड़ा, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, जन सघर्ष स्वास्थ्य मोर्चा के अध्यक्ष रहे साथ ही उप उपभोक्ता जागृति नागरिक कल्याण समिति के संरक्षक रहे इसके साथ ही अल्मोड़ा इण्टर कालेज व आर्य कन्या इण्टर कालेज के प्रबन्धके पद पर भी इन्होंने कार्य किया। वर्ष 1971 में नगरपालिका में ये सभासद भी रहे। स्व0 जोशी के निधन से पूरे नगरवासियों ने शोक संवेदना व्यक्त की है। विश्वनाथ घाट में जाकर विधानसभा अध्यक्ष, नगरपलिका अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य लोगो ने उन्हें अन्तिम विदाई दी। प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री हरीश रावत, लोक सभा सांसद अजय टम्टा, राज्य सभा सांसद महेन्द्र मेहरा, प्रदीप टम्टा, बारामण्डल क्षेत्र के विधायक मनोज तिवारी, अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष राजेन्द्र बाराकोटी, पर्यावरण मित्र आयोग के उपाध्यक्ष ए0के0 सिकन्दर पवाॅर ने भी शोक संवेदना व्यक्त की और उनकी मृत्यु को एक अर्पूणीय क्षति बताया है।

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