उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में लाया जायेगा प्रभावी बदलाव: डा. तेज प्रताप

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देहरादून/पंतनगर: पंतनगर विश्वविद्यालय में आज नव-नियुक्त कुलपति, डा. तेज प्रताप, ने उत्तराखण्ड की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति पंतनगर विष्वविद्यालय, श्रीमती बेबी रानी मौर्य, के 11 अक्टूबर, 2018 के आदेष के अनुपालन में कल सायं काल में तराई भवन में विष्वविद्यालय के कुलपति के पद का कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार सम्भालने के बाद आज प्रषासनिक भवन में अपने कार्यालय में कुलपति ने अपनी कार्यशैली को जाहिर कर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र उनके लिए नये नहीं है तथा वे पहले भी यहां आकर लोगों की समस्याओं से रूबरू हो चुके हैं। डा. तेज प्रताप ने बताया कि विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिति के अध्ययन एवं उनमें सुधारात्मक बदलाव पर नीति एवं रणनीति तैयार करने का उनका 30-35 साल का अनुभव है तथा विष्व का शायद ही कोई ऐसा पर्वतीय क्षेत्र होगा जिसका उन्होंने भ्रमण न किया हो। नव-नियुक्त कुलपति ने बताया कि पूर्व में उनके द्वारा हिमाचल प्रदेष के पालमपुर कृषि विष्वविद्यालय तथा जम्मू एवं कष्मीर विष्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वहां के पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की स्थिति में लाभप्रद बदलाव लाने में सफलता प्राप्त की है। संभवतः यही कारण है कि अब उन्हें पंतनगर विष्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है, ताकि इस विष्वविद्यालय का मुख्य पहाड़ की ओर मोड़कर यहां के पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। डा. तेज प्रताप का कुलपति के रूप में यह पांचवा कार्यकाल है। कुलपति ने यह भी कहा कि अभी तक उन्होंने जिन विष्वविद्यालयों को सषक्त किया वे पहले कमजोर थे, लेकिन यह विष्वविद्यालय पहले से ही सषक्त है, केवल इसे उचित नेतृत्व दिये जाने की आवष्यकता है, जिससे इसकी कार्यकरने की दिषा में बदलाव लाकर यहां की तकनीकों को बेहतर तरीके से उपयोगी बनाया जा सके। पंतनगर विष्वविद्यालय की रैंकिंग भारत के कृषि विष्वविद्यालयों में प्रथम पांच में बनाने को उन्होंने अपना एक उद्देष्य बताया तथा विष्व स्तर पर भी इसकी रैंकिंग लगातार सुधारने का उन्होंने संकल्प जताया।

इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन के संबंध में सोच बदलने के साथ-साथ दृष्टिकोण में बदलाव की भी आवष्यकता है। डा. तेज प्रताप ने कहा कि पलायन की मुख्य समस्या बचे हुए किसानों को उनके घरों में रोकने की है। साथ ही वहां ऐसी स्थितियां विकसित करने की आवष्यकता है, ताकि पलायन करने वाले लोग भी वापस आ जाएं। कुलपति ने कहा कि नकारात्मकता को दूर कर ऐतिहासिक परिपेक्ष्य को ध्यान में रखकर इस सामाजिक मुद्दे को समझने की आवष्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलाव के समय पुरानी चीजों को छोड़ना पड़ता है तथा उत्तराखण्ड में भी हम मंडुआ या बारहानाजा को पकड़कर नहीं रख सकते, हमें किसान की आय को पांच गुना बढ़ाने के उद्देष्य को ध्यान में रखकर बदलाव करना होगा। डा. तेज प्रताप के अनुसार पर्वतीय क्षेत्र के किसानों की आय यहां पांच गुना बढ़ाकर कम से कम 75 हजार से 1 लाख रूपये तक होनी आवष्यक है, तभी पलायन रूक पाएगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेष का उदाहरण देते हुए किसानों के आर्थिक विकास हेतु जरूरी विपणन, परिवहन जैसी सुविधाओं के विकास को आवष्यक बताया। विष्वविद्यालय की पर्वतीय कृषि के विकास में तकनीकी हस्तांतरण तक सीमित भूमिका को इंगित करने के साथ ही उन्होंने सरकार, विभिन्न संस्थाओं एवं विष्वविद्यालय के सामूहिक प्रयास की आवष्यकता बतायी। डा. तेज प्रताप ने कहा कि पहले एक से डेढ़ माह में वे विष्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड की स्थितियों का गहन अध्ययन करने के बाद अपनी कार्यनीति व रणनीति बनाकर सरकार व अन्य सभी के साथ अगले तीन साल में किये जाने वाले कार्यों की रूप-रेखा तैयार करेंगें, तत्पष्चात सभी के साथ मिलकर पंतनगर विष्वविद्यालय को उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रसिद्धि दिलायेंगे। उन्होंने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों से लोगों की सोच में बदलाव लाने में उनका सहयोग किये जाने की अपेक्षा की। नव-नियुक्त कुलपति ने आज पूर्वाह्न में विष्वविद्यालय के अधिष्ठाता व निदेषकों के साथ बैठक भी की।

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