पाकिस्तान को करारा झटका, NSG से रहेगा बाहर; भारत को मिलेगी एंट्री

0
661

पाकिस्तान को करारा झटका, NSG से रहेगा बाहर; भारत को मिलेगी एंट्री

नई दिल्ली परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में नए सदस्यों को शामिल करने संबंधी नए प्रस्ताव से भारत का इस ग्रुप में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होगा, लेकिन पाकिस्तान की हसरत पूरी नहीं हो पाएगी। अमेरिका स्थित आ‌र्म्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (शस्त्र नियंत्रण संगठन) एसीए के कार्यकारी निदेशक डी किमबाल ने यह दावा किया। साथ ही चेताया कि सदस्यता के नियमों में छूट देना परमाणु अप्रसार की अवधारणा को कमजोर करेगा। बीते सप्ताह अमेरिकी मीडिया में खबरें आईं थीं कि एनएसजी के पूर्व चेयरमैन राफेल मरिआनो ग्रोसी ने दो पेज का एक दस्तावेज तैयार किया है। इसमें भारत और पाकिस्तान जैसे गैर एनपीटी (अप्रसार संधि) देश कैसे समूह में शामिल हो सकते हैं, इसके बारे में बताया गया है। डॉन अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि राफेल मौजूदा चेयरमैन दक्षिण कोरिया के सांग यंग-वान की तरफ से काम कर रहे थे।उनके दस्तावेज को अर्धसरकारी दर्जा प्राप्त है। इसमें परमाणु अप्रसार संधि से भारत को बाहर रखने और पाकिस्तान को शामिल करने की बात है। राफेल के मसौदे में यह प्रस्ताव भी है कि एक गैर एनपीटी सदस्य देश के एनएसजी में प्रवेश को इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि दूसरे गैर एनपीटी सदस्य देश को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक परमाणु करार, NSG पर मिला समर्थन

पाकिस्तान की विदेश मामलों की अतिरिक्त सचिव तसनीम असलम ने आरोप लगाया कि भारत परमाणु पनडुब्बी का निर्माण कर रहा है। परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने में भारत की कोशिश लगातार जारी है।उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत जिस तरह के माहौल का निर्माण कर रहा है, उन हालातों में पाकिस्तान के सामने अपनी सुरक्षा प्रणाली को पुख्ता करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है।
भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक परमाणु करार और एनएसजी पर मिले अतिरिक्त समर्थन पर तसनीम असलम ने कहा कि इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को खतरा उत्पन्न होगा। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि पाकिस्तान को भारत हमेशा घेरने की कोशिश करता है। लेकिन सच ये है कि पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों में भारत खुद संलिप्त है।
एनएसजी में भारत को सदस्यता मिलने पर चीन की तरफ से लगातार अड़चने पैदा की जाती रही है। सियोल में एनएसजी के पूर्णकालिक सदस्यों की बैठक में तकनीकी आधार पर चीन ने वीटो लगा दिया था। वीटो के इस्तेमाल पर चीन ने कहा था कि वो तो सिर्फ नियमों का हवाला दे रहा है। चीन ने सियोल मीटिंग और उसके बाद भी ये कहता है कि उसे भारत की दावेदारी पर ऐतराज नहीं है।लेकिन एनएसजी में शामिल होने के लिए अनिवार्य शर्त एनपीटी पर भारत को कम से कम हस्ताक्षर होना ही चाहिए।

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments