पद्मावती का जौहर खिलजी की हार : Padmvati jauhar makes Khilji failed

0
221

पद्मावती का जौहर खिलजी की हार : Padmvati jauhar makes Khilji failed

 

पद्मावती : ये एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई ही जानता है. यह संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” से अधिक प्रचलति हुआ. आइये बताते हैं आपको कि क्या है “पद्मावती” फिल्म का सच और फिल्म को लेकर हुए विरोध का सच ;

फिल्म में पद्मावती चरित्र एक ऐसी स्त्री का दिखाया गया है जो अपार सुंदरता की सीमा की सोच से भी कही अधिक सुन्दर है, और उसकी सुंदरता को देखने की लालसा ही अलाउद्दीन खिलजी के जीवन का लक्ष्य बन जाता है. अपितु अल्लाउद्दीन खिलजी ने पद्मावती को कभी देखा नहीं लेकिन उसकी खूबसूरती और गुणों की चर्चा से प्रभावित होकर ही वह उसे पाने की लालसा रखता है. सात समुन्दर पार अलाउद्दीन को पद्मावती के बारे में बताने वाला शख्स चित्तौड़ का ही राजगुरु दिखाया गया है, वह ऐसा इसलिए करता है क्योकि उसे रानी पद्मावती द्वारा देशनिकाला दिया जाता है और इसी अपमान के बदले कि आग में राजगुरु अलाउद्दीन से जा मिलता है. वही रानी पद्मावती के पति और चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह इस बात से अनभिज्ञ रहते हैं, जब अल्लाउद्दीन पद्मावती को देखने कि लालसा से रावल रतन सिंह को परिवार सहित न्योता भेजता है तो रतन सिंह मना कर देते है, और इस बात से बेखबर हैं कि खिलजी रानी पद्मावती को पाना चाहता है. वही खिलजी न्योता न मानने से भड़क उठता है और चित्तौड़ पर आक्रमण करने हेतु अपनी सेना को लेकर चित्तौड़ पहुंच जाता है.

चित्तौड़ पहुंचकर अल्लाउद्दीन की ख्वाहिश और अधिक बुलंद होने लगी, वह 6 महीनो तक चित्तौड़ के किले से दूर अपना डेरा डाले हुए बैठा रहा. वही प्रजा के खान पान व् अन्न के सामान को लेकर राजा रतन सिंह की परेशानिया भी बढ़ने लगती है लेकिन वो युद्ध के लिए कोई भी कदम नहीं उठाते. इसके बाद धीरे धीरे राजा रतन सिंह को अल्लाउदीन के शातिर दिमाग के सच का पता चलता है लेकिन खिलजी एक ऐसा इंसान था जो एक बार कुछ ठान ले तो फिर पीछे नहीं हटता था अपनी इसी आदत के चलते उसने धोखे से राजा को बंदी बना लिया और चित्तौड़ के सामने शर्त रखी की पद्मावती आकर अपने पति को छुड़वा ले जाए. राजपूती शान के खिलाफ जाकर पद्मावती दिल्ली जाती हैं और अपने पति को वापस चित्तौड़ ले आती हैं. चारो तरफ पद्मावती और राजा रतन सिंह की जय जयकार की गूँज के साथ उन शूरवीर बलिदानियों का नाम भी आसमान पर गूँज उठता है.

इस हार से बौखलाया खिलजी तुरंत चित्तौड़ पर आक्रमण कर देता है और राजा रतन सिंह को धोखे से मारकर चित्तौड़ के किले में आ जाता है. वही दोनों रानियों सहित सभी दासियाँ जौहर करने को तैयार बैठी हैं जैसे ही उन्हें पता चलता है कि राजा वीरगति को प्राप्त हो गए हैं पद्मावती समते सब अग्निकुंड में जाकर जौहर कर लेती हैं. और फिल्म में यही अलाउद्दीन खिलजी की सबसे बड़ी हार दिखाई गयी है. अंत तक रानी पद्मावती को न देख पाने की उसकी लालसा पूरी नहीं होती है.

फिल्म का चित्रण शानदार अवश्य है लेकिन कही कही ऐसा भी लगता है कि करणी सेना का विरोध जायज था. सबकी अपनी अपनी संवेदनाएं है जिन्हे कोई आहत होते हुए देख नहीं सकता चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित हो. फिल्म में जो भी दर्शाया गया है वह बहुत सटीक है लेकिन अगर विश्लेषण किया भी जाए तो समझ नहीं आता की फिल्मकारों को ऐसे विषय पर फिल्म बनानी क्यों पढ़ती है जिसमे विवाद की समभावनाएँ अधिक हो. हालांकि पूरी फिल्म देखकर अगर सकारत्मक सोचा जाए तो यही समझ आएगा कि उस वक़्त में स्त्री अपने मान-सम्मान के लिए जलती अग्नि में कूद सकने की ताकत रखती थी और यही दर्शाया भी गया है. हालांकि इस इस पूरे विषय पर इतिहास क्या कहता है यह एक अलग विषय बन जाता है.
फिल्म का सारांश तो यही कहता है कि खिलजी चाहे कितना भी ताकतवर रहा लेकिन रानी पद्मावती ने उसे जीवन की सबसे बड़ी हार दी और अपने सतीत्व की रक्षा जौहर करके की.

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments