अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की एकमुश्त केंद्रीय सहायता दे मोदी सरकार

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अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की एकमुश्त केंद्रीय सहायता दे मोदी सरकार
हरिद्वार में जनवरी से अप्रैल 2016 तक होने जा रहे अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की एकमुश्त केंद्रीय सहायता दी जाए। राज्य स्तर से 5 हेक्टेयर तक के वन भूमि हस्तांतरण अधिकार की बढ़ाई गई अवधि को एक वर्ष की बजाय दो वर्ष किया जाए। चैदहवें वित आयोग की सिफारिशों से पूर्व उत्तराखण्ड को केंद्र से मिल रही सहायता को यथावत बरकरार रखा जाए। बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य से संबंधित विभिन्न मामलों पर सहयोग व सहायता का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2016 में जनवरी से अपे्रल तक हरिद्वार में अर्धकुम्भ का आयोजन किया जाना है जिसमें 7 से 8 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। राज्य सरकार सुरक्षित व सफल अर्धकुम्भ के आयोजन के लिए तत्पर है। अर्धकुम्भ के तहत इस बार स्थाई प्रकृति का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। अर्धकुम्भ की 500 करोड़ की योजना में से 325 करोड़ का कार्य स्थाई प्रकृति का है। राज्य सरकार ने अपने संसाधनांे से 321 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति दी है। इनमें से अनेक कार्य पूर्ण होने वाले हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री व नीति आयोग से अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की सहायता दिए जाने का पूर्व में अनुरोध किया गया है। नीति आयोग द्वारा मार्च 2015 में उत्तराखण्ड को अर्धकुम्भ के लिए 166 करोड़ 67 लाख रूपए की सहायता दिए जाने की अनुशंसा भी की है। परंतु अभी तक यह राशि भी राज्य को नहीं मिली है। विषय की महत्ता व राज्य के सीमित संसाधनो को देखते हुए अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की सहायता राज्य को यथाशीघ्र दी जाए।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि उत्तराखण्ड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत इंफा्रस्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 5 हेक्टेयर तक की वन भूमि हस्तांरण को राज्य स्तर पर किए जाने के लिए 7 नवम्बर 2015 तक के लिए मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया कि उनके अनुरोध पर इस अवधि को बढ़ाया गया है। परंतु वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा केवल 1 वर्ष के लिए इस अवधि को विस्तारित किया गया है जबकि कार्यों की प्रकृति को देखते हुए इसे 2 वर्ष के लिए बढ़ाया जाना था। साथ ही आवश्यक शिथिलता देते हुए काटे जाने वाले वृक्षों की अधिकतम संख्या को 50 से बढ़ाकर 75 किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने अपने पत्र में चैदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों से उत्तराखण्ड को हुए नुकसान की जानकारी देते हुए कहा है कि एनसीए में 1530 करोड़ रूपए, एससीए में 700 करोड़ रूपए व एसपीए में 350 करोड़ रूपए का नुकसान हो रहा है। केंद्रीय करोें में आंशिक बढ़ोतरी के बावजूद अक्टूबर 2015 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में विशुद्ध रूप से 1007 करोड़ रूपए से अधिक की राज्य को हानि हुई है। भारत सरकार के आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट में भी यह स्वीकार किया गया है कि उत्तराखण्ड एकमात्र राज्य है जिसे केंद्रीय सहायता में नुकसान हुआ है। परंतु ऐसा कोई मेकेनिज्म नहीं बनाया गया है जिससे उत्तराखण्ड को क्षतिपूर्ति हो सके। उत्तराखण्ड की इंफा्रस्ट्रक्चर आवश्यकताओं, सीमित संसाधनों व राजकोषीय निरंतरता को देखते हुए पूर्व में मिल रही सहायता को जारी रखा जाए।

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