नेपाल से लड़कियो की तस्करी का सॉफ्ट कॉरिडोर बना उत्तराखंड

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पिछले कुछ दिनों की शांति के बाद नेपाल से उत्तराखंड के रास्ते मानव-तस्करी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों ने अपनी गतिविधियाँ एकाएकतेज कर दी हैं नेपाल से बड़े पैमाने पर नोकरी दिलाये जाने के नाम पर लड़कियो को लेकर जाया जाता है और उस के बाद उन को अरब देशो में बेच दिया जाता है उत्तराखंड में काफी समय से लड़कियो की खरीद फरोक्त का कारोबार अंजाम दिया जा रहा है यही नहीं कई माह पूर्व उत्तराखण्ड के साल्ट विधानसभा से भी कई लड़कियो की गायब होनी कीखबर सामने आई थी । बीते एक माह में नेपाल और भारत के अकेले बनबसाबॉर्डर पर ही 20 से अधिक ऐसी लड़कियों को रोका गया है जिनकोरोजगार के नाम पर खाड़ी देशों में ले जाया जा रहा था। यह जानकारीदेते हुये इम्पॉवेरिंग पीपुल सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी और मानवतस्करी के विरुद्ध कार्य करने वाले प्रदेश के एकमात्र समाजिककार्यकर्ता  ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि कल शुक्रवार को भी भारतीयसीमा में 6 ऐसी नेपाली लड़कियों को रोका गया, जिनको एक महिला मानव-तस्कर नौकरी के नाम पर बनबसा के रास्ते देहली और फिर दुबई ले जा रही थी। अभी मात्र 4 दिन पहले नेपाली सीमा में 3 लड़कियों को रोका गया जिन्हे नौकरी के नाम पर इराक ले जाया जा रहा था। इसी तरह नेपाल क्षेत्र में भी वहां के गैरसरकारी संगठनों और सुरक्षा बलों ने एक माह में कई लड़कियों को रोक है जिन्हे मानव-तस्करी का शिकार बनाया जा रहा था।

 

ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों में रोकी गईं इन लड़कियों ने पूछताछ में बताया कि मानव-तस्कर उनको उत्तराखंड क्षेत्र में मिलने वाले थे , जहाँ से उनको देहली फिर खाड़ी देशों में ले जाया जाना था। श्री कुमार ने कहा कि उनकी संस्था कई बार सरकार और प्रशासन को अवगत करा चुकी है कि अंतर्राष्ट्रीय मानव-तस्करों ने उत्तराखंड को अपना “सेफ कॉरिडोर” बना लिया है। यहाँ के अप्रक्षिक्षित अथवा अल्पप्रशिक्षित सुरक्षा बल मानव-तस्करों की आधुनिक और संगठित कार्यप्रणाली के आगे बौने साबित हो रहे हैं।

 

ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि उत्तराखंड का रास्ता मानव-तस्करों को इतना सुरक्षित लगता है कि जब भारी चौकसी वाले बनबसा बॉर्डर जहाँ नेपाल क्षेत्र में कई गैर सरकारी संगठन , सीमा प्रहरी दल, आदि और भारत क्षेत्र में जहाँ एसएसबी , मानव-तस्करी निरोधक इकाई , तैनात हैं वहां के रास्ते वो मानव-तस्करी कर रहे हैं।  उस हालत में ब्र्ह्मदेव मंडी , जौलजीवी , झूलाघाट , बूम , पंचेश्वर, मेलाघाट, धारचूला जैसे कम निगरानी वाले रास्तों से हो रही मानव-तस्करी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

 

श्री कुमार ने कहा कि सरकार को कई बार अवगत कराया जा चुका है कि अगर नेपाल से उत्तराखंड के रास्ते  होने वाली अंतर्राष्ट्रीय मानव-तस्करी पर लगाम नहीं लगाई  तो उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय अपराधियों का स्वर्ग बन जायेगा।  क्योकि मानव-तस्करी ( मानव-तस्करों ) के लिहाज़ से  “ट्रांजिट सेंटर” , “सोर्स ” के जितना नज़दीक होगा उतना ही बेहतर होता है , क्योकिं अधिकांश मामलों में  खरीद – फरोख्त , शिकार को तैयार करना , कैरियर का भुगतान जैसे काम “ट्रांजिट सेंटर ” पर ही सम्पादित होते हैं। और उत्तराखंड शासन-प्रशासन की मानव-तस्करी जैसे संगठित अपराध के प्रति उदासीनता भविष्य में गम्भीर परिणाम देगी।

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