मीडिया समाज का कल्याण या फिर मीडिया को गाली

0
456

मीडिया समाज का कल्याण या फिर मीडिया को गाली

देहरादून। समाज कल्याण योजनाओं के नाम पर सालों से इस राज्य में भारी गोलमाल हो रहा है, शायद ही इसमें किसी को संदेह हो। अधिवक्ता चन्द्र शेखर करगेती पिछले कई सालों से समाज कल्याण में हो रही इस लूट-खसोट का पर्दाफाश करते रहे हैं। करगेती इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत तक में लड़ाई लड़ रहे हैं। इधर, देहरादून में पत्रकारिता के नाम पर दुकानदारी करने वालों ने शायद ही समाज कल्याण में होने वाले भ्रष्टाचार पर कभी कोई कलम चलाई हो, यह सब जानते हुए भी कि छात्रवृत्तियों से लेकर पेंशन तक में क्या कुछ इस विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारी अब तक करते आ रहे हैं। जो अमर उजाला आज अपनी रिपोर्टिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ रहा है, उसी के पत्रकार रजा शास्त्री ने जरूर समाज कल्याण पर सवाल उठाते हुए कुछ खबरें लिखी थी। इसी समाज कल्याण में काम करने वाले एक अधिकारी हैं नंद किशोर शर्मा। शर्मा की पहचान एक ईमानदार अधिकारी की रही है और शायद यही वजह है कि वे शासन के ही खिलाफ खड़ा होने की भी हिम्मत रखते हैं। शर्मा कुछ साल पहले तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सिर मुंडवा कर अपने ही विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अब भला हो अमर उजाला का कि उसने बताया कि हम जैसे लोग जिन एनके शर्मा को आज तक ईमानदार समझ बैठे थे वे भी कम खिलाड़ी नहीं हैं। अमर उजाला की पत्रकार नलिनी की रिपोर्ट बताती है कि शर्मा ने न केवल आठ साल पहले देहरादून में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए नारी निकेतन के नाम पर करीब चार लाख रूपये का गबन किया बल्कि मनमाने तरीके से गैर सरकारी संस्थाओं को लाखों रूपये बांट दिए। डंके की चोट पर शर्मा की पोल खोलने वाली अमर उजाला की इन खबरों को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सवाल अमर उजाला के संपादक हरीशचन्द्र की समझदारी पर भी उठ रहे हैं। खुद करगेती कहते हैं जिस संपादक को विभागीय प्रक्रियाओं की ही कोई जानकारी न हो, उससे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह खबर छापने से पहले तथ्यों की सही पड़ताल करे। अमर उजाला जिस तरह समाज कल्याण में भ्रष्टाचार के सवाल को रिर्पोट कर रहा है उससे उसकी नियत सवाल उठना लाजिमी है। अमर उजाला अपनी एक खबर में बताता है कि समाज कल्याण में सौ करोड़ के घोटालों की शिकायत झूठी साबित हुई है। समाज कल्याण विभाग ने जिन अधिकारियों को इस मामले की जांच सौंपी थी, वे खुद घोटालों के आरोपों में घिरे हैं, या फिर उनका अतीत सवालों के घेरे में रहा है। सवाल यह है कि जो खुद आरोपों के घेरे में हैं वे खुद इस मामले की जांच कैसे कर सकते हैं? अमर उजाला इस पर कोई सवाल नहीं उठाता। ऐसे में क्या अमर उजाला इस मामले में कोई खेल खेल रहा है? एनके शर्मा की घेराबंदी और घोटाले की शिकायत की चार दिन की जांच में बेबुनियाद निकलना क्या इस ओर इशारा नहीं करता? अमर उजाला जिस तरह बड़े मगरमच्छों की पोल खोलने के बजाय एनके शर्मा जैसे छोटे मगरमच्छों को ही टारगेट कर रहा है उससे इस पूरे खेल में खुदको ही संदिग्ध बनाने जैसा है।
वही इस मामले को लेकर सोशल मीडिया में लगातार पत्रकारों को भी खुली गाली तक कही जा रही है और उस बात का समर्थन वही पत्रकार कर रहे है जो इस न्यूज़ को लिख रहे है भड़ास फॉर इंडिया इस न्यूज़ को जनहित में जनता के सामने रख रहा है की क्या समाज में कलम लिख रहे सभी पत्रकारों को गाली लिखी जानी जरुरी है नीचे सोशल मीडिया पर आये कुछ कमेंट भी प्रकशित किये जा रहे है इस न्यूज़ को वाच डॉग से साभार लिया गया है जिस में कोई परिवर्तन नहीं किया गया इसलिए न्यूज़ में लिखे हर पहलू के लिए भड़ास फॉर इंडिया कोई जिम्मेदारी नहीं लेता

Jitendra Joshi आजाद साहब अनुमानित 2500 सत्ता के मान्यताप्राप्त व पंजीकृत चारण भाट देहरादून में खूंटा गाढ़ कर सातशाहो की सेवा में 24×7 तत्पर हैं l आलिशान बंगलो और लक्जरी गाड़ी , महंगी शराब के साथ साथ ये हरामखोर मीडिया मैनेजमेंट के लिये लिये दोयम दर्जे के नेताओ से लाखो बटोर रहे हैं l लालायी समाचार पत्रों ने एक ऐसा बुलटप्रूफ चैंबर बनाया है जिसमे स्वयं उनके सवांदाताओ का दम घुट रहा है l
Like · Reply · 3 hrs · Edited
Deepak Azad
Deepak Azad जोशी जी आप सही कह रहे है

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments