मन की बात’ उनकी नहीं, जनता की आवाज प्रधानमंत्री मोदी क्यों बोले

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मन की बात’ उनकी नहीं,जनता की आवाज: MAN KI BAAT PM NARENDRA MODI

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने मन की बात को लेकर जहा जनता के बीच जा रहे है वही उनके आलोचक उनकी बात को उनके मन की बात नहीं बता रहे है ऐसे समय में मोदी ने उनको जवाब देते हुए कहा है की ये उनकी आवाज़ नहीं जनता के आवाज़ है जिसको हर व्यक्ति तक जाने का हक़ है प्रधानमंत्री मोदी क्यों बोले मन की बात’ उनकी नहीं, जनता की आवाज दिल्ली ‘मन की बात’ कार्यक्रम की शुरुआत 2 अक्टूबर, 2014 को हुई थी। रविवार को इसके 36वें प्रसारण में मोदी ने उम्मीद जताई कि समाज विज्ञानी, विश्वविद्यालय, शोधार्थी और मीडिया विशेषज्ञ इसका विश्लेषण करेंगे और इसके नकारात्मक व सकारात्मक पहलू बताएंगे, जो इसके लिए फायदेमंद होंगे। मोदी ने उन मुद्दों का भी जिक्र किया जो तीन साल में मुख्य रूप से उठाए गए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान वह आचार्य विनोबा भावे की शिक्षाओं को याद रखते हैं। वह हमेशा कहते थे कि अराजनीतिक ज्यादा असरकारी होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में फीफा फुटबाल अंडर-17 वल्र्डकप का आयोजन होने वाला है। आइये हम भी इससे जुड़ें। देश का कोई स्कूल मैदान ऐसा न रहे जहां फुटबॉल न खेला जा रहा हो। स्वच्छता पर जोर : पीएम ने पिछले प्रसारण को याद किया जिसमें महात्मा गांधी के जन्मदिवस से 15 दिन पूर्व स्वच्छता अभियान चलाने की शपथ ली गई थी। बताया कि इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की है और समाज का हर वर्ग इससे जुड़ा है।

विभूतियों को समर्पित हो अक्टूबर : मोदी ने कहा कि आगामी माह अक्टूबर महात्मा गांधी, सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख जैसी विभूतियों को समर्पित होना चाहिए। सभी का जन्म इसी महीने में हुआ है। हालांकि इससे पहले 25 सितंबर को दीनदयाल उपाध्याय का भी जन्मदिवस होगा। सरदार पटेल के जन्मदिवस 31 अक्टूबर को ‘रन फॉर यूनिटी-एक भारत, श्रेष्ठ भारत का आयोजन किया जाएगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आलोचकों को जवाब देते हुए रविवार को कहा कि हर माह प्रसारित होने वाला रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ उनकी नहीं, जनता की आवाज है। पिछले तीन वर्षो में उन्होंने इस कार्यक्रम का इस्तेमाल अपने विचार रखने के बजाय लोगों की इच्छाओं और उम्मीदों को व्यक्त करने के लिए किया है। इस कार्यक्रम को राजनीति से दूर रखा और किसी खास वक्त में पनपी (राजनीतिक) ‘गरमी’ और ‘आक्रोश’ से प्रभावित हुए बिना लोगों से जुड़ने की कोशिश की। विपक्षी नेता लगातार आरोप लगा रहे हैं कि मोदी कार्यक्रम में अपने मन की बात कह रहे हैं, लोगों की नहीं सुन रहे।

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