तो क्या कोश्यारी करेंगे घायल राजनैतिक शेर का शिकार

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तो क्या कोश्यारी करेंगे घायल राजनैतिक शेर का शिकार
देहरादून उत्तराखंड की राजनीती अब कोर्ट के दरवाजे पर जहां पहुंच गयी है वही हरीश रावत ने जनता की अदालत में जाकर न्याय की गुहार लगानी शुरू कर दी है जनता की अदालत में जाने पर देहरादून में भाजपा का विरोध भी जहां कांग्रेस को संजीवनी प्रदान कर रहा है वही ये विरोध भाजपा के लिए नुकसान का सौदा साबित हुआ है जनता का मिल रहा समर्थन बता रहा है की अभी भी हरदा जनता के दिलो पर राज कर रहे है यही कारण है की अब भाजपा ने हरीश रावत के कदमो को रोकने के लिए नया खाका तैयार किया है भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी को आगे किया जा सकता है यही नहीं अगर राज्य में भाजपा सरकार बनाए जाने को लेकर कोई कसरत करती है तो हरदा के सामने भगत दा को लाया जा सकता है उत्तराखंड में अगर भाजपा का हरीश रावत के कदमो को रोकने का खाका तैयार करना है तो एक बार भगत सिंह कोश्यारी की ताकत का इस्तमाल भाजपा का करना ही होगा भाजपा के पास वर्तमान में उत्तराखंड में हरीश रावत के मुकाबले कोई भी नेता मौजूद नहीं है जो टक्कर दे सके सतपाल महाराज का कद सिर्फ पौड़ी तक जहां सिमित हो गया है वही बगावत कर बागी बनी अम्रता से सतपाल महाराज की छवि पर भी प्रभाव पड़ा है

क्यों है जरनल का जलवा अभी भी बरक़रार
जी है ये सही है की राज्य में भाजपा के पास कोई बड़ा नेता वर्तमान में मौजूद नहीं जो हरीश रावत को राजनैतिक टक्कर दे सके यही कारण है की भाजपा राज्य में अपने नए नेता की खोज में जहां जुटी है वही उत्तराखंड में अभी भी जरनल का जलवा बरक़रार है संघ की रिपोर्ट में जरनल को आगे कर अगर २०१७ में भाजपा चुनाव में जाती है तो इस का फायदा भाजपा का मिल सकता है यही कारण है की उत्तराखंड में अभी भी भुवन चंद खंडूरी की जगह जनता के दिलो में बरक़रार है लेकिन जरनल का स्वस्थ ख़राब होने के कारण पुरे राज्य में जनता के बीच जाना जहां कठिन डगर होगा यही वजह है की भाजपा जरनल रुपी अपने नेता को अभी आगे नहीं कर रही

क्यों है कोश्यारी का कद ऊचा
संघ से लेकर भाजपा के बड़े नेता भी कोश्यारी की ताकत का भरोसा रखते है उत्तराखंड में कोश्यारी को लेकर संघटन में जहां एक राय बन सकती है वही छवि भी जनता के बीच साफ़ नज़र आती है राजनैतिक रूप से भी कोश्यारी को भाजपा का फायदा जनता के बीच अच्छी छवि को लेकर मिलता नज़र आया है यही नहीं मिलान सार होने के कारण कोश्यारी भी अपने विवेक से कोई भी राजनैतिक फैसला लेने में माहिर बताये जाते है राज्य में जहां कोश्यारी को लेकर कोई विवाद नहीं है यही वजह है की अगर भाजपा राज्य में सरकार बनाए जाने को लेकर कोई कसरत करती है तो राज्य में भगत दा की खिचड़ी पकना तय है

निशंक क्यों नहीं है जरुरी
राज्य में निशंक को लेकर जहां भाजपा में नेता लोगो के बीच विरोध होता रहा है वही जनता के बीच छवि भी सही नहीं है ऐसे में अगर राज्य में भाजपा को जनता के बीच जाना है तो निशंक से किनारा किया जाना जरुरी है अगर भाजपा राज्य में निशंक को लेकर जनता के बीच जाएगी तो इस का नुकसान भाजपा का मिल सकता है यही वजह है की भाजपा राज्य में अभी हर मंथन को अपना नज़रिया बना कर सोच रही है यही नहीं निशंक की सरकार के समय कई फैसले जनता के बीच विरोध की वजह रहे है कुम्भ से लेकर पावर तक के कई मामले ने निशंक की छवि को ख़राब किया है

सवेधानिक बेंच तक जा सकता है उत्तराखंड का मामला
उत्तराखंड की राजनीति का फैसला अब कोर्ट में ही होगा जनता की अदालत में भले ही राजनैतिक दल जा रहे हो लेकिन उत्तराखंड की राजनीती को लेकर उठा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने के बाद भी उस से बड़ी सवेधानिक बेंच (कन्सिटूशन बेंच )तक जा सकता है क़ानूनी जानकारों के अनुसार इस तरह का वातावरण अभी तक देश में नहीं सामने आ सका है यही वजह है की हाई कोर्ट अभी तक इस तरह को कोई नज़ीर न होने का कारण कोई फैसला नहीं दे सकी है यही वजह है की इस मामले को अभी काफी वक़्त कोर्ट के दरवाजे पर लग सकता है

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