कृषि विभाग की समीक्षा बैठक

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 कृषि विभाग की समीक्षा बैठक

देहरादून ,प्रदेश के कृषि, कृषि विपणन, कृषि शिक्षा, रेशम विकास, वर्षा जल संरक्षण, पर्वतीय ग्रामों में चकबंदी, भेड़ एवं बकरी पालन, चारा एवं चारागाह विकास, ग्राम्य तालाब विकास मंत्री उत्तराखण्ड सरकार राजेन्द्र सिंह भण्डारी ने विधानसभा स्थित अपने कक्ष में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक आहूत की।
बैठक में उन्होंने शासन एवं जनपदीय मुख्य कृषि अधिकारियों से कहा कि उत्तराखण्ड का स्थानीय उत्पाद दुनिया के बाजार में जाये, जिससे किसानों को आत्म निर्भरता मिलेगी। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारी एवं उनके सहयोगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे नए प्रयास एवं प्रमुख उपलब्धियों को किसान के खेतों की ओर ले जायें। सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं को धरातल पर लायें। आंकड़ों की बाजीगरी में न जायें। किसान को उसकी उपज का समर्थन मूल्य दिया जाये।
उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं परम्परागत फसलों मण्डुआ, रामदाना, गहत, काफर को प्रदेश के दो जनपदों में piolet project के रूप में शुरू करें जिसमें जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला एवं चमोली के पोखरी में शीघ्र शुरू किया जाये जिसमें 50-50 लाख रूपए मार्केटिंग के रूप में शीघ्र अवमुक्त किया जाए जिसे समर्थन मूल्य के हिसाब से किसानों से क्रय किया जाये।उन्होंने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार की मंशा रोजगार बढ़ाने की है। उसे कम करने की नहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 670 किसान सहायक न्याय पंचायत स्तर पर हैं जिन्हें न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है। उनका मानदेय 12,000 रू0 हो इसका प्रस्ताव शीघ्र बनाने के निर्देश सचिव कृषि को देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की अगली बैठक में रखा जाये। बैठक में उन्होंने कहा कि किसानों के लिए विपणन केन्द्र एवं बीज भण्डारों को सुदृढ किया जाये जिसमें अवर अभियन्ताओं की काफी कमी हैं तथा उक्त पद लोक सेवा आयोग की परिधि में आता है। अधियाचन होने तक स्वीकृत पदों के सापेक्ष आऊटसोर्स से भर्ती के लिए शासन से स्वीकृति प्राप्त करते हुए उसे भी कैबिनेट की बैठक में रखा जाए।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि आगामी दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में देहरादून में कृषक सम्मेलन कराया जाये जिसमें प्रदेश के कृषकों को आमंत्रित करते हुए कृषि के वक्ताओं एवं वैज्ञानिकों को बुलाया जाये। जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेगें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कृषि विभाग की प्रमुख उपलब्धियों को प्रचारित-प्रसारित वृहद स्तर पर किया जाये। इसके लिए ब्रोशर, पुस्तिका, बैनर एवं प्रत्येक जनपद में मुख्य- मुख्य जगह एंव ब्लाकों में होर्डिंग्स शीघ्र ही लगाये जाने के निर्देश भी दिये। इसके साथ ही उन्होंने निदेशक कृषि को निर्देशित किया कि देहरादून में किसान भवन को सुद्वदीकरण एवं आधुनिकीकरण करते हुए उसमें पेयजल एवं अन्य सुविधायें मुहैया करवाई जायें जिससे प्रदेश के किसान उक्त किसान भवन का इस्तेमाल बखूबी कर सके। खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे प्रोसेसिंग प्लान्ट हर जिले में लगाये जाये जिससे बुआई के बीजों का प्रमाणीकरण एंव गै्रडिंग हो सके। उन्होंने उक्त योजना को बदलते हुए कहा कि स्थानीय बीजों का मैनुयली प्रमाणीकरण भी किया जाये। यह क्रम लागत में होगा तथा इसके करने से ट्रासपोर्टशन एंव समय की भी बचत होगी।
बैठक में उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्नतशील कृषि यन्त्रों एवं मशीनरी पर सरकार द्वारा अनुदान जिसमें 50 प्रतिशत राज्य सहायता विभिन्न केन्द्र पोषित योजनाओं से तथा 40 प्रतिशत एवं 30 प्रतिशत राज्य सहायता सरकार द्वारा दिया जाने का निर्णय है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से अनुसूचित जाति/जनजाति को किसानों को लाभान्वित किया जाए। जिसमें मृदा परीक्षण, बीज मिनीकिट वितरण, सिंचाई टेंक निर्माण मृद्वा एवं जल सरंक्षण कार्यक्रम का कार्य किया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि मानक तय कर आरोही क्रम के अनुसार करे इससें पात्र व्यक्ति लाभान्वित होगा। यदि हम उक्त मानक नहीं तय करते है तो उससे भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहेगी। गरीबी की रेखा से नीचे के व्यक्ति का जीवन स्तर उठायें। उन्हें सरकार द्वारा संचालित हो रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे जिससे उनका जीवन स्तर उठ सके, कृषि के अधिकारी एवं कर्मचारी कार्य धरातल पर करें। निदेशक कृषि गौरी शंकर ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया जिसकी विस्तार से मा0 मंत्री जी द्वारा समीक्षा की गयी। प्रमुख सचिव कृषि डॉ0 रणवीर सिंह एवं जनपदों से आये मुख्य कृषि अधिकारी एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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