साजिश के बाद भी किंग ही रहे राकेश शर्मा

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हिमांशु पैन्यूली
देहरादून प्रदेश में एक बार फिर नए मुख्यसचिव के रूप में आईएएस अधिकारी शुत्रघ्न सिंह ने अपना कार्य भार संभल लिया लेकिन इस कार्य भार को लेकर राकेश शर्मा के चेहरे से रौनक गायब थी खबर है की केंद्र सरकार में कुछ भाजपा के नेता राकेश शर्मा के विरोध में कदम ताल कर रहे थे जिस के कारण केंद्र सरकार ने राकेश शर्मा सेवा विस्तार नहीं दिया वही भाजपा का एक कैंप राकेश शर्मा के साथ राज्य में कदम ताल करता रहा जहा प्रदेश में राकेश शर्मा का विरोध होता रहा और वर्तमान में भी ये विरोध जारी है उस को लेकर कई तरह की बाते जगजाहिर हो रही है खबर है की जो लोग विरोध कर रहे है उन के पास राकेश शर्मा के खिलाफ कोई भी ऐसा सबूत नहीं है

 

 

 

जिस के आधार पर राकेश शर्मा को दोषी करार दिया जा सके क्यों की अगर कोई ऐसा सबूत होता तो कोर्ट में लगा कर कारवाही जरूर होती वही देहरादून के दीपक आज़ाद ने भी एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में लगायी हुई है जो हरिद्वार में दी गयी सिडकुल की जमीन के मामले को लेकर है इस मामले का सच भी अभी तक जनता के बीच नहीं आ पाया है इस मामले को लेकर भी राकेश शर्मा के खिलाफ साजिश के बीज बोये गए थे वही भड़ास फॉर इंडिया को मिली सरकारी खबर के अनुसार प्रदेश के तेरहवें मुख्य सचिव के रूप में 1983 बैच के आईएएस अधिकारी शुत्रघ्न सिंह ने सोमवार को कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद मुख्य सचिव ने मीडिया को अपनी प्राथमिकताएं बताई। पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और अवस्थापना सुविधाओं का विकास उनकी प्राथमिताओं में रहेगा। जन सेवाओं को अंतिम छोर तक पंहुचाने में उनका जोर रहेगा। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड में असीम संभावनाएं है। यहां के लोग प्रकृति के बीच में रहते है। सरल प्रकृति के हैं। प्रशासन तंत्र को डिलिवरी सिस्टम को चुस्त दुरूस्त करना है। खासतौर से उत्तराखण्ड में पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नियम के तहत करना है।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह 1985 से 1987 तक बुलंदशहर में एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, 1987 से 1989 तक उद्योग विभाग के महाप्रबंधक, 1989 से 1990 तक शहरी विकास विभाग में संयुक्त सचिव, 1990 से 1991 तक नैनीताल में मुख्य विकास अधिकारी, 1991 से 1992 तक उत्तर प्रदेश भूमि विकास के प्रबंध निदेशक, 1992 से 1994 तक मुजफ्फरनगर के कलेक्टर, 1994 से 1995 तक विक्रीकर विभाग से अपर आयुक्त, 1995 से 1996 तक कृषि विभाग के विशेष सचिव, 1996 से 1998 तक अध्ययन अवकाश, 1998 से 1999 तक मंडी परिषद के निदेशक, 1999 में विश्व बैंक वाशिंगटन में परामर्शी, 1999 से 2000 तक परिवार कल्याण विभाग के सचिव, 2000 से 2001 तक फैजाबाद के कमिश्नर, 2001 में उत्तराखण्ड में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, 2001 से 2003 तक भारत सरकार कैबिनेट सचिवालय के निदेशक, 2003 से 2007 तक भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास में संयुक्त सचिव, 2007 में उत्तराखण्ड सरकार में सचिव ऊर्जा, आई.टी., शहरी विकास, 2008 से 2009 तक पुनर्गठन विभाग में सचिव, 2009 से 2010 तक प्रमुख सचिव ऊर्जा, पुनर्गठन, आवास एवं शहरी विकास, 2010 से 2014 तक पीएमओ में, 2014 से 2015 में भारत सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग में अपर सचिव पद पर रहे।

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