खोजी पत्रकारिता का मतलब दलाली की पाठशाला नहीं

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खोजी पत्रकारिता का मतलब दलाली की पाठशाला नहीं khoji patrkarita ka matlab dalali nahi akash nagaramit shagal rakesh bhatti

देहरादून खोजी पत्रकारिता का मतलब ये नहीं की सब कुछ बिकता है पत्रकारिता में बहुत कुछ टिकता है लेकिन इस टिकाव को कम लोगो ही अपने जीवन का मिशन बना कर पत्रकारिता को ईमानदारी से आगे ले जा रहे है वरना यहाँ पत्रकारिता के कुनबे में घुन लगाकर दलाली की चौखट पर अपना ईमान बेच चुके लोगो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है आने वाले दिनों में अगर पत्रकारिता को ऐसे तथाकथित पत्रकार वैश्या के कोठे के रूप में तब्दील कर दे तो कोई नयी बात नहीं होगी कुल मिलाकर उत्तराखंड की मीडिया में इन दिनों चर्चा का विषय राज्य मंत्री बनाम आकाश नागर जरूर हो गया है

खोजी पत्रकारिता के निशाने पर रहे कई लोग
उत्तराखंड की खोजी पत्रकारिता के नाम पर ऐसे ही कुछ नामो का उल्लेख किया जा रहा है जिन के खुलासे के बाद राजनीती का मैदान हिल गया हो देहरादून में अमित सहगल जो मूल रूप से हल्द्वानी से ताल्लुक रखते है उनका देहरादून आने के बाद विवादों से नाता रहा रहता भी क्यों नहीं उनकी स्टिंग को लेकर लिखी गयी कई खबरे राजनीती में तूफान मचा गयी सोनिया आनंद को लेकर लिखी गयी खबर पर इतना बबाल मचा की देहरादून के थाना डालनवाला में मुकदमा तक दर्ज़ करवा दिया गया हलाकि इस मुकदमे के बाद पूरा परिवार भी पुलिस के निशाने पर बना रहा अमित सहगल के कई साथी पत्रकार भी मुकदमा दर्ज़ होने के बाद कुछ समय तक भूमिगत हो गए थे लेकिन बाद में इस मामले को लेकर हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर लिया गया

देहरादून में इस तरह के कई मामले है जिन पर खोजी पत्रकारिता को लेकर किये जाने का ठप्पा लगा हुआ है फोकस न्यूज़ टीवी चैनल को देहरादून में लेकर आये राकेश कुमार भाटी जो कभी उत्तर प्रदेश के एक सरकारी विभाग में तैनात थे जहा से विवाद के बाद उनका देहरादून में कई सालो पूर्व आना हुआ और मीडिया की लाइन में स्टिंग कर उन्होंने पेयजल विभाग के ऍम डी भजन सिंह का पहला खुलासा किया जिस के बाद उनके खिलाफ भी पुलिस में भजन सिंह ने मुकदमा दर्ज़ करवा दिया और आरोप लगे की राकेश भाटी ने पैसो की डिमांड की बाद में पुलिस की कारवाही में मामले की जांच भी हुईं लेकिन इस मामले में आखिर हुआ क्या कोई नहीं जान पाया

उत्तराखंड में एक नया मामला विवादों में गया है उत्तराखंड सरकार में राज्य मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू को लेकर नोएडा से प्रकशित समाचार पत्र संडे पोस्ट के आकाश नागर के फ्रंट पेज स्टोरी पर ये विवाद खड़ा हुआ है समाचार पत्र ने रेखा आर्य के पति को लेकर बरैली और कई जगह पर मुकदमो को लेकर सवाल उठाये है यही नहीं अपराध को सियासी सरक्षण नामक शीर्षक से समाचार लिखा गया है मामला सत्ता में सरकार के मंत्री से जुड़ा होने के कारण सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे है वही रेखा आर्य ने अपने फेस बुक में आकाश नागर को तथित पत्रकार बता कर पांच लाख रूपए मांगे जाने की बात पोस्ट की गयी है इस बात में सच्ची बात क्या है इस का फैसला जनता को दिख रहा होगा लेकिन बता दे की आकाश नागर पूर्व में भी रेखा आर्य के खिलाफ समाचार लिख चुके है लेकिन अगर राज्य मंत्री रेखा आर्य से पैसे की डिमांड की गयी है तो अभी तक मामला पुलिस के पास क्यों नहीं पहुंच पाया है

आकाश नागर से भड़ास फॉर इंडिया ने बात की तो उन्होंने कहा की उनके द्वारा पैसो को लेकर जो बाते रेखा आर्य ने अपने फेसबुक में लिखी है वो पूरी तरह गलत है जब की उन्होंने सिर्फ खबर का वर्जन लेने के लिए अपने एडिटर अपूर्व जोशी के मोबाइल फ़ोन से बात की थी बता दे की ये मामला उत्तराखंड की राजनीती में एक नया विवाद के रूप में शामिल हो गया है सोशल मीडिया में आकाश नागर को लेकर सपोर्ट में काफी लोगो का रेस्पॉन्स मिल रहा है जब की रेखा आर्य के लगाए गए आरोप अभी तक कही से भी साबित होते नज़र नहीं आये है इस मामले को लेकर कई बार रेखा आर्य के बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन से बात नहीं हो सका anoop gupta

लखनऊ पत्रकारिता में अपने जुनूनी तेवर के चलते आज भी लखनऊ की पत्रकारिता में सच को जिन्दा रखे हुए अनूप गुप्ता अपनी मासिक पत्रिका दृश्टान्त को बखूबी निकल रहे है खोजी पत्रकारिता के नाम पर उनका जवाब नहीं है उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के समय कई बड़े अधिकारी जिस में सूचना विभाग के नवनीत सहगल के कई मामलो को लेकर आवाज बुलंद कर चुके अनूप गुप्ता आज भी अपनी खोजी पत्रकारिता को जिन्दा रखे हुए है उनका लेखन लखनऊ की पत्रकारिता में जहा कलम की सच्ची ईमानदारी का प्रतीक बना हुआ है ऐसे लोगो के कारण ही आज भी पत्रकारिता को ईमानदारी के आईने से देखा जाता है pooran rawatjagpal singh

पत्रकारिता में कभी कभी खबर को लेकर विवाद भी होता रहा है ऐसा नहीं है की एक पत्रकार ईमानदारी से काम करता रहे अगर ऐसा होता तो उधम सिंह नगर में ईटीवी के पूरन रावत और सितारगंज के साधना प्लस के जगपाल सिंह पर एक कारोबारी से दो लाख रूपए मांगे जाने के आरोप को लेकर पुलिस शिकायत नहीं की होती सितारगंज में खनन कारोबारी संदीप बिष्ट ने पुलिस को दी गयी अपनी शिकायत में दोनों के खिलाफ रंगदारी मांगे जाने की बात कही है अभी तक इस मामले पर भी कोई कारवाही पुलिस ने अंजाम नहीं दी गयी है भड़ास फॉर इंडिया उत्तराखंड की मीडिया में किस तरह क्या क्या होता रहा है उसकी एक बानगी भर तस्वीर जनता के बीच रख रहा है हमारा मकसद किसी की छवि धूमिल करना नहीं बल्कि सच क्या है ये बताना है इस खबर पर कोई भीअपने विचार दे सकता है

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