अलाउद्दीन खिलजी का सफरनामा : Khilji Biography 

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अलाउद्दीन खिलजी का सफरनामा : Khilji Biography 

बेख़ौफ़-बेरहम लेकिन अत्यधिक बुद्धिमान व् सशक्त कहलाये जाने वाले सुलतान अल्लाउद्दीन खिलजी का जन्म 1250 में जूना मोहमद्द के नाम से हुआ था, वह खिलजी साम्राज्य का दूसरा और सबसे शक्तिशाली शासक था. वो एक बहुत ही महत्वकांशी शासक था. युद्ध नीति के लिए प्रख्यात अलाउद्दीन खिलजी एक क्रूर शासक के रूप में भी बेहद प्रचलित रहा. खुद को दूसरा अलेग्जेंडर कहलवाना उसका एक बहुत ही खूबसूरत शौक था. अनेक बुराइयों से भरा अलाउद्दीन खिलजी का जीवन बेहद रोचक रहा. एक तरफ तो उसे शासन को लेकर बेहद संजीदा कहा जाता था वही दूसरी तरफ वो क्रूरता की हदो को तब पार कर जाता था जब उसे किसी स्त्री को पाने की लालसा हो जाती थी. अपनी इसी आदत के चलते उसने कई राजाओं को हराकर उनकी पत्नियों से शादी कर सम्बन्ध स्थापित किये. खुलेआम मदिरा पीने पर उसने पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था. खिलजी वंश का दूसरे सबसे शक्तिशाली सुलतान ने 1296 से 1316 तक 20 वर्षो तक शासन किया. इतिहास देखा जाए तो दिल्ली की सल्तनत शुरू से ही मजबूत हाथो में रही वह जिसने भी अपना परचम लहराया वह पूरे भारत पर राज्य करने से पीछे नहीं रहा.

एक बेहद महत्वकांशी सुलतान अलाउद्दीन खिलजी अपने समय में युद्धों को जीतने के लिए जनता में बहुत प्रचलित था, उसके साम्राज्य में कोई भी बिना किसी डर के जीता था यह तक की जंगलो में रहने में भी लोगो को किसी बात का भय नहीं था. फिर भी उसे निरंकुश, असहिष्णु, अनपढ़, किन्तु योग्य सेनानायक, महत्त्वाकांक्षी प्रशासक, लुटेरा, खूनी हत्यारा भी कहा जाता है, बेशक इसमें कोई सन्देह नहीं कि वह दिल्ली के सुल्तानों में एक महान् शासक था.

एक महान सुल्तान के रूप में विख्यात अलाउद्दीन खिलजी जितना बुद्धिमान और ऊर्जावान था लेकिन उसके साम्राज्य का विस्तार उतना ही सीमित रहा. इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि जिस तरह उसने युद्ध किये उसके अनुसार उत्तर पश्चिमी पंजाब, सिंध इसी सुलतान के नियंत्रण में थे और उनका साम्राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, मालवा और राजपुताना क्षेत्र तक था. उन्होंने गुजरात, रणथंबोर, मेवाड़, मालवा, जालौर, वरंगल, माबर और मदुराई का निर्माण भी किया था.

कहा जाता है कि सुल्तान एक महान शासक व् रणनीतिकार भी था, उसके जैसा शासक 300 वर्षो तक दुबारा नहीं हुआ. मंगोलो को युद्ध में बार बार पराजय देने वाला एक मात्र अल्लाउद्दीन ही था, और मंगोलो को भारत से पराजित कर उसने एक सशक्त सुलतान होने का प्रमाण भी दिया. मंगोलो के कारण भारत में उस वक़्त लोग बहुत त्रस्त थे. अलाउद्दीन खिलजी की युद्धिनीतियो, बाहुबलता, चतुरता, युद्ध के लिए उसकी अग्रिम इच्छा ने ही भारत को मंगोलो से आजाद करवा पाने में सफलता दिलवाई. अलाउद्दीन ने मुस्लिम समाज को नयी उचाईया दी. अलाउद्दीन खिलजी एक शक्तिशाली मिलिट्री कमांडर था जो भारतीय उपमहाद्वीप में सेना की देखरेख करता था.

खिलजी का दाहिना हाथ कहलाया जाने वाला मालिक काफूर सुलतान के बेहद करीब था और वफादार भी. अंतरंग सम्बन्धो के लिए भी दोनों बहुत प्रचलित थे. अलाउद्दीन के युद्ध विजय में मलिक काफूर का बहुत बड़ा हाथ रहा. 1308 में अलाउद्दीन ने अपने सहायक मलिक काफूर को दक्षिण के अभियान पर भेजा, 1311 में मलिक काफूर दिल्ली वापिस आया. लेकिन इसके कुछ ही समय बाद 1316 में सुल्तान की मौत हो गयी. खिलजी का अंत समय बेहद दुखद रहा और वह बहुत बीमार रहने लगे. किम्वदन्तिया यह भी है कि उनके ही वफादार मालिक काफूर के मन में साम्राज्य को लेकर लालच आ गया था और उसने सुलतान की हत्या करवाकर साम्राज्य खुद के आधीन किया.

चित्तोड़ की रानी पद्मिनी को पाने के लिए उन्होंने 1303 CE में चित्तोड़ पर आक्रमण किया था. इस युद्ध का लेखक मलिक मुहम्मद जायसी ने अवधी भाषा में 1540 में अपनी कविता पद्मावत में उल्लेख किया है. अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के चार साल के भीतर ही खिलजी साम्राज्य का पतन हो गया था. अलाउद्दीन के छोटे बेटे शहाबुद्दीन को उनके तीसरे बेटे मुबारक शाह ने गद्दी से उतार दिया था और 1316 से 1320 तक शासन किया. लेकिन बाद में नसीरुद्दीन ने अंततः उनकी हत्या कर दी थी. और इसके बाद खिलजी शासन का पूर्णतः पतन हो गया.

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