खाद्य प्रसंस्करण तथा पर्यटन उत्तराखण्ड के लिए महत्वपूर्ण है-राज्यपाल

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खाद्य प्रसंस्करण तथा पर्यटन उत्तराखण्ड के लिए महत्वपूर्ण है-राज्यपाल 

देहरादून उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0कृष्ण कान्त पाल ने कहा कि अपार संभावनाओं वाले उत्तराखण्ड में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वातावरण सृजित किया जाना चाहिए। इस दिशा में यद्यपि प्रयास जारी है तदापि उत्तराखण्ड जैसे पहाड़ी राज्य के सतत् विकास के लिए सर्वाधिक अनुकूल जड़ी-बूटियां, औषधीय पौधों, खाद्य प्रसंस्करण, कुटीर उद्योग, पर्यटन तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेष ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत है, सस्टेनेबिलिटी और डेवलपमेंट के बीच संतुलन बनाया जाना भी आवश्यक है। उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बिना छेड़छाड़ किये भरपूर उपयोग करने की जरूरत है। युवा जनसंख्या का संपदा के रूप में सदुपयोग हो सकता है। रोजगार के भरपूर अवसरों के लिए युवाओं के कौशल विकास रोजगार की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा। राज्यपाल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड तथा बिजनैस स्टैण्डर्ड द्वारा देहरादून में, ‘‘उत्तराखण्ड के सतत् विकास के लिए-मार्ग प्रशस्त “Uttarakhand’s Sustainable Economic Development-The Road Ahead” विषय पर आयोजित एक वैचारिक मंथन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योगों, शिक्षाविदों और सरकार के प्रतिनिधियों के संकलित सुझाव भविष्य में राज्य की उन्नति और विकास में मददगार होंगे। राज्य की उन्नति के लिए विचार-विमर्श के दौरान चुनौतियों, संभावनाओं अवसरों अथवा राज्य के सतत् विकास पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये।
राज्य निर्माण के बाद उत्तराखण्ड ने बहुत उन्नति की है। हमारे प्राकृतिक संसाधन, समर्पित जनशक्ति तथा अनुकूल जलवायु, प्रगति की दिशा में मददगार रहे हैं। राज्य के औद्योगिक विकास को सही दिशा की ओर ले जाने के लिये पहले से ही एक उचित औद्योगिक नीति मौजूद है। नई औद्योगिक नीति ऐसी होनी चाहिए जो आगामी दस वर्षाें में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य में बेहतर औद्योगिक वातावरण के लिये रचनात्मक दृष्टिकोण, सकारात्मक रवैया तथा उद्योग व सरकार के बीच आपसी विश्वास मुख्य आधार है जिन पर प्रदेश का समावेशी विकास टिका है तथा औद्योगिक और उससे सम्बद्ध क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है।
राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के विकास के लिए राज्य के सभी इलाकों में अच्छे सड़क संपर्क को आवश्यक बताते हुए यह भी कहा कि राज्य के दूरस्थ इलाकों के लोगों के लिए उनके उत्पादों की मार्केटिंग एक बहुत बड़ी समस्या है जिसे अधिकारिक स्तर पर हल किया जाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के दृष्टिगत राज्य सरकार को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक ऐसी नयी औद्योगिक नीति बनानी चाहिए जो नये निवेश को आकर्षित करे तथा मौजूदा उद्योगों के पुनरोद्धार/विकास को सुनिश्चित करते हुए प्राकृतिक संसाधनों व कौशल का संतुलित उपयोग कर सके। उत्तराखण्ड के अनूठे लोकाचार, पर्यावरण तथा कृषि-जलवायु परिस्थितियों को देश के अन्य भू-भाग से अलग दृष्टिकोण से देखे जाने की जरूरत है। यह आवश्यक है कि इस क्षेत्र की अनूठी निधि को चिन्हित कर उसके संतुलित दोहन के माध्यम से सतत् आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जाये। फूलों, सब्जियों, फलों, मसालों, जड़ी-बूटियों के बीजों की विभिन्न प्रजातियाँ ऐसी है जो सिर्फ इन्हीं पहाड़ियों में उगाई जा सकती हैं। इनके बीज मँहगे हैं, बाजार में इनकी ऊँची कीमत, यहाँ काश्तकारों की आमदनी बढ़ाने में मददगार होगी।
राज्यपाल ने पारम्पारिक उद्योगों तथा शिल्प का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक और व्यवहार्य बनाने के लिए इनसे जुड़े लोगों को नई-नई जानकारी देकर सहयोग देना होगा।

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