केन्द्रीय जल संसाधन राज्य सरकार की डी पी आर का नहीं ले रहा संज्ञान

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केन्द्रीय जल संसाधन राज्य सरकार की डी पी आर का नहीं ले रहा संज्ञान
नई दिल्ली सोमवार को नई दिल्ली में छठी एनजीआरबीए की बैठक आयोजित हुयी। उत्तराखण्ड राज्य में प्राकृतिक आपदा घटित होने के दृष्टिगत मुख्यमंत्री हरीश रावत उक्त बैठक में उपस्थित नही हो पाए। उक्त बैठक में मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में स्थानिक आयुक्त एस.डी.शर्मा द्वारा बैठक में प्रतिभाग किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री रावत द्वारा प्रधानमंत्री को संदर्भित पत्र जिसकी प्रति केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती को भी प्रेषित की गई है के माध्यम से अनुरोध किया कि एनएमसीजी जो जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत है, राज्य सरकार की रूपए 951.98 करोड़ की 25 डीपीआर का कोई संज्ञान नही ले रहा है जबकि एनएमसीजी ने wapcos द्वारा तैयार डीपीआर जो बाद में जमा की गई। उन्होंने अनुमोदन दे दिया यद्यपि इनमें एनजीआरबीए तथा एनजीटी के निर्देशों का पालन नही किया गया है।
एनजीआरबीए के फ्रेमवर्क के विपरीत wapcos को क्रियान्वयन एजेन्सी तथा परियोजना प्रबंधन सलाहकार भी नियुक्त किया गया है। जिससे हितों में टकराव उत्पन्न हो सकता है। उत्तराखंड राज्य क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा भेजी गई डीपीआर में रू. 578.83 करोड़ की 12 डीपीआर जो एस.टी.पीध्बायोडायजेस्टर के संबंध में थी। रू.143.07 करोड़ की डीपीआर 8 एसटीपी के अपग्रेडेशन से संबंधित राज्य कार्यकारी संस्था द्वारा मई, 2015 से मई, 2016 के मध्य केन्द्र को भेजी गई थी। रू. 238.08 करोड़ की लागत की अवशिष्ट प्रबंधन के संबंध में डीपीआर दिसम्बर, 2014 से मई, 2015 के मध्य जमा की गई थी।
संदर्भित पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा एस.टी.पी. के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है।
स्वच्छ भारत मिशन के अन्र्तगत 132 ग्राम पचंायतो में खुले मे शौच से मुक्ति का कार्यक्रम चल रहा है। इनमे से 40 ग्राम पंचायतों ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया है। जबकि शेष 92 ग्राम पंचायतों मे यह लक्ष्य आगामी 15 अगस्त तक हासिल कर लिया जाएगा। इस ग्राम पंचायतों में तरल तथा ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन बायोडायजेस्टर परियोजनओं की आवश्कता है।
पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह अवगत कराया कि राज्य सरकार द्वारा गंगा के तटो पर वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। वृक्षारोपण पर ग्रीन बोनस दिया जा रहा है। साथ ही एनजीओ, ग्राम पचांयत व वन पंचायत को स्टोरेज टैंक जलाश्यों के निर्माण पर बोनस दिया जा रहा हैं।

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