केदारनाथ आपदा के तीन साल बाद सदमे से उबरा उत्‍तराखंड

0
459

केदारनाथ आपदा के तीन साल बाद सदमे से उबरा उत्‍तराखंड

केदारनाथ उत्तराखंड तीन साल पहले वर्ष 2013 में आपदा से बुरी तरह थर्राया उत्तराखंड सदमे से धीरे-धीरे उबरते हुए अपनी सोलहवीं वर्षगांठ पर जज्बे के साथ कुछ कदम आगे बढ़ा है। उसके इस हौसले को पूरे देश से मिले भरपूर समर्थन का नतीजा है कि बाबा केदार के साथ ही चारों पवित्र धामों में श्रद्धालु उमड़े।
श्रद्धालुओं की आमद सत्रहवें वर्ष में दाखिल हो रहे राज्य की आर्थिकी में नए आत्मविश्वास और नई उम्मीदों की रोशनी भरती दिख रही है। तमाम झंझावात के बीच राज्य ने आर्थिक विकास की दर को बनाए रखा तो प्रति व्यक्ति आमदनी में भी राष्ट्रीय औसत पर बढ़त जारी रखी है। केदारनाथ पर बनी फिल्म के लिए ताक पर नियम
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में लीडर्स राज्यों की केटेगरी में शामिल उत्तराखंड ने मजबूत इच्छाशक्ति के साथ पूंजी निवेश के लिए पुख्ता जमीन तैयार कर दी है, लिहाजा नए वर्ष ने उद्योगों की आमद के लिए पलक-पावड़े बिछा दिए हैं।
उत्तराखंड ने अपनी स्थापना के सोलह वर्ष पूरे करते हुए कई चुनौती का डटकर मुकाबला किया है। तीन साल पहले जल प्रलय के रूप में आई आपदा के भीषण कहर ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नष्ट कर पीड़ा दी। आपदा ने सबसे बड़ी चोट आर्थिकी पर की। सेवा का क्षेत्र औंधे मुंह गिरने और होटल, रेस्तरां, ढाबे समेत मनोरंजन, पर्यटन और परिवहन से जुड़े बड़े से छोटे कारोबारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हुआ तो तकरीबन तीन साल बाद राज्य ने अपने पैरों पर खुद खड़ा होने का हौसला दिखाया।
कैलाश खेर ने तैयार किया केदारनाथ धाम पर 12 एपीसोड का सीरियल
इसकी झलक आर्थिक विकास दर और प्रति व्यक्ति आमदनी में उत्तराखंड की ऊंची छलांग लगाने से साफ जाहिर हो जाती है। वर्ष 2015-16 के अग्रिम आंकड़ों में राज्य की आर्थिक विकास दर 8.70 फीसद आंकी गई है। वहीं प्रति व्यक्ति आमदनी में 16,435 रुपये का इजाफा होने के साथ यह 1,51,219 रुपये सालाना तक पहुंच गई है।
राज्य में कृषि और संबंधित क्षेत्र की विकास दर 4.21 फीसद, औद्योगिक क्षेत्र की विकास दर 6.83 फीसद और सेवा क्षेत्र की विकास दर 11.77 फीसद रहने का अनुमान आर्थिक सेहत के लिए सुखद संकेत हैं। कमोबेश इसी तरह बेहतरी के संकेत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी नजर आए हैं।
कैलाश खेर के साथ मिलकर उत्तराखंड सरकार ने किया ‘बाबा केदार’ सीरियल का प्रोमो लांच
टॉप टेन लीडर्स केटेगरी में शामिल उत्तराखंड के सामने अब कुछ क्षेत्रों में और बेहतर काम करने की चुनौती है। इस पर खरा उतरने की स्थिति में देशभर से काफी संख्या में उद्योग उत्तराखंड का रुख कर सकते हैं। पलायन खासतौर पर पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में गांवों के तेजी से जनशून्य या कम आबादी क्षेत्रों में तब्दील होने की समस्या से जमीनी स्तर पर निपटने की जरूरत है।
कैलाश खेर को सीरियल के लिए दिया गया धन
पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति दोस्ताना उद्योगों, शिक्षा की उत्कृष्टता के केंद्रों के साथ ही गुणवत्तापरक जीवनयापन सुविधाओं की दिशा में सरकती कोशिशें मुहिम बनीं तो उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर पर उभरते अग्रणी प्रदेशों की कतार में शामिल नजर आ सकता है।

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments