पत्रकारिता के नाम पर ये कैसा मजाक है पत्रकार महोदय

0
838

पत्रकारिता के नाम पर ये कैसा मजाक है पत्रकार महोदय 
Journlist-joke-Uttarakhand-Pic-Cm-Harish-Rawat

देहरादून उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर लगातार अपमान जनक फोटो और किसी के बारे में भी आपत्तिजनक बातो को लिखे जाने का चलन तेज़ हो गया है इस चलन में व्यक्ति अपनी सोच के साथ दूसरे का भी अपमान कर रहा है लगातार इस तरह की बातो से बचे जाने की जरुरत है।
खबर मिली है की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ हल्द्वानी में भाजपा के कुछ लोगो ने सोशल मीडिया पर एक महिला को पैर पकड़ कर दिखाया गया फोटो पोस्ट किया गया है यही फोटो कुछ समाचार पत्रो में भी प्रकशित किया गया भाजपा के कई नेता जिन में भगत सिंह कोश्यारी से लेकर निशंक कैंप और बाकि सभी भाजपा के लोगो ने इस फोटो को सोशल साइट पर डाल कर राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ महिला अपमान की बाते कही गयी है। जिस को लेकर कई तरह की लोगो की पोस्ट सोशल साइट पर वायरल हो रही है जिस में से एक पोस्ट को भड़ास फॉर इंडिया पोस्ट कर रहा है जो ये आकलन करने के लिए काफी है की किस तरह राज्य में ऐसे लोगो की भी भरमार है जो अपने कल्चर को लेकर भी संजीदा नज़र नहीं आते तो आखिर उन लोगो से किस तरह की उम्मीद की जा सकती है। नीचे सोशल साइट पर पोस्ट की गयी जिस को साहित्यकार लक्षमण सिंह बटरोही जी का ये बयां भी पढ़िए….उन्होंने लिखा है की आज के अखबार में मुख्यमंत्री हरीश रावत जी के दो फोटो छपे थे, लेकिन कुछ विरोधी लोगों ने एक महिला जो अपनी व्यथा सुनाते हुए मुख्यमंत्री जी के पावँ पकड़ के रो रही थी को तो जनता को नारी अपमान के रूप में दिखाया।
किन्तु एक और फोटो जिसमें स्कूलों की छोटी बच्चियां प्यार से उनको घेरे हुए हैं नहीं दिखाया।
अखबार की इस फोटो पर सोशियल मिडिया में कुछ सरफिरे लोगों की प्रतिक्रिया पर जानेमाने

मुख्यमंत्री का पक्ष लेने के लिए नहीं, मैं इन पत्रकार महोदय से एक सवाल पूछता हूँ. आप इस प्रकरण के गवाह हैं ? मैं उस वक़्त वही था, इसलिए कह सकता हूँ कि मान लीजिये गंभीर विषय पर एक कार्यक्रम चल रहा हो, एकाएक कोई औरत आकर भीड़ चीरती हुई आए और मुख्यमंत्री के पैर पकड़ ले. कारण जो भी रहा हो, ये कोई तरीका तो नहीं है. हर बात को व्यक्त करने का एक ढंग है. मैं देख रहा था, कई महिला पुलिसकर्मी तेजी से लपके, मगर मुख्यमंत्री ने ही उन्हें रोका और महिला को समझाने की कोशिश की. यही वह कर सकते थे. पत्रकारों की यह कैसी पौध तैयार हो रही है जो बिना सोचे-समझे ठप्पा लगा देती है. मुद्दा क्या होता है और क्या ये लोग बना देते हैं. आज के अख़बारों को ही देख लो, कुमाऊनी को प्रचारित करने के लिए एक प्रयास किया गया था, बच्चों तक लोकजीवन की अभिव्यक्तियाँ पहुंची. जिस भाषा से उनका संपर्क कट गया है, उन्हें वे प्रयोग और प्रचारित करने लगे थे. मुख्यमंत्री ने कुमाऊनी में आधे घंटे का भाषण दिया, लोक जीवन की भूली-बिसरी चीजों को अपनाने की अपील की. उन पर सरकारी सब्सिडी की बातें की. हर उत्तराखंडवासी को सप्ताह में एक दिन यहाँ के परंपरागत अनाज का प्रयोग करने की बात की. मगर ये बातें इस पत्रकारों और उनके मदांध छुटभैयों की समझ में शायद नहीं आएँगी, उसके लिए अपने सांस्कृतिक अतीत की जानकारी और थोडा ठहर कर उस पर विचार करने की जरूरत होती है….

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments