जम्मू कश्मीर में मोदी का शिकंजा, JKLF हुआ बैन

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देहरादून: मोदी सरकार में जम्मू-कश्मीर में कड़ा फैसला लेते हुए देश को एक और तोहफा दे डाला है. जम्मू कश्मीर में जहां हर वक़्त आतंक और दर का साया मंडराया रहता है वह मोदी सरकार ने अपना ओहदा दिखते हुए वह की जनता को डर के साये से थोड़ी राहत पहुंचने का काम किया है जिसे JKLF बड़ी कार्यवाई के रूप में देखा जा रहा है.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) को आतंक विरोधी कानून के तहत बैन कर दिया है. अलगाववादी नेता यासीन मलिक जेकेएलएफ के प्रमुख हैं. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पुलवामा हमले के 8 दिन बाद 22 फरवरी को यासीन मलिक को गिरफ्तार किया था.

जेकेलएएफ पर आतंकी गतिविधियों को समर्थन करने का आरोप हमेशा से लगता रहा है. तीन महीने से चल रही ये प्रक्रिया आज अंजाम तक पहुंची है. इससे पहले जमात ए इस्लामी पर भी बैन लगाया जा चुका है. ये साफ संदेश देता है कि अलगाववाद के खिलाफ सरकार की कड़ी नीति लगातार जारी है और इसे और कड़ा किया जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस सिलसिले में पिछले कई दिनों से जम्मू कश्मीर में छापेमारी कर रही थी. इस कड़ी में ईडी ने यासीन मलिक के कई ठिकानों पर भी छापेमारी की थी.

मोदी सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी संगठन को अलगाववादियों का पीछे से समर्थन कर के आरोप में बैन कर दिया था. साथ ही 26 फरवरी को टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए ने घाटी में कई जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारुक, मोहम्मद अशरफ खान, मसर्रत आलम, जफर अकबर भट्ट और सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी का नाम शामिल हैं. इस छापेमारी के बाद 28 फरवरी को केंद्र सरकार ने जमात-ए-इस्लामी (जेईआइ) पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया. इसके तहत गृह मंत्रालय की कार्रवाई में जेईआइ के प्रमुख हामिद फैयाज सहित 350 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था. पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार लगातार घाटी में मौजूद अलगाववादी नेताओं पर लगातार शिकंजा कसती जा रही है.

गृह मंत्रालय के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 22 अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं वापस ले ली थी. साथ ही वही के 155 नेताओं को दी गई सुरक्षा में बदलाव भी किया था. इस सूची में भी यासीन मलिक का नाम शामिल था. हालांकि उस दौरान यासीन मलिक ने कहा था कि सरकार से उसे कोई सुरक्षा नहीं मिली है.

मोदी सरकार के इस कड़े कदम से देश की जनता भी राहत में ज़रूर आएगी की देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों को सुविधा के साथ ही देश में असुरक्षा लाने वाले संगठनो पर भी शिकंजा कसा जाना लगातार जारी है. और यह भी आशा की जा सकती है कि इस तरह से देश में समय समय पर होने वाले कुकृत्य हमलो पर भी लगाम कसी जा सकेगी.

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