जीवीके ई.एम.आर.आई. द्वारा संचालित खुशियों की सवारी योजना की समीक्षा की

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जीवीके ई.एम.आर.आई. द्वारा संचालित खुशियों की सवारी योजना की समीक्षा की 

देहरादून चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री उत्तराखण्ड सरकार सुरेन्द्र सिंह नेगी द्वारा विधानसभा सभा में अपने कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ उत्तराखण्ड राज्य में जननी शिशुु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्र्तगत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से जीवीके ई.एम.आर.आई. द्वारा संचालित खुशियों की सवारी योजना की समीक्षा की गयी। खुशियों की सवारी योजना द्वारा राज्य में सफलतापूर्वक संचालन के 5 वर्ष से अधिक का समय पूर्ण करते हुए 3 लाख 9 सौ 8 परिवारों को सेवा का लाभ प्राप्त हो चुका है। खुशियों की सवारी योजना की इस उपलब्धि पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री श्री सुरेन्द्र सिहं नेगी ने खुशी जाहिर करते हुए जीवीके ईएमआरआई की टीम को बधाई दी। उन्होने कहा कि खुशियों की सवारी योजना द्वारा राज्य की महिलाओं एवं नवजात शिुशुओं के साथ-साथ स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को आवश्यकता के समय निःशुल्क यातायात सुविधा प्रदान की जाती है। इस सेवा द्वारा अब तक 3 लाख से अधिक परिवारों को लाभ पहुॅचाना इस योजना की सबसे बड़ी सफलता का सूचक है। हमारा प्रयास रहेगा कि हम भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बना सकें। उन्होने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि इस सेवा को और अधिक सफल बनाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में योजना से अधिक से अधिक लोंगों लाभान्वित करायें, ताकि सुदुरआंचलों में निवास कर रहे व्यक्तियों/परिवारों को इस योजना का लाभ प्राप्त हो सके।
उन्होने कहा कि राज्य में इस सेवा का शुभारम्भ 2011 में किया गया था तथा आरम्भ में इस योजना को किराये के वाहनों द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसके संचालन में अनेक प्रकार की कठिनाईयां हो रही थी। इस बात को ध्यान में रखते हुये 30 मार्च, 2013 को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस योजना को और अधिक कारगर बनाने के लिये 90 एम्बुलेंस वाहनों को खुषियों की सवारी योजना के साथ जोड़ा गया। वर्तमान में इस सेवा के अन्र्तगत सम्पूर्ण राज्य में कुल 107 वाहन ;95 सरकार द्वारा प्रदत्त वाहन तथा 12 किराये के वाहनों के माध्यम से संचालित किये जा रहे है। खुषियों की सवारी योजना के संचालन का उत्तरदायित्व राज्य मंे गत आठ वर्शों से अधिक की अवधि से 108 आपातकालीन सेवा का संचालन कर रही संस्था जीवीके ई.एम.आर.आई. को सौंपा गया है।
उन्होने कहा कि इस योजना द्वारा अब तक लगभग 1 करोड़ किलोमीटर से अधिक का सफर तय करते हुए कुल 3 लाख से अधिक परिवारों को लाभ पंहुचाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित किया है। इस योजना का लाभ सबसे अधिक क्रमषः देहरादून में लगभग 59 हजार, उधम सिहं नगर में 51 हजार, नैनीताल में 38 हजार तथा जिला हरिद्वार में 36 हजार से अधिक परिवारों को प्राप्त हुआ है। प्रसव उपरान्त जच्चा-बच्चा को अस्पताल से घर तक निःषुल्क छोड़ने के अतिरिक्त राश्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन के अन्तर्गत संचालित अन्य योजना राश्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम में भी खुषियों की सवारी द्वारा सहयोग किया जाता है इसके अन्तर्गत अब तक कुल 29 हजार से अधिक मामलों मे छात्र/छात्राओं को स्वास्थ्य सम्बन्धी गम्भीर समस्या होने की स्थिति में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देष्य से उच्च स्वास्थ्य केन्द्रों तक ;राज्य से बाहर के अस्पतालों में भी जैसे- दिल्ली, नोएडा तथा चन्दीगढ़ तक निःषुल्क पंहुचाया तथा वापस घर तक छोडा गया है। इस अवसर पर खुषियों की सवारी सेवा का सफल संचालन हेतु जीवीके ई.एम.आर.आई. उत्तराखण्ड के स्टेट हैड मनीष टिंकू ने अपने सभी सहयोगियों, राज्य की जनता, उत्तराखण्ड सरकार, स्वास्थ्य विभाग, प्रषासन, मीडिया एवं अन्य सभी नागरिकों का हार्दिक धन्यवाद देते हुये कहा कि जीवीके ई.एम.आर.आई. की टीम उत्तराखण्ड राज्य के नागरिकों को सदैव अपनी मेहनत, लगन एवं निःस्वार्थ भावना से सेवाएं प्रदान करती रहेगी। उन्होनें बताया कि खुषियों की सवारी योजना के माध्यम से जहाॅ आज राज्य में संस्थागत प्रसव को बढाने में सहायता मिली है वहीं स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को भी गम्भीर बीमारी होने पर इलाज हेतु यातायात सुविधा निःषुल्क रूप से प्रदान की जा रही है। अब तक लगभग 2 लाख 69 हजार से अधिक जच्चा- बच्चा तथा 29 हजार से अधिक मामलों में विद्यार्थियोें को इस सेवा से लाभान्वित किया जा चुका है बैठक में स्वास्थ्य विभाग एवं खुशियों की सवारी योजना के अधिकारी उपस्थित थे।

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