श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के बजाये भरणी कृतिका नक्षत्र में

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श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के बजाये भरणी कृतिका नक्षत्र में janmashtami 2017 festival krishan janmashtami श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के बजाये भरणी कृतिका नक्षत्र में देहरादून विष्णुजी के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी इस बार रोहिणी नक्षत्र में नहीं, बल्कि भरणी और कृतिका नक्षत्र के योग में मनाई जाएगी। इंडिया के साथ साथ विदेशो में भी श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी काफी उत्साह से मनाई जाती है।
पांच साल बाद ऐसा अवसर आया है जब जन्माष्टमी बगैर रोहिणी नक्षत्र के योग में मनेगी। जन्माष्टमी 14 और 15 अगस्त को लेकर अभी से उसकी तैयारी मंदिरो में शुरू कर दी गयी है भगवान कृष्ण का जन्म दिवस जेल में मनाये जाने की परम्परा है क्यों उनका जन्म जेल में हुआ था इसी वजह से पुलिस कृष्ण का जन्म दिवस काफी धूम धाम से मानती है।

यह श्रीविष्णु का 16 कलाओं से पूर्ण भव्यतम अवतार है। जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाती है। आचार्य पंडित महेश के अनुसार स्मार्त संप्रदाय यानी गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले पहले दिन जन्माष्टमी मनाते हैं। कुमाऊं भर में इस बार अधिकांश लोग 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे, जबकि वैष्णव संप्रदाय के लोग 15 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। आचर्य बताते हैं कि वर्ष 2012 के बाद ऐसा योग बन रहा है जब जन्माष्टमी में दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र नहीं है। पहले दिन भरणी, जबकि दूसरे दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। रोहिणी नक्षत्र 16 अगस्त को है। मंदिरो से लेकर कृष्ण की नगरी मथुरा से लेकर वृंदावन में काफी चहल पहल देखि जाती है बाके बिहारी में कृष्ण भगवान का जन्म दिवस अलग तरह से मनाया जाता है जिस को देखें जाने के लिए विदेशी भी इंडिया में आकर भगवान कृष्ण की भक्ति रस में उत्साह से इस दिवस को मानते है

रोहिणी नक्षत्र का यह हैं महत्व

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में माना जाता है। श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी में इसका विशेष महत्व माना गया है। ज्‍योतिष में रोहिणी को उदार, मधुर, मनमोहक और शुभ नक्षत्र माना जाता है। रोहिणी शब्द विकास, प्रगति का सूचक है। पांच सालो बाद आ रहे कृष्ण जन्मआष्ट्मी को लेकर अलग अलग दिनों इस उत्सव को मनाया जायेगा जिस के लिए मन्दिरो में अलग से तैयारी की जा रही है

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