जेल के कैमरों की फाइल कैद

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जेल के कैमरों की फाइल कैद

हरिद्वार जिला कारागार में कैदियों व बंदियों की हर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना दम तोड़ते दिखाई दे रही है। भोपाल में सेंट्रल जेल से विचाराधीन बंदियों के फरार होने के बाद शासन प्रशासन नहीं संजीदा दिखा है। प्रशासन से कैमरे का प्रस्ताव शासन में भेजने के बाद भी फाइल वहीं कैद हो कर रह गई है।
हरिद्वार जिला कारागार में बंदियों की संख्या 1023 है, जबकि जिला कारागार में क्षमता 660 बंदियों की है। जेल में भी हत्या, लूट, हत्या के प्रयास समेत अन्य आपराधिक वारदातों के षडयंत्र रचने के मामले भी सामने आए हैं। इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा को लेकर किए गए इंतजामों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जेल परिसर में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन इनकी संख्या मात्र सात है। इसके चलते जेल परिसर के कुछ हिस्से की गतिविधियां ही रेकार्ड हो पाती हैं, लेकिन नये सिरे से जेल परिसर में सुरक्षा का पहरा कड़ा करने के लिए योजना बनी थी। वर्ष 2015 में प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए दो करोड़ रुपये शासन ने स्वीकृत किए थे, लेकिन समय से सदपयोग न होने के कारण रुपये लैप्स हो गए थे। वर्ष 2016 में दोबारा से शासन में रुपयों के प्रयोग को लेकर अनुमति मिलने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। माना जाना जा रहा था जल्द ही शासन से हरी झंडी मिलेगी, लेकिन कैमरे लगाने का प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है। यह हाल जब है भोपाल में सिम्मी के आतंकी फरार हो गए थे, इसके बाद शासन प्रशासन द्वारा सुध नहीं ली गई। यह कैमरे बैरक, भोजन खाने व पकने वाले स्थान, शौचालय के बाहर व अंदर, अस्पताल आदि स्थानों पर कैमरे लगाए जाने थे।

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