इंद्रमणि बडोनी पहाड़ के गाँधी थे कांग्रेस

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इंद्रमणि बडोनी पहाड़ के गाँधी थे                                 पर्वतीय गांधी थे बडोनी-महानगर कांग्रेस अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान ने स्व. इन्द्रमणि बडोनी की पूण्य तिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।उन्होंने कहा कि बडोनी जी के जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों ने अह्म भूमिका निभायी है। परिस्थितियों ने ही उनमें संघर्षो से जूझने का  जज्बा पैदा किया और उनके व्यक्तित्व को निखारा। ऐसी ही कठिन परिस्थितियों ने श्री इन्द्रमणि बडोनी को उत्तराखण्ड का महानायक और आंदोलन का अग्रदूत बनाया। आंदोलन के दौरान उनकी अपनी विशिष्ट शैली, सिद्वांतों, विचारों और जीवन दर्शन के कारण उनकी भूमिका वैसी ही थी जैसी आजादी के संघर्ष के दौरान भारत छोडों आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी ने निभायी थी।

अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष में उतरने के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। लेकिन आजादी के बाद कामरेड पीसी जोशी के समपर्क में आने के बाद वह पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हुए। अपने सिद्वांतों पर दृढ रहने वाले इन्द्रमणि बडोनी की मुख्य चिंता इसी बात पर रहती थी कि पहाडों का विकास कैसे हो।  वो हमारे प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने  सरकार से निवेदन किया कि नई टिहरी का नाम स्व.इन्द्रमणि बडोनी के नाम पर रखा जाये।

इस अवसर पर महानगर महासचिव महेश जोशी,कंचन रांगर पंकज मेसॉन राजेश चमोली परवीन बिष्ट,मनोज ,देवेन्द्र,लक्ष्मी पंवार,मन्जू त्रिपाठी, आदि उपस्थित थे।

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