अवैध खनन पर मुख्य सचिव और जिलाधिकारी हरिद्वार के खिलाफ परिवाद दायर

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अवैध खनन पर मुख्य सचिव और जिलाधिकारी हरिद्वार के खिलाफ परिवाद दायर
वंदना सक्सेना
हरिद्वार उत्तराखंड में अवैध खनन को लेकर हरिद्वार की कोर्ट में मामला जाने के बाद नए समीकरण बन सकते है खबर है की राज्य सरकार के साथ साथ सरकारी अधिकारी भी इस मामले पर ऎसे खनन को लेकर जिस पर विरोध होता है उस पर कारवाही कर सकते है राज्य में मामला कोर्ट में चले जाने के बाद इस मामले को लेकर राजनैतिक दल भी अपनी राजनैतिक रोटिया सेक सकते है इस मामले को लेकर हरिद्वार के जिलाधिकारी ने भड़ास फॉर इंडिया से किसी भी तरह की बात करने से इंकार किया है उन का साफ कहना है की जो भी जवाब दिया जाना है उसे कोर्ट में दिया जायेगा बता दे की हरिद्वार में अवैध खनन को लेकर हमेशा विरोध होता रहता है यही नहीं कई जगह पर अवैध खनन को लेकर राजनेताओं की मिलीभगत भी सामने आती रही है कांग्रेस भाजपा सहित कई राजनेताओं के अवैध खनन के कारोबार किसी से छुपे नहीं है लेकिन राज्य सरकार का इस मामले पर कारवाही न किया जाना भी कई तरह के सवालो को जनम देता रहा है क्यों की राज्य सरकार को जितना राजस्व खनन के कारोबार से मिलता है उस का चार गुना खनन कारोबारी कमा रहे है लगातार नदियों का सीना चीर का अवैध खनन का कारोबार सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की तरह राज्य में फल फूल रहा है खबर है की रेलवे रोड हरिद्वार निवासी डॉ. विजय वर्मा ने प्रदेश के मुख्य सचिव और जिलाधिकारी हरिद्वार के खिलाफ खनन माफिया से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद दायर किया है।

यह पहला मामला है जब किसी अधिकारी के खिलाफ खनन को लेकर कोर्ट में परिवाद दायर हुआ है। न्यायालय ने परिवाद को स्वीकार करते हुए परिवादी के बयान दर्ज कर लिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
परिवादी डॉ. विजय वर्मा, जेपी हेल्थ पेराडाइस के निदेशक है। उन्होंने सीजीएम कोर्ट में दो दिसंबर को परिवाद दायर करते हुए बताया कि मां गंगा हिंदू धर्म की आस्था की प्रतीक है। अनंत काल से गंगा को माता के रूप में पूजा जाता रहा है।गंगा में मृतकों की अस्थियां प्रवाहित कर लोग दिवंगत आत्माओं के स्वर्ग में जाने की परिकल्पना करते आ रहे हैं। लेकिन माफिया द्वारा खनन के नाम पर मां गंगा के गर्भ को रौंदा जा रहा है।उनका आरोप है कि इस मामले में मुख्य सचिव और जिलाधिकारी खनन माफिया के साथ शामिल हैं और वे न्यायालय में न्यायसंगत कार्रवाई करने की अपील करते हैं।

इस पर सीजीएम मनीष कुमार पांडेय ने परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद न्यायालय में परिवादी के बयान भी दर्ज कराए गए। मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तारीख नियत की गई है।वहीं जिलाधिकारी एचएस चुग ने मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वे केवल प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। उन्हें जो भी कहना है, वह न्यायालय में कहेंगे।

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