NEWS मैं अख़बार हूँ :I Am A News Paper 

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NEWS मैं अख़बार हूँ : I Am A News Paper 

बाजार में इसकी कीमत रोज़ बदल दी जाती है
देहरादून कागज़ का नाम आते ही अख़बार की याद आती है गरीब से लेकर हर घर में पाया जाने वाला अख़बार की भी अलग ही कहानी है जिसको आज बता रहे है भड़ास फॉर इंडिया के माध्यम से चर्चा का विषय बनी ये अख़बार की कहानी जो न जाने कितने परिवारों के घरो का चूला जलाकर अपना कारोबार लगातार आगे बड़ा रही है जिसको हर घर ने बेच का निकाल दिए जाने के बाद भी वो किसी न किसी तरह से फिर वापिस आ जाता है क्योकि वो एक अख़बार है।

रोज़ाना की जिंदगी में खबरो के लिए पड़ा जाने वाला अख़बार आज भी उतना ही प्रभावशाली है क्योकि कई मामलो का खुलासा करने वाला ये कोई और नहीं बल्कि एक अख़बार है,सरकारों को उनके सत्ता की कुर्सी से हटा कर हार का स्वाद भी इसी अख़बार ने चखाया है लेकिन क्या कभी अपने इस बारे में भी सोचा है की एक अख़बार का उपयोग घर की महिला अपने किचन से लेकर पति के लिए रोटी लपेट तक में इसका उपयोग करती है।  यही नहीं अख़बार को रद्दी में बेच कर भी घर की महिलाये इसके माध्यम से भी धन कमा लेती है लेकिन बेचे जाने के बाद भी ये अख़बार किसी गरीब के घर का चूला जला देता है क्योकि ये अख़बार है घर से कबाड़ी की दुकान पर जाने वाला अख़बार कागज़ के लिफाफों के माध्यम से फिर घर में दस्तक देता हुआ नज़र आता है जिस घर से उसको बेच दिया जाता है बाज़ारो में जिस अख़बार की कीमत रोज़ाना मिलती है उसकी कीमत तब तक मिलती रहती है जब तक हर उस को जो उसका उपयोग करता है उनकी कीमत उसको न मिल जाये।

अख़बार के काले पन्नो को करने के लिए आज लाखो नहीं करोड़ो लोगो को अख़बार रोज़गार देता हुआ नज़र आता है बाजार में इसकी कीमत रोज़ बदल दी जाती है लेकिन जब घर में पहुंच जाता है तो खबर के माध्यम से कोहराम भी मचा देता है इसकी कीमत अनमोल है रद्दी से लेकर अख़बार और फिर बाद में उसी वेस्ट के रूप में इसको बेच दिया जाता है अख़बार के माध्यम से इस खबर पर हमारा मकसद यही है।  की इतने लोगो को रोज़गार देने वाला अख़बार का आखिर कितने चरण में बाज़ारीकरण होता जा रहा है लेकिन आज भी इस अख़बार में कई मीडिया के लोग घर की रोटी लपेट कर इसका उपयोग करते है जबकि ये उनकी रोजी रोटी है इसका अपमान इस तरह किया जाना क्या सही है जवाब का इंतज़ार रहेगा ठंडी में जब कवरेज के लिए जाना होता है।  तब यही अख़बार कपड़ो के अंदर लपेट कर ठण्ड से बचाता है क्योकि ये अख़बार है आपको हमारी ये खबर कैसी लगी इसके लिए आप अपने विचार हमें लिख कर सेंड कर सकते है अगर आपके पास भी कोई रोज़ाना जिंदगी से जुड़ा हुआ या कोई और लेख है तो हमें लिख भेजे।

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