होली के रंग में रंगी धरा : Holi Festival starts with its flow

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होली के रंग में रंगी धरा : Holi Festival starts with its flow

चहुँ ओर रंगो की मस्ती छायी रे कन्हाई

 

रंगो को साथ लिए होली एक बार फिर सभी दिलो को रंग बिरंगी सौगात देने दस्तक दे चुकी है, पूरे देश में होली का त्यौहार यूँ तो उमंगो भरा होता है लेकिन कही यह त्यौहार लोगो की खुशियों को उजाड़ जाता है. कुमाऊँ में रंगो से भरे इस वातावरण में चारो और होली खेलने वाले मस्ती में डूबे हुए होलियार नजर आते हैं फाल्गुन के शुरुआत के साथ ही इसकी धूम शुरू हो जाती हैं, लेकिन मुख्य रूप से फाल्गुन की एकदशी से होली का उत्सव बड़ी धूम से जगह जगह मनाया जाता हैं. लेकिन अगर रंगो के त्यौहार को हर्षोउल्लास के साथ मनाने की तैयारी होती है तो दूसरी तरफ अपने ही घर की ख़ुशी में रंग में भंग डालने वाले भी मौजूद मिलते हैं. देश के हर जगह में इस त्यौहार को खूब मस्ती से खेले जाने की उत्सुकता देखी जा सकती हैं लेकिन कही पर यह मस्ती गलत रूप ले लेती हैं. कुमाऊनी होली अपने आप में सुप्रसिद्ध इसलिए भी हैं कि एकादशी से शुरू हुई होली घर घर गयी जाती हैं जिसमे 5 दिनों तक किसी न किसी के घर पर यह कार्यक्रम रखा जाता हैं और होली की मस्ती में डूबे लोग एक दूसरे के घर जाकर होली गायन करते हैं और पारम्परिक तौर से होली गयी जाती हैं, साथ ही गुजिया, पापड़, सूखे आलू, चिप्स आदि से होली गाने वाले मेहमानो का स्वागत किया जाता हैं. महिलाओ और पुरुषो की होली भी अलग अलग तरीके से गायी जाने वाली और बहुत ही आनंदमयी होती हैं. बहुत ही उल्लास और आनंद के साथ यह त्यौहार आज भी मनाया तो जाता हैं लेकिन कई बार देखा जाता हैं कि होली के रंगो में लोग एक दूसरे के प्रति अपने द्वेष को भी निकलने से पीछे नहीं रहते हैं. सद्भावना से भरा होली का यह बेहद खूबसूरत त्यौहार अपने असली रंग खोता जा रहा हैं.

सांवरे संग खेलू होरी रे रसिया

होली के रसिया के यहां तो होली के आनंद का कहना ही क्या हैं. जी हां अब बात हो रही हैं वृन्दावन धाम कि जहां होली का उत्सव तो जैसे ख़तम होने का नाम ही नहीं लेता हो. वृन्दावन-बरसाना में एक महीने तक चलने वाली होली में लोग नित्य रंगो में डूबे हुए दिखते हैं. और हो भी क्यों न… आखिर कृष्ण कन्हाई और राधा के संग होली खेलने का आनंद ही कुछ और हैं. बांके बिहारी मंदिर में तो जैसे सारा ब्रिज उम्दा ही रहता हैं और साथ ही देश के कोने कोने से ए लोग कन्हैया के साथ होली का रसपान करने का मौका नहीं छोङा चाहते. ब्रिज कि होली तो सारे विश्व में ही प्रख्यात हैं, लेकिन असली आनंद कि प्राप्ति तो उसे ही होती हैं जिसने वहां जाकर होली खेली हो.

बांके बिहारी दरबार में लोग रंग में सराबोर होने के लिए लालायित रहते हैं. कीमती से कीमती पोशाके भी रंग से रंगने को तैयार बैठे लोग होली का वह परम आनंद लेने वृन्दावन धाम जाते हैं. विश्व की एक ऐसी धरा जहां स्वयं भगवान ने प्रकट होकर नित्य नयी लीलाएं करी और वहां के लोगो को सुख दिया. यही कारण हैं कि देश दुनिया से लोग होली के उत्सव में वहां होली खेलने आते हैं. वही बरसाना की लट्ठ मार होली की अलग ही छाप दुनिया में रहती हैं. बरसाने की लट्ठमार होली पूरे विश्व में सबसे अनोखी हैं. जैसा की इस होली के नाम से ही पता लग जाता हैं कि इसमें होली खेलने के लिए लट्ठों का इस्तेमाल किया जाता हैं.

होली के त्यौहार का मतलब यही है कि उसे हर्ष के साथ मनाया जाए और यह विचार रहे कि किसी के दिल को न दुखाया जाए. आइये सौहार्द के त्यौहार को मनाये और भी खूबसूरती से.

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