हरीश रावत ने बीजापुर को अलविदा बोला कहा है उनका नया ठिकाना

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हरीश रावत ने बीजापुर को अलविदा बोला कहा है उनका नया ठिकाना
देहरादून अलविदा बीजापुर कहा और नए आशियाने की तरफ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चले गए बीजापुर में उनकी यादो का करवा हमेशा याद किया जाता रहेगा सरकार पर संकट के बादल से लेकर बागी कोंग्रेसियो की हर वो चाल जिस का शिकार बीजापुर में किया जाता रहा हरीश रावत इन सबके बाद भी सरकार को चला कर अपने राजनैतिक धर्म को निभा पाने में कामयाब रहे सत्ता में उनकी वापिसी भले ही न हो पायी हो लेकिन उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा से वोटिंग आंकड़े में उन्नीस ही रही ये आंकड़े कांग्रेस के लिए भाजपा सरकार का मुकबला आगामी चुनावो में ढाल का काम करेंगे लेकिन बीजपुर में रहने के दौरान इस राज्य ने राजनैतिक जो इतिहास कायम किया है उसको कभी भुलाया नहीं नहीं जा सकता बीजापुर को अलविदा कह कर जाने वाले हरीश रावत के दिल में आज भी जनता का वो दर्द याद रहता है जब वो मंडुवा और पहाड़ी गधेरे को लेकर अपनी
राजनैतिक लड़ाई लड़ी गयी उन्होंने अपने फेस बुक पेज पर भी अलविदा बीजापुर को लेकर लिखा है निचे उनके सोशल साइट पर लिखा उनका सन्देश इस तरह है

दोस्तों मैं, सोमवार के अपराह्न, 3 वर्ष 2 माह तक घर, कार्यालय, मित्रों, दोस्तों व शुभचिन्तकों का एक ठिकाना रहा बीजापुर गेस्ट हाउस खाली कर रहा हॅू। मैं बीजापुर गेस्ट हाउस को धन्यवाद देना चाहता हॅू बहुत अच्छी और चुनौतीपूर्ण यादें अपने साथ लेकर के जा रहा हॅू। धन्यवाद बीजापुर। घर ढ़ूढ़ने में सबको कठनाई आती है, मुझे भी आयी। मैंने उस कठनाई को लोगों के साथ इसलिये शेयर किया कि, लोग नेताओं को घर देने में डरते क्यों हैं? इस पर चर्चा हो कहीं तो कुछ खोट है। मेरे ट्वीट पर दो-तीन दोस्तों ने जिनमें से दो को मैं जानता हॅू, वे भा0ज0पा0 से जुड़े हैं, उन्होंने मुझ पर बहुत गुस्सा और नफरत निकाली है। मैं अपने दोस्त श्री सेमवाल जी को कहना चाहता हॅू कि, मैं तो प्रतिदिन 3 या 4 बार लोगों से मिलता था और रात देर तक मिलता था। उनको मुझसे मिलने मैं कठिनाई हुई, मुझे क्षमा करें। मगर मुझे उस व्यक्ति का नाम जरूर बता दें, जिसने मुझसे मिलने के ऐवज में पैंसा मांगा था।
बीजापुर गेस्ट हाउस में जब मैं रहने आया, राज्य भयंकर आपदा से ग्रस्त था। मैंने शपथ ली थी कि, जब-तक आपदा ग्रस्त राज्य की अर्थव्यवस्था व आवागमन को पटरी पर नहीं लाऊंगा और पीड़ितों का पुर्नवास पूर्ण नहीं हो जायेगा। मैं बीजापुर गेस्ट हाउस में ही रहूंगा। राज्य की अर्थव्यवस्था पटरी पर आयी, आवागमन पुनः स्थापित हुआ, हजारों लोगों के घर भी बने, मगर खतरे से जूझ रहे 350 गांवों का विस्थापन करने का सपना अधूरा रह गया। उसके साथ मुख्यमंत्री आवास जाने का मेरा भी सपना अधूरा रह गया। खैर मेरा सपना अधूरा रह जाय कोई बात नहीं, वह व्यक्ति का सपना है। गांवों के पुर्नवास की चुनौती को आओ हम सब मिलकर पूरा करें।

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