खलनायक नहीं कांग्रेस के नायक बने हरीश रावत

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खलनायक नहीं कांग्रेस के नायक बने हरीश रावत:Harish Rawat Congress WORKING COMMITTEE
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति से हरीश रावत की विदाई को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तूफान पर हैं वहीं उत्तराखंड के कांग्रेसी खेमे जो हरदा के विरोधी बताये जाते है। वो हरीश रावत की असम के प्रभारी बनने के बाद उनको उत्तराखंड की राजनीति से विदाई किए जाने को लेकर खुश नजर आ रहे हैं। यह खबर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के कैंप के लिए अच्छी जरूर है. उनकी नज़र में हरीश रावत उनके लिए खलनायक की भूमिका में रहते है लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं की हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीती को अलविदा कह कर चले जायेगे अब वो असम से लेकर दिल्ली और उसके बाद उत्तराखंड में भी अपनी राजनैतिक नज़र और अधिक पैना करते हुए आएंगे कांग्रेस में किया गया ये परिवर्तन आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी अहम् माना जा रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व ने हरीश रावत को उत्तराखंड की राजनीति से अलग करके यहाँ पर कांग्रेस में मची हुई गुटबाज़ी पर विराम लगाए जाने का सन्देश दिया है। लेकिन हरीश रावत इसके बाद भी उत्तराखंड में ही नायक की भूमिका पर नज़र आएंगे। उत्तराखंड में हरीश रावत को खटि नेता के रूप में जाना जाता है और यह भी कहा जाता है कि हरीश रावत राजनीति के मजे हुए खिलाडी हैं उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत का वजन उस समय और अधिक बढ़ गया था. जब अपनी ही सरकार को बचाने में हरीश रावत पूरी तरह कामयाब हुए थे।

उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन करने वाले विधायकों को मुंहतोड़ जवाब देकर हरीश रावत ने राष्ट्रीय नेतृत्व का सिर ऊंचा करने का काम किया था बल्कि देश के प्रभावशाली नेता नरेंद्र मोदी की राजनैतिक चाल को विफल कर डाला था. यही कारण था वेंटिलेटर पर पहुंची देश के अंदर कांग्रेस को उत्तराखंड के नेता हरीश रावत ने ऑक्सीजन देने का काम किया था और अब उत्तराखंड की राजनीति से हरीश रावत विदाई को लेकर कई तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे है। निश्चित रूप से प्रीतम सिंह और इंदिरा कैंप में हरीश रावत की उत्तराखंड से विदाई को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है. लेकिन यह बात उत्तराखंड की राजनीति के किये भी सच है कि उत्तराखंड से हरीश रावत की असम के प्रभारी बनने से लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनने की जिम्मेदारी दी गई है। वह कहीं ना कहीं हरीश रावत के कद में इजाफा करती हुई नजर आ रही है यही नहीं देश के अंदर कांग्रेस की वर्किंग कमेटी में भी हरीश रावत को जगह मिली है जहां कांग्रेस देश की राजनीति में कई अहम फैसलों को लेकर अपनी जिम्मेदारी के रूप में मानी जाती है।

उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर उनके विरोधी सोशल मीडिया पर जहां उनका विरोध कर रहे हैं. वही देश की राजनीति में हरीश रावत का बढ़ता हुआ कद यह भी बता रहा है कि वह उत्तराखंड की राजनीति को कभी अलविदा नहीं कहेंगे। भले ही हरीश रावत के प्रभारी बनने के बाद असम
राजनीति में दखलंदाजी करेंगे लेकिन उनकी नज़र उत्तराखंड की राजनीति में भी जारी रहेगी. क्योंकि हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में अपना मोह नहीं छोड़ सकते यह भी कहा जा रहा है उत्तराखंड से हरीश रावत की विदाई के बाद भी वो यहाँ की राजनीती में अपना दखल देते रहेंगे।

उत्तराखंड में हरीश रावत को राजनीती का बावन अवतार भी कहा जाता है. यही वजह है उनको कांग्रेस में उनकी मर्ज़ी से जगह दी गयी है अब वो कांग्रेस में राहुल गाँधी के काफी करीब होकर राजनीती में किस तरह देश में बीजेपी की राजनैतिक समीकरण पर नज़र रखी जानी है। इसको लेकर लगातार नेशनल मीडिया पर नज़र आते रहेंगे उत्तराखंड में हरीश रावत को अब आराम किये जाने की सलाह देने वाली इंद्रा ह्रदेश कैंप को भी कांग्रेस हाईकमान ने साफ सन्देश दे दिया की अभी हरीश रावत का राजनैतिक वजन बरक़रार है।क्योकि अगर ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस हरीश रावत का वजन बड़ा कर इतना बड़ा कद नहीं देती। कुल मिलाकर उत्तराखंड कांग्रेस में प्रीतम और इंद्रा कैंप के लिए हरदा का बड़ा हुआ वजन उनकी राजनैतिक संतुलन को आने वाले समय में जरूर कुछ गुल खिला सकता है।

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