हनुमान जयंती पर देखे 26 हजार घंटियों से 25 फीट ऊंचे हनुमान

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हनुमान जयंती पर देखे 26 हजार घंटियों से 25 फीट ऊंचे हनुमान
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दिल्ली हनुमान जयंती पर जहा भक्तो में उत्साह देखा जा रहा है वही हनुमान जी की इतनी बड़ी मूर्ति क्या कभी देखि है जो 26 हजार घंटियों से 25 फीट ऊंचे हनुमान जी को बनाया गया है इस मूरत को देखने के लिए हनुमान जयंती 11 अप्रेल से लेकर ३० अप्रेल तक कोई भी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में इनका नया स्वरूप देख सकता है हनुमान जयंती के दिन इस मूरत को देख लेने के लिए हज़ारो लोगो की भीड़ जुटी रही वही हर कोई इस मूरत का दीवाना बन गया
संकटमोचक भगवान हनुमान के विभिन्न स्वरूपों के बारे में तो सभी जानते होंगे, लेकिन दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में इनका नया स्वरूप देखा जा सकता है। यहां 26 हजार घंटियों से 25 फीट ऊंचे हनुमान को दर्शाया गया है। इनके खड़ाऊं को हाथ लगाते ही तन-मन ही नहीं, आसपास का सारा वातावरण भी झंकृत हो उठता है। दरअसल, युवा कलाकार चारुवी अग्रवाल ने कला और तकनीक को मिश्रित कर अपनी प्रदर्शनी हनुमान : इमेजेज बियोंड इमैजिनेशन, को एक नया आयाम दिया है। यह प्रदर्शनी कैनवास पर कूची से उतारे गए नीरस रंगों की स्वांत: सुखाय अभिव्यक्ति नहीं बल्कि कला दीर्घाओं से दूर होते जा रहे कला प्रेमियों को वापस खींचने का एक सकारात्मक प्रयास भी है। 11 से 30 अप्रैल तक चलने वाली इस प्रदर्शनी की खासियत राजस्थानी परंपरा का वह आदमकद (8 फीट लंबा) कांवड़ बॉक्स भी है जो पांच मिनट के भीतर चित्रों के जरिये हनुमान के जन्म से लेकर लंका दहन, श्रीराम के राजतिलक और पाताल में अंगूठी फेंकने तक की उनकी सारी जीवन यात्र बयां कर देता है। प्रदर्शनी में चारुवी के एनिमेशन वर्क वाली 13 मिनट की हनुमान चालीसा भी दिखाई जा रही है। इस हनुमान चालीसा में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन सहित नौ पाश्र्वगायकों ने स्वर दिया है।भगवान हनुमान की घंटियों वाली इस प्रतिमा को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कृष्णा राज ने भी सराहा। उन्होंने कहा, हनुमान नाम का सुमिरन ही तन-मन को ऊर्जा से भर देता है। उनके स्वरूप में इतनी घंटियां एक अलग ही अहसास करा रही हैं। चारुवी अग्रवाल ने भड़ास फॉर इंडिया की दिल्ली रिपोटर को बताया की ’ पौराणिक कथाओं में हनुमान चालीसा का अलग ही स्थान है। अगर पाश्चात्य देश इनमें से कुछ अलग निकाल सकते हैं तो हम क्यों नहीं? इसीलिए इस प्रदर्शनी के माध्यम से मेरी कोशिश हनुमान को समकालीन अवतार में प्रस्तुत करने की है। उम्मीद ही नहीं बल्कि विश्वास भी है कि यह अवतार आम जन मानस को भी पसंद आएगा।

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