बदमाशों की चौथ वसूली वाला तथाकथित मिडिया का चिला डीस

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बदमाशों की चौथ वसूली वाला तथाकथित मिडिया का चिला डीस

देहरादून: उत्तराखंड हमेशा से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों की शरणस्थली रहा है यही कारण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों का उत्तराखंड शुरू से ठिकाना बना रहा. उत्तराखंड राज्य अलग होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों ने उत्तराखंड की ओर अपना व्यापार और आपराधिक कारोबार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. पिछले कुछ सालों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश उत्तराखंड एक परीक्षण जलेबी बन कर उभर रहा है, ऐसे में ऐसे भी तथाकथित मीडिया की खाल में छुपा हुआ एक भेड़िया उत्तराखंड में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए चौथ वसूली का कारोबार अंजाम दे रहा है. इस बात की भनक उत्तराखंड के खुफिया विभाग से लेकर पुलिस महकमे को भी सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदमाशों के लिए उत्तराखंड में कौन चौथ वसूली का कारोबार अंजाम दे रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड में मीडिया की खाल में छुपा हुआ यह तथाकथित गुपचुप तरीके से अवैध वसूली के कारोबार को अंजाम दे रहा है. बताया जा रहा है इस तथाकथित मीडिया की खाल में छुपे हुए भेड़िए ने कई संस्थानों से आई कार्ड भी हासिल कर लिए हैं और उत्तराखंड की देवभूमि में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए चौथ वसूली के कारोबार को बड़े पैमाने पर अंजाम दे रहा है. बताया जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगह पर इस तथाकथित मीडिया वाले के खिलाफ कई मामले ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है. देव भूमि उत्तराखंड में प्रश्न उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए चोली के कारोबार को मीडिया की खाल में छुपे हुए ऐसे तथाकथित अंजाम देते रहेंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मीडिया की खाल में भेड़िया इन दिनों उत्तराखंड की देवभूमि में अपने कारोबार को अंजाम दे रहा है वही इस तथाकथित मीडिया की खाल में छुपे हुए भेड़िए ने कई जगह पर अपने पत्रकारिता के फर्जी दस्तावेज और डिग्रियों को लगा कर कई संस्थानों को अंधेरे में रखा है. मीडिया के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार उत्तराखंड की देवभूमि में कुछ ही समय पहले इस तथाकथित मीडिया की खाल में छुपे हुए भेड़िए ने दस्तक देकर यहां कई मीडिया के लोगों से अपनी नज़दीकियां बढ़ाई ओर इसका फायदा उठाकर वर्तमान समय में वह मीडिया उत्तराखंड के अंदर अपनी पैठ बना चुका है लेकिन खुफिया विभाग को ऐसे तथाकथित मीडिया की खाल में छुपे हुए भेड़िए की जांच नहीं की जानी चाहिए जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड की देवभूमि में चौथ वसूली के कारोबार को अंजाम दे रहा है. मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार कुछ ही समय में यहां लाखों रुपए की संपत्ति को भी अर्जित कर यहां अपना अलग कारोबार स्थापित किया जा चुका है. अब देखना होगा कि उत्तराखंड की पुलिस इस तथाकथित मीडिया की खाल में छुपे हुए भेड़िए का खुलासा किस तरह कर पाती है. उत्तराखंड की मीडिया में भी ऐसे लोगों की दस्तक खतरनाक साबित हो सकती है जिसे देखते हुए मीडिया के लोगों को भी ऐसे लोगों से दूरी बनाकर अपने को बचाना होगा जो तथाकथित मीडिया की खाल में छुपकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड में अवैध वसूली का कारोबार अंजाम दे रहे हैं.

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