108 आपातकालीन सेवा को उत्तराखंड सरकार से मिली संजीवनी

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108 आपातकालीन सेवा को उत्तराखंड सरकार से मिली संजीवनी EMRI 108 Ambulance Service HELTH SERVICE UTTARAKAHND राज्य में 108 आपातकालीन सेवा के संचालनदेहरादून उत्तराखंड में आपात सेवा के रूप में काफी समय से बजट की तरफ ताक रही 108 आपातकालीन सेवा को राज्य सरकार ने कई महीने बाद धन उपलब्ध करवा दिया है बताया जा रहा है की राज्य में कई जगह पर 108 आपातकालीन सेवा अपने कर्मचारी तक को महीने की पगार तक नहीं दे पायी थी जिसके कारण उत्तराखंड में 108 आपातकालीन सेवा से राज्य की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था लेकिन अब राज्य सरकार ने 108 आपातकालीन सेवा को धन उपलब्ध करवा दिया है जिसके कारण राज्य में फिर से 108 आपातकालीन के वाहन सड़को पर दौड़ते हुए नज़र आएंगे
देहरादून राज्य में 108 आपातकालीन सेवा के संचालन को सुदृढ़ करने हेतु शासन द्वारा 6 करोड़ रूपये की राशि अवमुक्त की गई है। इस आशय का शासनादेश अपर सचिव स्वास्थ्य डॉ.पंकज कुमार पाण्डेय ने महानिदेशक स्वास्थ्य के लिए जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य के दुर्गम तथा दूरस्थ क्षेत्रों में सुचारू रूप से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।
आपातकालीन सेवा 108 राज्य के सभी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव काल के दौरान उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाने की दिशा में यह सेवा महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि 108 आपातकालीन सेवा अपनी 138 एम्बुलेंस गाड़ियों तथा टिहरी में 1 एम्बुलेंस बोट (नौका) के सहायता से सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य इमर्जेन्सी की अवस्था में निःशुल्क सेवा प्रदान कर रही है।

उत्तराखंड में 108 का संचालन जीवीके ईएमआरआइ कंपनी करती है। यह एक गैर लाभकारी संस्था है और नियमानुसार इसका टीडीएस नहीं कटता। जबकि गत वर्षों में इस संस्था का टीडीएस कटता रहा है। ऐसे में विभाग ने संस्था को आयकर विभाग से पिछले 10 साल का लगभग 12 करोड़ रुपये का टीडीएस प्राप्त करने के लिए कहा है। कंपनी का 2008 में राज्य सरकार के साथ अनुबंध हुआ था और अगले साल मार्च 2018 में यह समाप्त हो रहा है।

विभाग यह मान रहा है कि इसके बाद टीडीएस निधि का उपयोग राज्य हित में नहीं हो पाएगा। ऐसे में नया भुगतान रोक दिया गया है। 108 एंबुलेंस के एक ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनकी चिंता ये नहीं कि किसने किसको भुगतान करना है बल्कि वह बच्चों की फीस व मासिक खर्च को लेकर परेशान हैं। अगर इस माह के अंत तक भुगतान नहीं होता है, तो वह नौकरी छोड़ देंगे। यह स्थिति आई तो आपातकालीन सेवा आपात स्थिति में आ जाएगी।

108 के स्टेट हेड मनीष टिंकु ने कहा कि बजट के बाद कर्मचारियों का वेतन हमारी प्राथमिकता में है।राज्य सरकार से बजट मिलने से बड़ी राहत मिली है । वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस रावत के अनुसार एंबुलेंस के रखरखाव आदि को कुछ रकम जारी कर दी है। 108 सेवा का भुगतान नहीं रोका गया है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त भुगतान हुआ है। यह रकम आयकर विभाग से लेने को कहा गया है।

बहरहाल इस बीच छह करोड़ रुपये जारी किए जा चुके है सूत्रों के अनुसार जीवीके के हैदराबाद स्थित मुख्यालय से ईंधन आदि के लिए धन लिया गया है, लेकिन कर्मचारियों के वेतन पर अड़ंगा लगा है। जिस पर हर माह करीब 1.5 करोड़ रुपये का खर्च है।

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