आरटीओ कार्यालय हरिद्वार की दलाली का डीएम ने देखा लाइव टेस्ट

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आरटीओ कार्यालय हरिद्वार की दलाली का डीएम ने देखा लाइव टेस्ट DM DEEPAK RAWAT LIVE SEE ARTO DALALI

हरिद्वार उत्तराखंड में आरटीओ कार्यालय दलाली का अड्डा बन गए है अगर ऐसा नहीं होता तो शिकायतो की बात सच नहीं होती हरिद्वार के जिला अधिकारी को एक वयक्ति द्वारा बताया गया की उनसे पैसे लेकर सरकारी फार्म बेचे जा रहे है इस बात का पता लगाने के लिए जिला अधिकारी जब वहाँ पहुंचे तो देखा की ड्राइवर ऑफिस में फार्म बेच रहा है।

यही नहीं पूरे उत्तराखंड के सभी जगह जहा पर आरटीओ कार्यालय बने हुए है वहाँ इसी तरह का नज़ारा नज़र आता है देहरादून में भी कुछ समय पूर्व दलालो को पकड़ा गया था इसके आलावा उधम सिंह नगर में भी दलालो का पूरा कब्ज़ा बना हुआ है आम जनता बिना सुविधा शुल्क दिए बिना कोई काम यहाँ पर नहीं करवा सकती हरिद्वार में जिस ड्राइवर का काम गाड़ी चलाना होता है लेकिन वो यहाँ सरकारी दफ्तर को दलाली का अड्डा बना कर मौज काट रहा था ऐसा नहीं है की इस बात का पता दूसरे अधिकारी को न हो मिली भगत से अंजाम दिए जा रहे इस दलाली के कारोबार का पता ज़िले के जिलाधिकारी दीपक रावत ने मोके पर ही पूरे मामले को लेकर कारवाही को अंजाम दिया गया है।

एआरटीओ कार्यालय में अचानक उस समय हड़कंप मच गया। जब जिलाधिकारी दीपक रावत एक भेलकर्मी की शिकायत पर अचानक कार्यालय में छापेमारी करने जा पहुंचे। कार्यालय के कमरे में दलालों के दखल और एक लिपिक के ड्राइवर के बाहर रजिस्ट्रेशन फार्म तय कीमत से अधिक में बेचने पर जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। जिलाधिकारी ने संबंधित लिपिक और उसके ड्राइवर को कड़ी फटकार लगाते हुए जेल तक भेजने की चेतावनी दे डाली। डीएम ने ड्राइवर मंजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया। साथ ही विभाग के कर्मियों सहित एआरटीओ से स्पष्टीकरण तलब किया।

जिलाधिकारी से एक भेलकर्मी ने यह शिकायत किया था कि एआरटीओ कार्यालय में दलालों का कब्जा है। वाहन रजिस्ट्रेशन फार्म तक कांउटर से न देकर बाहर अधिक कीमत लेकर बेंचा जाता है। इसकी पड़ताल करने के लिए जिलाधिकारी ने सोमवार को दिन में 11 बजे के करीब अचानक जा पहुंचे। कैंपस में एक विक्रम आटो में एक व्यक्ति अधिक कीमत लेकर पंजीकरण फार्म बेच रहा था। जिलाधिकारी ने उसको पकड़ा उसने इसमें लिपिक मोहन लाल की मिलीभगत बताई। इसके बाद जिलाधिकारी अंदर कार्यालय में दाखिल हुए। अंदर कमरे में कई बाहरी लोग जमें थे। कुछ तो बाकायदा लिपिक की कुर्सी पर बैठकर कांउटर से लोगों को डील कर रहे थे। जिलाधिकारी को पहचानते ही उसमें से कई भाग खड़े हुए। पूछताछ में पता चला कि लिपिक मोहन लाल कार्यालय में काउंटर पर फार्म लेने वालों को यह कहकर लौटा देता था कि आफिस में फार्म नहीं है और देहरादून से लाया जाएगा तो मिलेगा। बाद में परेशान लोग बाहर अधिक कीमत देकर उसके ड्राइवर जो ऑटो में फार्म रखकर बेचता था।

एआरटीओ कार्यालय परिसर हरिद्वार में दलालों का खेल कोई नया नहीं है। परिसर में जगह जगह इनकी उपस्थिति रहती है। हद तो यह है कि इनकी पहुंच लिपिकों से लेकर अधिकारियों तक होती है। जिस काम को करने में नियमों की दुहाई देकर दौड़ाया जाता है उसे मिनटों में कराने की गारंटी यह दलाल लेकर करा भी देते हैं। इसके एवज में वसूली गई मोटी रकम में कार्यालय के लोगों की हिस्सेदारी भी पूरी ईमानदारी से दी जाने की चर्चाएं खूब रहती हैं। दलाली के अड्डे की किस तरह लाइव रिपोटिंग जिला अधिकारी ने की है उसको लेकर आने वाले दिनों में जनता को अब किसी तरह की परेशानी नहीं होगी ये देखने वाली बात होगी।

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